तीन बच्चे हैं तो घर में बैठो

तीन बच्चे हैं तो घर में बैठो

बालाघाट। शिक्षकों से पूछा गया कि आपके कि आपके कितने बच्चे हे बताओ, ऐसे नहीं एक शपथ पत्र पर पूरी जानकारी लिखित रूप में भेजो कि वर्ष 2011 के बाद आपके बच्चों की संख्या बताएं। यही नहीं 2 से अधिक बच्चे हैं तो सीधे-सीधे नौकरी से हटाकर घर बैठाने की तैयारी की जा रही है। यह बात सुनने में भले ही अजीब हो किंतु सत्य है मांगी गई यह जानकारी शपथ पत्र में शिक्षको से भरा कर पहुंचा दिया गया है जिसकी पुष्टि जिला शिक्षा अधिकारी आरके लटारे द्वारा की गई है।
शिक्षकों ने स्वयं दी शपथ पत्र मे बच्चों की जानकारी
विधानसभा से आए एक शपथ पत्र को जिले के सभी स्कूलों के सभी शिक्षकों से भरवाया गया। उनसे जानकारी ली गई कि आपके स्वयं की बच्चों की संख्या उम्र वह 2011 के बाद जन्मे बच्चों का विवरण भेजे। विधानसभा से आए शपथ पत्र और मिले आदेशों का अनुसरण करते हुए जिले के भरकर शपथ पत्र विभाग के माध्यम से विधानसभा पहुंचा दिया है।
विधानसभा में विधायक ने उठाया था वह मुद्दा
सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार जिले के भीतर लगभग आधा सैकड़ा से अधिक शिक्षको के बच्चों की संख्या 2 से अधिक है। इस बात की शिकायत बकायदा वरिष्ठ स्तर पर की गई थी। जिस पर कई दिनों से कोई कार्यवाही नहीं हुई। इस बात से आहत होकर वर्तमान विधानसभा के विपक्षी दल के विधायक के माध्यम से यह प्रश्र विधानसभा में लगाया गया।
गोपनीय रखा गया यह मामला
सूत्रों से मिली जानकारी  के अनुसार इस पूरे मामले को गोपनीय रखा गया है जिसमें दो से अधिक संतान वाले शिक्षकों की सूची अलग से तैयार की गई है। विधाानसभा का मामला होने की वजह से इसे बेहद गोपनीय रखा गया है। देखना अभी है कि आगामी दिनों में दो से अधिक संतान वाले शिक्षकों पर कार्यवाही होती है या फिर उन्हें नियम किंतु-परंतु के तहत अभय दान दे दिया जाता है।
शिक्षकों से भरवाए गए हैं शपथ पत्र-आरके लटारे
इस पूरे मामले के संदर्भ में ही गई औपचारिक चर्चा के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी आरके लटारे ने बताया कि जनवरी माह के अंत तक जिले के प्रत्येक शिक्षकों से शपथ पत्र के माध्यम से यह जानकारी मागी गई थी। विधानसभा द्वारा प्रत्येक शिक्षकों के संतान के विषय में चाही गई जानकारी शिक्षकों के द्वारा स्वयं के भरे हुए शपथ पत्र विधानसभा में भेज दिए गए है। उन्होंने बताया कि विधानसभा में किसी विधायक द्वारा शिक्षकों के बच्चों की जानकारी का मुद्दा उठाया गया था जिसके चलते वरिष्ठ स्तर से शपथ पत्र का प्रारूप भेजा गया था जिसमें स्वयं के बच्चों की जानकारी भरकर शिक्षकों ने भेज दिया है।


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