अधिकृत डॉक्टर न रहने पर ड्यूटी डॉक्टर नहीं लगा पा रहे रैबीज का इंजेक्शन
बालाघाट। रहवासी क्षेत्रों में आवारा श्वानों के साथ ही बंदरों की धमाचौकड़ी से रहवासियों का जीना मुश्किल हो गया है। स्थिति ये तक निर्मित हो चुकी है कि मानव जीवन के साथ घुल मिल रहे बंदर अब मानवों पर हमला भी करने लगे है। हमले की स्थिति निर्मित होने पर पीडि़त को शहीद भगत सिंह जिला अस्पताल में इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है। कारण भोपाल स्तर से आदेश कि रैबीज के इंजेक्शन का अधिक उपयोग हो रहा है इसलिए तय किए ही डॉक्टर जब तक इंजेक्शन न लिखे तब तक मरीज को इंजेक्शन नहीं लगाना है। ऐसी स्थिति में मरीज इलाज के लिए भटक रहा है।मैदान घटी घटना सलाह के बाद भी नहीं माना स्टाफ
शनिवार की सुबह मुंशीपल मैदान में सुबह से ही बंदरों का झुंठ धमाचौकड़ी मचा रहा था। यहां मैदान में घुमने, व्यायाम करने वाले और खिलाड़ी भी मौजूद थे। इसी दौरान गुस्साए एक बंदर ने जमकर उत्पात मचाया और मैदान में घुम रहे एक फुटबाल खिलाड़ी को काट दिया। जिसके बाद पीडि़त को जिला अस्पताल इलाज के लिए ले जाया गया। यहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने पहले तो इंजेक्शन लगाने के लिए वह अधिकृत नहीं है कहकर मना कर दिया। जिसके बाद संबंधित डॉक्टर से चर्चा कर इंजेक्शन लिखवाया गया। सर्जिकल कक्ष पर मौजूद स्टाफ तय डॉक्टर ने इंजेक्शन नहीं लिखा है कहकर इंजेक्शन लगाने से मना कर दिया। ऐसी स्थिति में मरीज को इलाज के लिए काफी देर तक परेशान होना पड़ा है।
चार डॉक्टर तय, रोजना आ रहे दस से अधिक मरीज
शहीद भगत सिंह जिला अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन अधिकता में लगने के चलते भोपाल स्तर से चार डॉक्टर को ही अधिकृत किया गया है। सर्जिकल डॉक्टर, सिविल सर्जन व आरएमओ इनके अलावा कोई भी डॉक्टर यहां तक की ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर भी रैबीज के मरीज को इंजेक्शन लिखने में बाध्यता जाहिर कर देता है। वहीं रोजाना दस से अधिक मरीज श्वान व बंदरों के काटने से अस्पताल इलाज के लिए पहुंच रहे है। ऐसे में इन मरीजों को परेशान होने के साथ ही कई मर्तबा प्रायवेट से खरीदकर इंजेक्शन लगवाना पड़ रहा हैं।
इनके काटने से लगवाना पड़ता है रैबीज का इंजेक्शन
शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में श्वान, बंदर, लंगूर व बिल्ली के काटने पर रैबीज का इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। वहीं जंगली जानवरों में लकड़बगघा, भेडिया, जंगली श्वान, रीछ, जंगली सूअर समेत अन्य के काटने पर रैबीज का इंजेक्शन लगवाना जरुरी हो जाता हैं।
रैबीज के इंजेक्शन सप्लाई उच्च स्तर से नहीं पा रही है। स्थानीय स्तर इंजेक्शन लेकर मरीजों को लगा रहे है। वहीं चार डॉक्टर इसके लिए अधिकृत किए गए है। व्यवस्था को और अधिक सही करने का प्रयास किया जाएगा।
-एके जैन, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल।