प्रशासनिक सीलबंद कार्यवाही से चिकित्सक नाराज

प्रशासनिक सीलबंद कार्यवाही से चिकित्सक नाराज


 बालाघाट। सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा चिकित्सकों के क्लीनिक को सील बंद किए जाने की कार्यवाही से जिला अस्पताल के सभी चिकित्सक खासे नाराज हैं और उन्होंने इस तरह की कार्यवाही ाके डॉक्टरों की छबी धूमिल करने वाली कार्यवाही बताया है साथ ही इसकी शिकायत इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से किए जाने की बात कहही है। हालांकि कार्यवाही की दूसरे दिन ही प्रशासनिक अधिकारियों ने सीज किए गए क्लिनिक को खोल दिया लेकिन जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने इस प्रशासनिक कार्यवाही के खिलाफ अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यकत की हैं। जिसके तहत बुधवार को जिला अस्पताल के सभी चिकित्सक एक जगह एकत्र हुए जहां उन्होंने इस कार्यवाही के विरूद्ध रूपयरेखा बनाए जाने का निर्णय लिया जिसमें उन्होंने बिना जानकारी के कार्यवाही करने का आरोप लगाते हुए इस कार्यवाही की निंदा की साथ ही इसकी शिकायत इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से किए जाने की बात कही है। इस दौरान जिला अस्पताल के आरएमओ अरूण लांजेवार, शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर निलय जैन, आशुतोष बागरे, डॉ नितिन रावतकर और डॉ गीता बोकड़े सहित अन्य चिकित्सक प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। 
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से करेंगे शिकायत-डॉ बागरे
 इस पूरे मामले के संदर्भ में की गई चर्चा के दौरान जिला अस्पताल के शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर आशुतोष बागरे ने बताया कि 10 फरवरी को एसडीएम की टीम उनके घर पर आई थी। जिनके द्वारा उनके परामर्श क्लिनिक को सील बंद करने की कार्यवाही की गई जबकि उनकी नाईट ड्यूटी थी। शाम 8 बजे से सुबह के 8 तक ड्यूटी करने के बाद वे। उन्होंने दोपहर 1.30 बजे तक जिला अस्पताल में अपनी ड्यूटी दी जिसके बाद में घर आए थे। उस दौरान यह कार्यवाही की गई। उन्होंने बताया कि जब एसडीएम उनके घर कार्यवाही करने पहुंचे तो उन्होंने अपने ड्यूटी का समय आदि की जानकारी एसडीएम व सिविल सर्जन को भी दी लेकिन जिस पर सिविल सर्जन ने एसडीएम ाके कार्यवाही नही करने की कार्यवाही की गई। इससे मेरी इमेज धूमिल हुई है और मुझे मानसिक क्षति हुई है। सभी चिकित्सक चाहते है कि प्रशासनिक रूप से जो भी कार्यवाही की जाती है वह कार्यवाही घर जाकर ना की जाए और डॉक्टरों की ड्यूटी का समय ओडीपी आदि की जानकारी लेने के बाद ही यह कार्यवाही की जाए एसडीएम की इस कार्यवाही के बाद छवि धूमिल होने और मानसिक की इस कार्यवाही के बाद  छवि धूमिल होने और मानसिक क्षति पहुंचने पर सभी चिकित्सक इसकी शिकायत।(आई एम ए) इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से करेंगे।
एसडीएम ने जल्दबाजी मे कदम उठाया है- आर के मिश्र
 वहीं इस पूरे मामले को लेकर की गई चर्चा के दौरान जिला अस्पताल के सिविल सर्जन आरके मिश्र ने बताया कि कलेक्टर दीपक आर्य द्वारा जिला अस्पताल का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है वे व्यवस्थाओं में सुधार कर रहे है 10 फरवरी को एसडीएम अपनी टीम के साथ डॉ आशुतोष बागरे के घर गए जहां डाक्टर ने उन्हें बताया कि उनकी नाइट ड्यूटी थी इसीलिए ऑफ के दौरान वे अपने क्लीनिक में प्रैक्टिस कर रहे हैं। पर एसडीएम नही माने और मुझे फोन करके बुलाया मैने उनसे कहा कि मै जस्ट घर आया हूॅ ड्राइवर खाना खाने गया है। उसके आने के बाद आता हूं तो वह मुझसे भी नाराज हो गए और मेरे घर आकर मेरे भी किलनिक को बंद करने की बात कहने लगे जिसकी शिकायत मैने कलेक्टर दीपक आर्य से भी की है। जिसमें कलेक्टर दीपक आर्य ने भी कहा है कि एसडीएम ने गलत कार्यवाही की है। उन्होंने आगे बताया कि वैसे ही जिला अस्पताल बुलाना पड़ता है। जबकि कलेक्टर दीपक आर्य ने एसडीएम को यह साफ निर्देश दिए थे कि वह कोई भी कार्यवाही सिविल सर्जन के बगैर ना करें फिर भी एसडीएम ने अकेले ही जाकर डाँ आशुतोष बागरे के कलीनिक को सील बंद किए जाने की कार्यवाही कि मुझे ऐसा लगता है कि एसडीएम साहब ने जल्दबाजी में यह कदम उठाया है।


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