नियम विरूद्ध खुले वाहनों से मृत जानवरों की ढुलाई
बालाघाट। शहर के वार्डो में मृत होने वाले मवेशियों (कुत्ता, बिल्ली, गाय, सुअर आदि) को खुले वाहनों में परिवहन कर ले जाया जा रहा है। प्रतिदिन दर्जनों मृत जानवरों को नपा के खुले वाहन से परिवहन करते किसी भी समय देखा जा सकता है।
इससे वातावरण तो प्रदूषित होता ही है, साथ ही इस लापरवाही का खामियाजा आमजनता को स्वास्थ्य के साथ समझौता कर चुनाना पड़ रहा है। खासबात यह है कि ऐसा कर नपा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशो की नाफरमाही कर रही है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत भी यह अपराध की श्रेणी में आता है। बावजूद इस दिशा में जिला प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है।
दूषित हो रहा वातावरण
खुले वाहनों में मृत जानकारों का परिवहन करने के दौरान सढ़ चुके इन मृत जानवरों की बेजा दुर्गंध आती है। जिसका सामना वार्डवासी सहित राहगीर व चालकों को भी करना पड़ता है। कई बार नपा के वाहन गुजरने के बाद लोगों को उल्टियां या जी मचलाने जैसी शिकायत भी होती है।
नपा के इस खुले वाहन से वातावरण पूरी तरह से दुर्गंध फैल जाती है। स्थानीयजनों के मुताबिक नपा कर्मचारी मृत मवेशी को रखकर पूरे अन्य मृत जानवरों को उठाने शहर का चक्कर लगाते है। ऐसे में जहां-जहां से वाहन गुजरता है वहां खड़े रहना भी शहरवासियों का मुश्किल हो जाता है।
जुर्माना व कारावास का प्रावधान
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के विरूद्ध अपशिष्ट पदार्थो का निपटान करने वाले व्यक्ति या संस्था पर जुर्माने की कार्यवाही हो सकतती हे। जानकारों की माने तो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत 5 वर्ष के कारावास एंव एक लाख् रूपए तक का जुर्माने का प्रावधान है। यदि इसके बावजूद भी प्रदूषण पर नियंत्रण नही किया जाता है तो यह सजा सात वष्र तक की भी हो सकती है।
बीमारियां फैलने की आशंका
खुले वाहन से मृत जानवरों के परिवहन मामले में कुछ जागरूक लोगों ने शिकायत भी की है। जिसमें उन्होंने बताया कि नपा के इस कृत्य से घातक बीमारी व महामारी फैलने की आशंका भी बन रही है। आमजन इस मामले में कुछ देर की समस्या है सोचकर खामोश रह जाते है। जबकि नियमानुसार मृत मवेशियों का परिवहन बंद वाहनों मे किया जाना चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत मानव स्वास्थ्य, जीवजंतुओं और यहां तक कि पर्यावरण तथा जमीन के लिए भी घातक साबित होने वाले मृत मवेशी व अपशिष्ट पदार्थो का निपटान रिहायसी क्षेत्र से 10 किमी दूर करने का प्रावधान है। यहीं नहीं कचरा व मृत जानवरों के परिवहन के लिए लीकप्रुफ वाहनों का इस्तेमाल होना चाहिए, लेकिन इसके विरूद्ध नपा शहर से महज पंाच किमी, दूर गर्रा जैसे रिहायसी क्षेत्र में और खुले वाहनों में मृत जानवरों का परिवहन कर रहा है। खुले स्थान में ही उन्हें फेका जा रहा है।
नपा कर्मचारी वार्डवासियों की समस्या हल करने ही मृत मवेशियों को उठाकर अन्यत्र स्थान पर दफनाते है। नपा में डिब्बा बंद वाहन भी हैं हम उससे मवेशियों का निपटाए जाने की व्यवस्था बनवाते है।
दिनेश बाघमारे,
नपा सीएमओ