भू माफियाओं की मदद करने वाले अधिकारियों के खिलाफ हाईकोर्ट कठोर
बालाघाट। बालाघाट अभी तक भू माफियाओं को संरक्षण देने वाले अधिकारियों के प्रति कठोर रवैया अपनाते हुये हाईकोर्ट द्वारा शासन के अधिकारियों को नोटिस देकर पूछा है की क्यों ना ऐसे अफसरों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज की जाये।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खण्डपीठ के जस्टिस सील नागू,जस्टिस राजीव कुमार की बेंच ने मध्यप्रदेश सरकार और लोकायुक्त संगठन को नोटिस जारी करते हुये 7 दिन में जबाव मांगा है की क्यों ना भू माफियाओं की मदद करने वाले अधिकारियों के खिलाफ नगर पालिका अधिनियम की धारा 292 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की जाये।
ये नोटिस गृह सचिव,नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव, राजस्व प्रमुख सचिव, लोकायुक्त संगठन ग्वालियर कलेक्टर,कमिश्नर और एसपी को भेजे गये है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने याचिका में कहा है की जिला नगर निगम और समेत दुसरे विभागों में पदस्थ अधिकारियों द्वारा अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से पूरी नही की जा रही है। ये अधिकारी भू माफिया का साथ देकर सरकारी जमीनों पर कब्जे करा रहे है और गलत निर्माण की अनुमति दे रहे है जिस कारण ना सिर्फ अवैध निर्माण हो रहे है बल्कि सरकारी जमीन,नदी,नाले,तालाब, सड़क और फुटपाथ पर अतिक्रमण की चपेट में है।
शासकीय नियमों में कडे नियम होने के बावजूद भी अतिक्रमण हो जाते है क्योंकि अधिकारी शासन के प्रति अपने दायित्वों का निर्वाह ना करते हुये भू माफिया को संरक्षण देते है।
दिसंबर 2019 से मध्यप्रदेश सरकार के आदेश पर अवैध निर्माण और कब्जों पर कार्यवाही हो रही है लेकिन उन अधिकारीयों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही हो रही जिसके कार्यकाल में संरक्षण दिये जाने से अवैध काम हुये है।
नगर पालिका अधिनियम 1956 की धारा 292(डी) एवं जी के अनुसार अवैध निर्माण अथवा अतिक्रमण को अनदेखा करने वाले या गलत रूप से अनुमति देने वाले सक्षम अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिये लेकिन ऐसा नही हो रहा है। इससे भू माफिया और अधिकारियों की सांठगांठ फलफूल रही है।
बालाघाट जिले में भी इसी तरह का गठबंधन सक्रिय है और भू माफियाओं का जिले में राज चल रहा है जिन्हें राजनितिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नही की जा रही है। जिले के वारासिवनी में नगर पालिका द्वारा लीज देने का अधिकारी ना होने के बावजूद शासकीय भूमि पर लीज स्वीकृत कर नियम विरूद्ध अवैध पक्का आरसीसी स्लेब से निर्माण कार्य करने की अनुमति दी जा रही है।
इतना ही नही 85 अवैध निर्माण चिन्हित किये जाने के बावजूद उन्हें मात्र नोटिस जारी किया गया लेकिन अतिक्रमण हटाये जाने की बजाये उनके द्वारा बनाये गये निर्माण कार्य को नियमित कर दिया गया।
नगर पालिका परिषद के सीएमओ द्वारा ऐसे 8 लीजधारियों को 18/11/2019 नोटिस जारी कर उन्हें सूचित किया गया था की आपके द्वारा किया जा रहा सीमेंट,क्राकींट द्वारा पक्की दुकान का निर्माण कार्य किया गया है जो कि नगर पालिका अधिनियम की धारा 1961 की धारा 187(1) एवं अनुबंध की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन पाया गया है। जिसके कारण प्रावधनित धाराओं का उल्लंघन करने के फलस्वरूप दुकान की लीज निरस्त की जाती है एवं सूचित किया जाता है की 48 घण्टे के भीतर दुकान में रखा आदि सामान हटा लेंवे अन्यथा नगर पालिका द्वारा दुकान में तालाबंदी की जायेगी और सामान जप्त कर लिया जायेगा इस नोटिस जारी किये जाने के बावजूद नगर पालिका परिषद वारासिवनी द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई और एक समझौता पत्र की आड़ में उनके निर्माण कार्य को वैद्य करार कर दिया गया।
इसके कार्यवाही के बाद से नगर में अन्य लीजधारियों द्वारा तेजी से बिना अनुमति का पक्का भवन निर्माण किया जा रहा है और निर्माण कार्य करने में नगर पालिका सहयोग प्रदान कर रही है।
इन विसंगतियों के चलते भू माफियाओं और नगर पालिका मुख्य अधिकारी और परिषद के पदाधिकारियों की सांठगांठ के अवैध निर्माण कार्य करने वालों को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।
इस आधार पर जबलपुर उच्चन्यायालय में शीध्र ही याचिका दायर की जा रही है।