स्वागत के चक्कर में पहले दिन ही लेट हुई चेन्नई एक्सप्रेस
बालाघाट । जबलपुर-बालाघाट-गोंदिया ब्राडगेज रेलवे मार्ग 23 वर्ष में पूर्ण होने के बाद रविवार की रात रूट परिवर्तित होकर जबलपुर मार्ग से बालाघाट रेलवे स्टेशन पहुंची। गया-चेन्नई स्पेशल ट्रेन पहले दिन ही निर्धारित समय से लेट हो गई। हालांकि ट्रेन के लेट होने के बाद ट्रेन का स्वागत करने पहुंचे लोगों को उत्साह कम नहीं हुआ और ट्रेन के बालाघाट स्टेशन पहुंचने पर ताली बजाकर स्वागय किया गया। बता दें कि स्पेशल ट्रेन को बालाघाट रेलवे स्टेशन में आठ बजकर 34 मिनट पर पहुंचना था लेकिन ट्रेन नौ बजकर 19 मिनट पर पहुंची।
सांसद, राज्य मंत्री ने किया रवाना बालाघाट स्टेशन पहली बार पहुंची स्पेशल ट्रेन का स्वागत करने जहां ब्राडगेज संघर्ष समिति के पदाधिकारी मौजूद रहे वहीं भाजपा के पदाधिकारियों ने भी जमकर जश्न मनाया। यहां सांसद ढाल सिंह बिसेन, आयुष राज्य मंत्री रामकिशोर कावरे, पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने ट्रेन के बालाघाट स्टेशन पर पहुंचने पर स्वागत कर ट्रेन को निर्धारित गंतव्य की ओर रवाना किया। इस दौरान सांसद ने कहा कि बालाघाट जिले के लिए सौभाग्य की बात हैं कि स्पेशल ट्रेन का रुट चेंज कर उसे बालाघाट से चलाया जा रहा हैं। उन्होंने कहा कि आगामी समय में कोरोना की स्थिति सामान्य होते ही अन्य रुटीन ट्रेन भी नये मार्ग से गुजरेगी और व्यवथाओ को भी दुरुस्त किया जाएगा।
23 वर्ष पूर्व बालाघाट जिले की 17 लाख से अधिक जनता ने भूमिपूजन के बाद सपना देखा था कि एशिया की सबसे बड़ी ताम्र परियोजना व एशिया की सबसे बड़ी भूमिगत मॉयल खदान के साथ ही उत्तर व दक्षिण मार्ग के लिए 270 किलोमीटर की दूरी करने वाले मार्ग से उनके जिले में भी ब्राडगेज ट्रने गुजरेगी। उनका शहर भी बड़े शहरों की गिनती में आएगा लेकिन राजनैतिक कमजोरी के चलते बालाघाट जिले के रहवासियों का सपना पूरे 23 साल बाद एक स्पेशल ट्रेन के रूट बदलने से पूरा हुआ है। हालांकि इस ट्रेन के शुरू होने से जहां जिले वासियों के बीच खुशीं का माहौल उत्पन्ना हो गया है। वहीं राजनैतिक दलों में श्रेय लेने के लिए होड़ मच गई है।
रविवार को बालाघाट-जबलपुर-गोंदिया के बीच पहली मर्तबा ब्राडग्रेज ट्रेन चलने की अधिकारिक पुष्टि के बाद रविवार को रात करीब 8.30 बजे के बाद पहुंचने की जानकारी के बाद जहां भाजपा द्वारा पूरे शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व रेल मंत्री पीयूष गोयल, सांसद डॉ. ढालसिंह बिसेन के अथक प्रयासों के बाद ट्रेन शुरू होने के चलते बैनर-पोस्टर लगाने के साथ ही ट्रेन के स्वागत के लिए स्वागत कार्यक्रम के लिए पंडाल लगाए गए तो वहीं ब्राडगेज संघर्ष समिति ने स्वागत के साथ कटंगी-तिरोड़ी ब्राडगेज निर्माण, भूमि अधिग्रहण, ब्राडगेज निर्माण में अधिकृत भूमि के मालिकों को मुआवजा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर बालाघाट रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रबंधक को ज्ञापन सौंपा हैं।
ट्रेन तो शुरू हुई पर समस्याएं बहुत : बालाघाट जिले को जबलपुर से जोडऩे के साथ ही अन्य राज्यों से जोडऩे के उद्देश्य से रेलवे विभाग ने गया-चेन्नाई एक्सप्रेस का मार्ग परिवर्तित कर इस ट्रेन को जबलपुर, नैनपुर-बालाघाट-गोंदिया से बल्लारपुर होते हुए चलाने का निर्णय लिया है जो रविवार को पूरा भी हो गया है, लेकिन यहां समस्या ये गंभीर हो गई है कि बालाघाट रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के खड़े
होने के दौरान कौन सी बोगी कहां
खड़ी होगी इसकी जानकारी की कोई व्यवस्था ही नहीं है। ऊपर से गया-चेन्नाई स्पेशल ट्रेन सिर्फ दो मिनट ही खड़ी होगी।
सप्ताह में दो दिन ही आ पाएगी ट्रेन :जबलपुर-नैनपुर-बालाघाट-गोंदिया के बीच स्पेशल ट्रेन शुरू होने के सप्ताह में सिर्फ दो दिन ही ट्रेन चल पाएगी। स्पेशल ट्रेन गया-चेन्नाई एक्सप्रेस रविवार को रात करीब आठ बजकर 34 मिनट पर बालाघाट रेलवे स्टेशन पर पहुंचेगी और आठ बजकर 36 मिनट पर प्रस्थान करेगी। वहीं बुधवार को तीन बजकर 43 मिनट पर बालाघाट स्टेशन पहुंचेगी और तीन बजकर 45 मिनट पर रवाना होगी।
17 नवंबर 1997 को हुआ था भूमिपूजन
अंग्रेज शासन काल में गोंदिया-बालाघाट व जबलुपर के बीच की दूरी कम करने के लिए नैरोगेज ट्रेन का सफर किया जा रहा था। दूरी कम करने ब्राडगेज में बदलने 17 नवंबर 1997 को गोंदिया-बालाघाट से जबलपुर के बीच ब्राडगेज अमान परिवर्तन कार्य के लिए भूमिपूजन किया गया था। इसके बाद से ही लोगों के बीच ब्राडगेज निर्माण कार्य प्रतीक्षित रहा। 1997 से लेकर छह सितंबर 2005 के बीच सिर्फ गोंदिया से बालाघाट के बीच महज 40 किलोमीटर की ब्राडगेज निर्माण कार्य पूर्ण हो पाया था। इसके बाद आगे का कार्य पूर्ण करने के लिए 13 जून 2015 को बालाघाट से जबलपुर के बीच चलने वाली नैरागेज ट्रेन को बंद कर ब्राडगेज निर्माण कार्य को बंद कर दिया गया था जो 2020 में पूरा हो पाया है।