डॉक्टरों की कमी, लडख़ड़ाई स्वास्थ्य सेवाएं

डॉक्टरों की कमी, लडख़ड़ाई स्वास्थ्य सेवाएं


 लालबर्रा। क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवांए पूरी तरह से लडख़ड़ा गई है। हालात बद से बदतर हो गई है। पहले से ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा लालबर्रा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अब बगैर डॉक्टर के स्वास्थ्य सेवाएं देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। क्षेत्रीयजनों को मजबूरीवश  झोलाछाप डॉक्टरों की शरण लेना पड़ रहा है।
 इसके बाद भी स्वास्थ्य लाभ नहीं मिलने पर बेहतर इलाज के लिए बालाघाट या अन्य बड़े शहरों की तरफ रूख करना पड़ता है। कई वर्षो से एकमात्र एमबीबीएस डॉक्टर मेश्राम अपने अधीनस्थ स्टाफ के साथ जैसे तैसे सरकारी अस्पताल का संचालन कर रहे थे। उनके सेवानिवृत होने के बाद अब स्वास्थ्य केंद्र में एक भी एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। डॉक्टर परेश विप्लव जिनके पास सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का प्रभार है वह केवल कभी-कभी ही स्वास्थ्य केंद्र पर आते है। ऐसे भी स्वास्थ्य केंद्र में महिला रोग विशेषज्ञ, सर्जरी डॉक्टर महिला, पुरूष, आयुष डॉक्टर लैब टैक्रीशियन, लैब अटेंडेंट सहित अन्य पद पूर्व से ही रिक्त पड़े हुए है। बावजूद 78 ग्राम पंचायत वाले जनपद पंचायत मुख्यालय के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक भी डॉक्टर ना होना सरकार के उदासीन रवैया को प्रदर्शित कर रहा है। इधर, डॉक्टरों की कमी  होने के बाद किसी भी दल के नेताओं द्वारा आवाज नहीं उठाई जा रही है।
20 वर्ष पुरानी मशीन से हो रहा एक्स-रे
 बेहतर स्वास्थ सेवाओं के लिए जहां डिजिटल एक्सरे मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं लालबर्रा स्वास्थ्य केंद्र में 20 वर्ष पुरानी मशीन से एक्स-रे निकाले जा रहे हैं जो मशीन कभी चलती है तो कभी बंद हो जाती है और इसका रिजल्ट भी गुणवत्तापूर्ण नहीं आता। इसी तरह स्वास्थ्य केंद्र में सोनोग्राफी मशीन की भी कमी ग्रामीण जनता को काफी खल रही है। ग्रामीण जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रबुद्ध जनों ने डिजिटल एक्सरे मशीन व सोनोग्राफी मशीन लगवाए जाने की मांग शासन-प्रशासन से की हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी नहीं हैं डॉक्टर
 क्षेत्र अंतर्गत आने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में भी डॉक्टर नहीं है। ग्राम जाम और मोहंगांव धपेरा में संचालित होने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में डॉॅक्टर नहीं है। मोहगांव में एक आयुष डॉक्टर है जो अपने स्टाफ के साथ सेवाएं दे रहा है। लेकिन कटंगझरी और जाम में तो आज डॉक्टर भी नहीं है। यहां डॉक्टरो की कमी के चलते इन केंद्रों पर कंपाउडंर ही इलाज कर रहे है। 


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