पक्के आवास की चाह में बिके जेवर, बने कर्जदार

पक्के आवास की चाह में बिके जेवर, बने कर्जदार


 बालाघाट। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के आवास की चाह में घर के जेवर तो बिके ही साथ ही कर्जदार भी हो गए है।  इतना सब करने के बावजूद अभी भी मकान में कुछ कार्य शेष ही है। 
 महंगाई के इस दौर में ढाई लाख से परिवार के लिए पक्का मकान बना पाना संभव नहीं है। सरकार को भी इस विषय में सोचना चाहिए। यह कहना प्रधानमंत्री आवास योजना के उन हितग्राहियों का है, जिन्हें योजना के तहत किस्तों में ढाई रूपए मिल चुके है। लेकिन इसके बावजूद उनके आवास पूर्ण नही हो पाए हैं। इन हितग्राहियों का कहना है कि पक्के आवास की चाह में उन्होंने उनके पुर्खो का हवादार व होलसोल कच्चा मकान ढहा दिया और अब डिब्बेनुमा छोटे से आवास में जीवन यापन करना पड़ रहा है।
 दरअसल हितग्राहियों को पक्का मकान बनाने में योजना के तहत स्वीकृत ढाई लाख की राशि नाकाफी लग रही है। हालांकि ढाई लाख की यह राशि सरकार द्वारा 270 से 300 स्क्वेयर फिट में भवन निर्माण किए जोन स्वीकृत की जा रही है। लेकिन योजना से संबंधित मापदंडों की जानकारी के अभाव में हितग्राही अपना पूरा की पूरा कच्चा मकान ढहा रहे है। इसके बाद उनके कच्चे  मकान के पूरे क्षेत्रफल में मकान बनाना महंगा पड़ रहा है। शहर की नगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत प्रथम बार में स्वीकृत 678 व 244 कुल 922 मकान मकान सभी निर्धारित क्षेत्रफल से अधिक में निर्माण किए गए हैं। परिणाम स्वरूप जेवर बेचकर व कर्जा लेने के बावजूद इन सभी मकानों में कुछ न कुछ कार्य शेष रह गया है। अब हितग्राही राशि बढ़ाए जाने की मांग कर रहे है। 
पांच माह बीते नहीं आई तीसरी किस्त की राशि
 इधर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहर के 33 वार्डो में प्रथम बार में 678 फिर 244 कुल 922 मकान स्वीकृत किए गए हैं। जिन्हें सभी चार किस्तों का भुगतान किया जा चुका है। वहीं अगले वर्षो में स्वीकृत 12 सौ व फिर 640 हितग्राहियों को दो किस्तें ही प्रदान की गई है।
 तीसरी किस्त के लिए करीब पांच माह से अधिक का समय होने लगा है, लेकिन तीसरी किस्त का भुगतान नही किया गया है। इस दौरान निर्माण सामग्रियों के दाम बढऩे से मकान की लागत भी बढ़ती जा रही है। 
छह माह में दोगुनी हुई निर्माण सामग्री
 गायखुरी निवासी हितग्राही नरेश दौने व दुलीराम उरकुड़े ने बताया समयके साथ भवन निर्माण सामग्रियों के दामों में भी नित्य इजाफा हो रहा है। पहले जब इन्होंने निर्माण कार्य शुरू किया था उस समय 800 से 1000 रूपए ट्राली के हिसाब से रेत व 48 सौ रूपए ट्राली के हिसाब ईट मुहैया हो गई थी। लेकिन छह माह बाद अब उसी रेत का मूल्य 1200 से 15 सौ व ईट का मूल्य 7 हजार से 72 सौ रूपए ट्राली हो गया है। इसके अलावा लोहा, सीमेंट व अन्य मटेरियल के दाम भी बढ़ गए है। 
राशि बढ़ाने की मांग
 हितग्राहियों के अनुसार सरकार किस्तों के भुगतान में स्वयं देरी कर रही है। इस कारण घर बनाने का उनका बजट बिगड़ता जा रहा है। सरकार को या तो निर्माण सामग्रियों के बढ़ते मूल्यों पर रोक लगानी चाहिए या फिर योजना के तहत स्वीकृत ढाई लाश की राशि को बढ़ाया जाना चाहिए। नहीं तो सरकार गरीबों को फायदा पहुंचाने वाली अतिमहत्वकांक्षी योजना हितग्राहियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनकर रह जाएगी। 
पक्के मकान ने बनाया कर्जदार
 आवास योजना के हितग्राही भटेरा रोड निवासी राजकुमार यादव ने बताया कि सज्जा हाईट तक मकान निर्माण करने उन्हें योजना के तहत दो किस्तों में एक लाख की राशि मिली है। लेकिन इतने निर्माण में ही उनके करीब एक लाख 75 हजार रूपए की राशि खर्च हो चुकी है। इसके लिए उन्होंने समूह के माध्यम से कर्जा लिया है। अब तीसरे किस्त के इंतजार में काम रूका हुआ है, इस दौरान निर्माण सामग्रियों के मूल्यों में बढ़ोतरी हो गई है। 
 निर्माण सामग्री के मूल्यों में नियंत्रण व योजना की राशि बढ़ाए जाने संबंधित अधिकारी शासन के पास ही है। हितग्राही निर्धारित मापदंडों व क्षेत्रफल में निर्माण करें तो ढाई लाख में मकान बन सकता है। हितग्राही मकान को स्वयं के हिसाब से सुसज्जित करने के फेर में खर्चा कर रहे है। योजना के तहत तीसरी किस्त भी आवंटित होते ही हितग्राहियों के खातों में भुगतान की जाएगी। 
सूर्य प्रकाश उके, आवास योजना प्रभारी शहरी


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