आधा दर्जन गांवों के लिए बना उपस्वास्थ्य केंद्र रहता है बंद
मोहगांव, मलाजखंड । सरकार ने अधिकांश जगहों पर स्वास्थ्य केंद्र खोल दिए गए हैं जिससे ग्रामीणों को समुचित इलाज मिल सके, लेकिन वहां पदस्थ स्वास्थ्य कर्मचारियों की लापरवाही और उदासीनता के चलते सरकारी प्रयास सिफर साबित होते हुए दिखाई पड़ते है। ये हालत इन दिनों बैहर विधानसभा की जनपद पंचायत बिरसा के ग्राम पाथरी में दिखाई दे रहे है। यहां के उपस्वास्थ्य केंद्र में हमेशा ताला लटका रहता है। इसकी शिकायत आदिवासी बैगाओं ने कई बार बीएमओ से लेकर जनप्रतिनिधियों से की। उसके बाद भी जिम्मेदार द्वारा इसे गंभीरता से नहीं नहीं लिया जा रहा है।
बैहर विधानसभा से 50 किलोमीटर दूर ग्राम पाथरी में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा उपस्वास्थ्य केंद्र डेड़ दशक पहले आधा दर्जन गांवों के बैगाओं को इलाज मिले सके, इसके लिए खोला गया है लेकिन यहां पदस्थ एएनएम द्वारा उपस्वास्थ्य केंद्र खोलकर नहीं बैठती है। जिसके कारण ग्राम पाथरी सहित अन्य गांवों के बैगाओं को इलाज नहीं मिलता है। उपस्वास्थ्य केंद्र बंद रहने से बैगाओं द्वारा मजबूरन झोलाछाप डॉक्टरों की शरण लेनी पड़ती हैं या फिर बैहर 50 किमी, बिरसा 35 किमी का सफर तय करना होता है। इतनी दूरी तय करते वक्त मरीजों की जान पर बन आती है। बैगा ग्राम के आदिवासी बैगा इसी के चलते बीमार होने पर इलाज कराने नहीं पहुंचा पाते है। इन आधा दर्जन गांवों में करीब 10 हजार की आबादी निवास करती है।
अस्पताल कब हुआ था चालू नहीं है जानकारी
ग्रामीण सुंदरी धुर्वे, ज्ञान सिंह धुर्वे ने बताया कि अस्पताल नहीं खुलने से अब सरकारी अस्पताल ग्राम में नाममात्र का रह गया है। अस्पताल के सामने हरी घास उग आई है। अस्पताल कब चालू हुआ होगा यह जानकारी ग्राम के भोले-भाले आदिवासी बैगाओं को ठीक तरीके से मालूम नहीं है। इसकी शिकायत बीएमओ बैहर को की गई, लेकिन उपस्वास्थ्य केंद्र में एएनएम आस्था वर्षा तीन साल से पदस्थ है पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है। जिसके चलते उनके हौसले बुलंद है और सरकार से मोटी सैलरी लेकर शासन को चुना लगाया जा रहा है।
इनका कहना है
उपस्वास्थ्य केंद्र में एक एएनएम पदस्थ है यदि वह अस्पताल में नियमित सेवाएं नहीं देती है तो कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टर आरसी पनिका, सीएमएचओ बालाघाट।
आधा दर्जन गांवों के लिए बना उपस्वास्थ्य केंद्र रहता है बंद
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मार्च 03, 2020