टैक्सी परमिट के नाम पर संचालकों ने मचाई लूट

टैक्सी परमिट के नाम पर संचालकों ने मचाई लूट

बालाघाट। मप्र शासन से परिवहन विभाग से रजिस्ट्रर्ड टूर एंव टे्रवल्र्स के माध्यम से संचालित की जाने वाली टैक्सी ववाहनों का रजिस्टे्रशन, फिटनेस सर्टिफिकेट आल इंडिया परमिट, कमशियल इंशोरेंस और अन्य राज्यों के लिए संचालित होने वाला आथो राईजेशन सर्टिफिकेट होना अतिआवश्यक है। लेकिन बालाघाट में अधिकांश टूर एंड टे्रवल्र्स के संचालकों के द्वारा टैक्सी के नाम पर प्राईवेट में रजिस्ट्रर्ड वाहनों को टैक्सी में संचालित किया जा रहा है।
यह है टैक्सी के नियम
आम लोगों को किराए में एक दो रूपए कम देकर ऐसी टेक्सीयों को किराए पर दी जाती है जो कि टैक्सी के रूप में संचालित नही हो सकती है। जबकि टैक्सी में संचालित होने वाली नंबर प्लेट पीले रंग की होती है। जिस में काले रंग से नम्बर आगे पीछे और दोनो ओर साईड में अंकित होता है। इन टैक्सी वाहनों को संचालित करने केलिए ड्राईवरों को विशेष लाईसेंस हेवी बेच बिल्ले वाला दिया जाता है और ये वाहन चालक 4 से 5 वर्षो का अनुभव प्राप्त होते है। लेकिन प्राइवेट वाहन को जिस तरह से टैक्सी के रूप में संचालित किया जा रहा है जो एक दंडनीय अपराध है। कभी दुर्घटना की स्थिति में वाहन में बैठे लोग ओर अन्य व्यक्तियों को टैक्सी परमीट में संचालित पीली पट्टी वाले टैक्सी वाहन से लाखों रूपए का बीमा राशि परिजनों को प्राप्त हो सकती है। लेेकिन प्राइवेट वाहन से दुर्घटना होने पर यात्रा करने वाले व्यक्तियों का अधिकांश केसो से बिमा राशि प्राप्त नही होती है। ऐसा ही एक मामला सालो पहले एक टे्रवल्र्स संचालक के साथ घटित हुआ जिसका मृतक के परिजनों ने 35 लाख रूपए का दावा राशि प्राप्त करने के लिए न्यायालय की शरण ली है। इस घटना में टे्रवल्र्स संचालक द्वारा प्राइवेट वाहन टेक्सी के रूप में भेजा गया था।
अधिकारी क्यो मेहरबान
कलेक्टर के आदेशानुसार सभी यात्री बसों और अन्य वाहने के दस्तावेजों का परिक्षण किया जा रहा है। लेकिन बसों में ही यात्रा करने वाले यात्रियो की जान खतरे में अथवा टैक्सियां किराए पर लेकर विभिन्न आयोजन जैसे शादी ब्याह अन्य शासकीय कार्यालय में संचालित वाहनों में यात्रा करने वालों की कोई किमत नही है जबकि दर्जनों बालाघाट से महानगरों ओर अन्य शहरो के लिए टैक्सी के रूप में टे्रवल्र्स एजेंसी के माध्यम से जाते है। लेकिन बालाघाट का परिवहन विभाग आंखे मुंदे बैठा है। इनके द्वार टूर एंड टे्रवल्र्स आपरेटर्स के कार्यालयों में कभी झाक कर नही देखा जाता है। जबकि परिवहन अधिकारी को नियमित रूप से समय समय पर जांच करके अवैध रूप से संचालित प्राइवेट टे्रक्सी वाहनो पर कार्यवही करना चाहिए।
बबालाघाट के कुछशासकीय कार्यालय में प्राइवेट वाहनों को टैक्सी के रूप में संचालित कर प्रदेश शासन के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है।


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