बहुजन क्रांती मोर्चा के तत्वाधान में एनआरसी के विरोध में किया धरणा प्रदर्शन
बालाघाट। बहुजन क्रांति मोर्चा इस पंजीकृत गैर राजनीतिक संगठन द्वारा ज्ञापन दिया जाता है कि एनआरसी की सूची में से जिन 17,20,933 लोगों को निकाल दिया गया है, उन लोगों को फिर से एनआरसी की सूची में शामिल किया जाए। सीएए यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14,15,21 का हनन करने वाला कानून है, इसलिए इसको रद्द किया जाए। सीएए इस कानून की वजह से देश में अशंाति फैल चुकी है और इसके लिए केन्द्र सरकार जिम्मेवार है। इसलिए केन्द्रीय गृहमं9ी मा. अमित शाह और प्रधानमंत्री मा. नरेन्द्र मोदी इनके ऊपर देश में अशांति फैलाने और दो सामाजिक समूहो में विवाद निर्माण करने का गुनाह दर्ज किया जाए और यह केस फास्ट टे्रक कोर्ट में चलाई जाए। एनआरसी और सीएए के विरोध में आंदोलन करने वाले लोगों पर जो झूठे केसेस दाखिल किये हैं, उनको बिना विलंब पीछे लिया जाए। एनआरसी और सीएए के तहत नागरिकता का अधिकार देते समय डीएनए कार्ड जोडऩा चाहिए, ताकि सही व्यक्ति को नागरिकता प्रदान की जाय अर्थात डीएनए कार्ड के आधार पर ही नागरिकता दिया जाए। ईव्हीएम के साथ व्हीव्हीपीएटी लगाकर ईव्हीएम की वजह से आए हुए चार दोष दुरूस्त करने के लिए 100 प्रतिशत व्हीव्हीपीएटी लगाने का कानून बनाया जाए। वर्तमान सरकार ईव्हीएम में घोटाला करके आई हुई सरकार है। इसलिए ईव्हीएम के साथ लगाई गई व्हीव्हीपीएटी की पर्ची की गिनती के संदर्भ मे दिनंाक 8 अक्टूम्बर 2013 का मा. सप्रीम कोर्ट का जजमेंट लागू करके उस संदर्भ में प ्रेसिडेंट मानकर 100 प्रतिशत व्हीव्हीपीएटी की गिनती करने का कानून बनाया जाए। चुनाव आयोग को अनियंत्रित अधिकार दिये गये है, उनको समाप्त करके उस संदर्भ में स्वतंत्र योजना का निर्माण किया जाए। 10 सालों के लिए राजनैतिक आरक्षण बढ़ाकर एससी और एसटी को प्रतिनिधित्व विहिन किया गया है। इसलिए पूना पैक्ट की शर्तो का अमल करते हुए राजनैतिक आरक्षण समाप्त किया जाए एवं राजनैतिक आरक्षण की समीक्षा की जाए। इनटरमेडीट्री कास्ट निर्माण करके उसमें शामिल जातियों को स्वतंत्र रूप से आरक्षण दिया जाए और यह करते समय ओबीसी के आरक्षण को बिल्कुल ही धक्का ना लगाया जाए। 2021 को होने वाली जनगणना में जाति आधारित जनगणना की जाएग और उसका रिकॉर्ड डाटा हार्ड कॉपी में रखकर प्रकाशित किया जाए ताकि जनता इसको देख सके। एनआरसी और सीएए में जो नागरिक आते है उनको नागरिकता अधिनियम 1955 और विदेशित्व अधिनियम 1946 व भारतीय संविधान के अनुच्छेद 6 से 11 के अंतर्गत धर्मभेद को ना मानतते हुए प्रदान करने हेतु ज्ञापन दिया जाता है।इस बहुजन क्रांती मोर्चा में प्रमुख रूप से हाजी शोएब रजा खान, सुजीत बोमारड़े, रामदास ठवकर, करणसिंह नागपुरे, फारूक अहमद, ईमरान खान, सोमेश मेश्राम, बसंत मेश्राम, नवीन मेश्राम, ज्ञानदास जगने, लोचनसिंह देखमुख, नरेश टरेन्डे, सोविन्द्रसिंह लिल्हारे, अमित रावतकर, अफसर बेग, जाहिद, सतीश भारद्वाज, जितेन्द्र गोयल, आदित्य चौरे, महेन्द्र बघेल, आतीफ अली, महेन्द्र निकोसे, रंजीता बिसेन, सदारीव हरिनखेड़े, विमल कुमार, संजू मेन्डे, रमीश रजा खान, पूनालाल भण्डारी, गणेश शेंडे आदि लोग उपस्थित रहे।
बहुजन क्रांती मोर्चा के तत्वाधान में एनआरसी के विरोध में किया धरणा प्रदर्शन
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जनवरी 09, 2020