कान्हा नेशनल पार्क की बदहाल सड़क से वीआइपी गुजरे पर पलटकर नहीं देखा
बालाघाट। देश दुनिया के नक्शे में पर्यटन को लेकर भले ही कान्हा नेशनल पार्क की खूबसूरती यहां पर्यटकों को खींचकर लाती है,लेकिन बदहाल सड़कें यहां पर्यटन की छवि धूमिल कर रही हैं। कान्हा से लगे इलाके में बदहाल सड़कें पर्यटकों का स्वागत करती नजर आती हैं। यहां वीआईपी सड़कों पर वीआईपी गड्ढे नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि इन बदहाल सड़कों से कई मर्तबा नेता और अफसर तो गुजरे,लेकिन किसी ने भी पलटकर उनकी सुध नहीं ली। जिससे पर्यटन के नक्शे में मशहूर कान्हा की तस्वीर बिगड़ती जा रही है। इससे पर्यटन विकास की संभावनाएं तलाशने की कोशिश भी बेकार साबित हो रही हैं।
बम्हनी से भीमा सड़क
बम्हनी -भीमा गांव सड़क की स्थिति इतनी खराब हो गई है। यहां से वाहनों से ही नहीं पैदल चलना भी दूभर हो गया है। करीब 5 किमी सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे नजर आ रहे हैं। यह समस्या स्थानीय रहवासियों के लिए तो बारहमासी है,लेकिन पर्यटकों के लिए बेहद पीड़ादायी है। इस रास्ते से गुजरने के बाद पर्यटक कान्हा नहीं आना चाहते हैं।
पर्यटकों की परेशानी है खराब सड़क
कान्हा नेशनल पार्क जिले की ही नहीं प्रदेश की शान है। यहां पहुंचकर देसी-विदेशी पर्यटक गर्व महसूस करते हैं,लेकिन इससे जुड़ी सड़कों की बदहाल स्थति पर्यटकों को इससे दूर करती नजर आती है। लोग यहां प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य का दीदार करने सात समुंदर पार से आते हैं। सड़कों के खराब होने से आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
इनका कहना...
शर्मशार कर रही हैं सड़कें ...!
बालाघाट में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं,इनकी तलाश भी की जा रही और विकास भी,लेकिन पर्यटन के प्रमुख स्रोतों तक पहुंचना आसान नहीं है। सड़क संपर्क दुरूस्त नहीं होने से पर्यटकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खराब सड़कें कोड़ पर खाज साबित हो रही हैं। कान्हा नेशनल पार्क से लगी सड़कों की यही स्थति है। जो पर्यटन के नक्शे में जिले को ही नहीं प्रदेश को भी शर्मशार कर रही हैं।
-अनुराग चतुरमोहता, सचिव चेंबर ऑफ कॉमर्स बालाघाट
पर्यटन विकास के लिए किए जा रहे हैं प्रयास
कान्हा नेशनल पार्क में पर्यटन विकास के दिशा में काफी प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया कराने और पर्यटकों को अच्छा बाजार मुहैया कराने बैगा हाट का निर्माण कराया गया है। यहां एप्रोच रोड को भी बेहतर किया जा रहा है।
-दीपक आर्य, कलेक्टर बालाघाट