एनजीओ ने शिक्षा को बनाया व्यापार
बालाघाट। प्रदेश और केंद्र शासन द्वारा संचालित गैर सरकारी संगठन(एनजीओ) को जाने कितने सामाजिक कार्य करने के लिए बजट का आवंटन करती है लेकिन जिले के भीतर एनजीओं का मतलब महज शिक्षा समिति और शिक्षण कार्य संचालित करना ही रह गए है। एनजीओ का कार्य केवल जिले में शिक्षा का ही व्यवसाय बनकर रह गया है अधिकांश एनजीओ संचालकों के द्वारा अपने सामाजिक कार्य को छोड़कर व्यवसाय के प्रति अपना कार्य किया जा रहा है जो एनजीओ के नियम को अनदेखा कर रहे हैं। जो भारतीय संविधान की धारा 19(1) के तहत संगठन बनाकर कार्य करती है। जो राज्य सरकार के द्वारा केन्द्रीय कल्याण, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, मानव संसाधन विकास, ग्रामीण विकास, पर्यावरण एवं वन मंत्रालयो के अतिरिक्त राज्य सरकारों के विभिन्न विभाग विशेषतया समाज कल्याण विभाग समाज के विभिन्न वर्गो हेतु कल्याण प्रोग्रामों में संलग्र स्वयंसेवी संगठनों को सहायता अनुदान प्रदान करते है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार जिले में 406 एनजीओं रजिस्टर्ड है उनमें से महज 10 फीसदी ही सामाजिक उत्थान और अन्य कार्य करते हैं बाकी एनजीओ समिति बनाकर शिक्षा का व्यवसाय कर रहे है। बावजूद इसके शासन एनजीओ को प्रतिवर्ष लाखों यपए का अनुदान प्रदान करती है। बीते वर्ष तक जन अभियान परिषद के माध्यम से एनजीओ का रजिस्टे्रशन होता था लेकिन कुछ महीने पूर्व से ही अब यह रजिस्टे्रशन ऑनलाइन किया जाने लगा। जिस कारण अब इन एनजीओ को कितना भुगतान हुआ उन्होंने पैस कैसे खर्च किया यह सब कुछ जबलपुर स्तर से मॉनिटरिंग की जाती है इसलिए बालाघाट स्तर पर कोई भी इस विषय पर सटीक जानकरी देने से बचता दिखाई देता है। जानकारी अनुसार एनजीओ समिति गठन के लिए महज 31 सौ और 51 सौ रूपये में पंजीयन करवा के समिति बना दी जाती है और उसके बाद शिक्षण कार्य के नाम पर एनजीओ राशि मिलने में परेशानी नही होती यही कारण है कि आज जिले की भीतर एनजीओ के नाम पर शिक्षा का व्यवसाय फलता फुलता और निरंतर बढ़ता जा रहा है सामाजिक बूनियादी का विकास तो कोसो दूर नजर आ रहा है पर संचालनकर्ता अपने विकास में काफी रूचि दिखा रहे है।
एनजीओ समिति के यह हैं कार्य
एनजीओ हर तरह के छोटे-मोटे सामाजिक काम करती है। जैसे विधवा महिलाओ के लिए आवास, गरीब अनाथ बच्चों को पढ़ाना, महिलाओं की सुरक्षा, जल संवर्धन, समाज में किसी बीमारी जैसे एडस, कैंसर, कुपोषण, आदिवासी समाज की समस्याए आदि। और जरूरत मंद गरीब तबके के लोगो की सहायता करना है। ऐसे लोग जो गरीब बेसहारा लोगों के दुख दर्द को समझते है वे लोग ऐसे कई सारे लोगों को ढूंढ ही लेते हे जो इनके साथ साथ ऐसे लोगों की मदद कर सके। उद्देश्य पैसा कमाना नहीं है बल्कि यह लोगों की मदद करने का काम करती है।
एनजीओ ने शिक्षा को बनाया व्यापार
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जनवरी 09, 2020