सैकड़ों बच्चे शिक्षा के अधिकार से रह गए वंचित
बालाघाट। सब पढ़े, सब बढ़े के नारे के साथ स्कूल चले हम सर्व शिक्षा अभियान और शिक्षा का अधिकार अधिनियम आरटीई जैसी तमाम योजनाओं के बावजूद जिले में शत प्रतिशत बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही है। जबकि ताजूब की बात तो यह है कि वर्ष 2018-19 के आकड़े आज भी पोर्टल में दर्ज नही किए गए है। क्योंकि कारण यह है कि गृह क्षेत्र अभियान के तहत स्कूल के शिक्षकों ने मनमर्जी से कागजों में आकड़े दर्शा दिए है जिस वजह से डीपीसी विभाग को आकड़े निकालने में पसीना छूट रहा है कि आखिर पिछले वर्ष कितने बच्चे शिक्षा से वंचित रह गए है। वर्ष 2017-18 के एजुकेशन पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों की मानें तो शिक्षण सत्र की शुरूआत में जिले में 3659 बच्चे शाला त्यागी व अप्रवेशी नामांकित किए गए थे। वहीं सर्व शिक्षा अभियान के जिला परियोजना समन्वयक डीपीसी कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार इन 3659 बच्चों में भी वर्तमान में 1358 बच्चों ने पुन: स्कूल छोड़ दिया है जो शिक्षा के अधिकार से वंचित हो रहे है। इधर सर्व विभाग व आरटीई के तहत तमाम प्रयास कर ऐसे बच्चों को स्कूल आने प्रेरित किए जाने की बात जिम्मेदार कह रहे है। इनके अनुसार पे्ररकों व अन्य माध्यमों से भी ऐसे बच्चों को धीर-धीर कर स्कूलों से जोड़ा जा रहा है। सर्व शिक्षा अभियान के अधिकारियों के अनुसार शाला त्यागी व अप्रवेशी बच्चों के अलावा भिक्षावृति से पीढि़त बच्चों को भी ढूंढकर उन्हें आवासीय शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कलेक्टर के प्रयासों से शहर में बालक व बालिका छात्रावास का संचालक किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कलेक्टर के प्रयासों से शहर में बालक व बालिका छात्रावास का संचालक किया जा रहा है। इन छात्रावासों में निराश्रित और भिक्षावृति करने वाले करीब 245 बच्चों को रखा गया है।
आर्थिक परेशानी व कृषि कार्य बनी वजह
सर्व शिक्षा अभियान के अधिकारियों के अनुसार बच्चों के स्कूल छोडऩे और प्रवेश नहीं लेने के बहुत से कारण सामने आए हैं। विभाग द्वारा कराई गई मैपिंक में सर्वाधिक बच्चों के स्कूल छोडऩे का कारण अभिभावकों की आर्थिक तंगी सामने आई। खासकर ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे बच्चों के अभिभावक रोजी रोटी की तलाश में एक स्थान पर नहीं रह पाते है। ऐसे में उनके बच्चों का भी स्कूल छूट जाता है। इसी तरह कृषि कार्य अपने छोटे भाई बहनों की देख रेख विकलांगता और परिवार की मदद करने मजदूरी कराए जाने के कारण भी कई बच्चे स्कूल से दूर हो रहे है।
वर्ष 2016-17 से लेकर वर्ष 2018-19 तक जो बच्चों की सूची निकाली गई थी, वही पूर्व मे जो घर घर जाकर सर्वे किया जाता था लेकिन यह सर्वे को आज बंद कर दिया गया है। जिसके आधार पर गृह क्षेत्र अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत स्कूल के शिक्षक ही रजिस्ट्रर में आकड़े भरकर दिए है। जबकि कुछ लोग गांव छोड़कर चले गए या फिर कुछ लोग कालेज में अध्यनरत हो गए है। हालांकि यह आकड़े जो दिए गए है उस पर अभी यह समझ में नही आ रहा है कि आखिर कितने बच्चे शिक्षा से वंचित रह गए है।
पी के अंगूरे
डीपीसी बालाघाट