60 फीसदी चिकित्सकों के पद खाली

 60 फीसदी चिकित्सकों के पद खाली


बालाघाट। मध्यप्रदेश शासन स्वास्थ्य विभाग के हालात किसी से छुपे नहीं है मध्यप्रदेश से लेकर बालाघाट जिले के भीतर चिकित्सकों की कमी के कारण आए दिन लोगों को परेशानी होती रहती है, इस विषय पर जब हमने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मनोज पांडे से चर्चा की तो उन्होंने चिकित्सको की कमी की परेशानी को बताया। साथ ही यह भी जानकारी दी कि इतने कम चिकित्सक होने के बावजूद बालाघाट के भीतर स्वास्थ्य विभाग का अमला बेहतर कार्य करने की कोशिश कर रहा है। जिस कारण स्वयं चिकित्सकों को कई बार ओवर टाइम ड्यूटी करना पड़ता है जिससे वे तनाव भी महसूस कर रहे है।
बड़े पैमाने पर चिकित्सकों के पद खाली
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के भीतर स्वास्थ्य विभाग अमले को दो विंग में बांटा गया है, जिसमे सीएचएमओ और सिविल सर्जन के दो विंग है वर्तमान समय में सीएमएचओ के अंतर्गत प्रथम श्रेणी चिकित्सको के 61 पर स्वीकृत है। उसके बदले में मात्र 1 एक चिकित्सक कार्यरत है। 60 पद खाली है। इसी तरह सिविल सर्जन के पास में 40 प्रथम श्रेणी चिकित्सों के पद स्वीकृत कार्यरत है। 25 पद खाली है। जिले के भीतर द्वितीय श्रेणी चिकित्सको के 80 पद स्वीकृत है जिसके बदले में महज 20 चिकित्सकों कार्यरत है। इस तरह द्वितीय श्रेणी चिकित्सको के 60 पद खाली है।
सिविल सर्जन विंग अंतर्गत भी खाली पदों की संख्या ज्यादा
इसी तरह सिविल सर्जन के अंतर्गत द्वितीय श्रेणी चिकित्सको की कुल 31 पद स्वीकृत है जिसमे मात्र 14 चिकित्सक कार्यरत है। इस प्रकार से 17 पद सिविल सर्जन के अंतर्गत चिकित्सको के खाली है। जिले में 60 संविदा चिकित्सक कार्यरत है। इस तरह खाली पदों की संख्या ज्यादा है।
चिकित्सकों पर रहता है वर्क लोड
कम चिकित्सको में ही सेवाएं प्रदान करने पड़ती है इस दौरान सबसे ज्यादा समस्या जिला अस्पताल में होती है। जिले के कई जगहों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए एक ही चिकित्सक पर निर्भर रहना पड़ता है इस कारण चिकित्सको पर भी वर्क लोड बहुत अधिक होता है। इस वर्क लोड के कारण कई बार चिकित्सकों को जनता के आक्रोश का भी सामना करना पड़ता है।
परसवाड़ा में एक भी चिकित्सक पदस्थ नहीं
यही नही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खैरलांजी में एकमात्र चिकित्सक पदस्थ है बिरसा, लांजी में दो चिकित्सक पदस्थ है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परसवाड़ा में तो एक भी चिकित्सक पदस्थ नही है। वहीं इन चिकित्सको पर ओपीडी ऑपरेशन सहित अन्य जिम्मेदारी भी है। इसके अतिरिक्त टीकाकरण सहित शासन की दर्जनों योजनाएं संचालित करना पड़ता है। पोस्टमार्टम करना उसके अलावा पेशी भी जाना पड़ता है।
चिकित्सकों का अभाव फिर भी आयुष चिकित्सकों की संवाएं की गई समाप्त
जिले में स्वास्थ्य विभाग में भले ही चिकित्सकों की बहुत अधिक कमी हो, लेकिन चिकित्सा विभाग द्वारा बीते दिनों ही 28 आयुष चिकित्सकों की सेंवाएं समाप्त कर दी गई। जिनके पास कोरोना काल से विपरीत परिस्थिति में काम करने का अच्छा अनुभव हो चुका था। यह बताएं कि अगर इन्हें आयुष चिकित्सकों को जिले मे पदस्थ कर दिया जाता तो काफी हद तक स्वास्थ्य सेवाओं में मदद मिल सकती है।
चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा जिला-मनोज पांडेय
इसके संबंध में चर्चा करने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मनोज पांडेय ने बताया कि यह बात बिल्कुल सही है जिले में चिकित्सकों की भारी कमी है। जिला अस्पताल में 18 डॉक्टर क्लास 2 के और 25 डॉक्टर क्लास वन के चाहिए इसी तरह अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सको की पदस्थापना अत्यंत ही आवश्यक है। यह जिला चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है यहां खाली पदों की संख्या ज्यादा है इसलिए हर जगह चिकित्सकों को ड्यूटी के अतिरिक्त कार्य करना पड़ता है कम चिकित्सकों में ही सेवाएं प्रदान करना पड़ता है। जिला अस्पताल में तो बहुत ज्यादा दिक्कत होती है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तो बहुत बुरी स्थिति हो जाती है एक ही डॉक्टर को 24 घंटे काम करना पड़ता है यह भी बताएं कि डॉक्टरो को मरीज का उपचार के साथ ही बहुत सारे कार्य करने होते हैं। डॉक्टरो पर भी बहुत वर्क लोड होता है। श्री पांडेय ने कहा कि शासन  सयम-समय पर चिकित्सकों की जॉइनिंग कर भेजता है लेकिन चिकित्सक आते हैं और चले जाते हैं कई चिकित्सकों द्वारा तो जॉइनिंग ही नही ली जाती है इसके कारण चिकित्सकों का अभाव बना हुआ है।


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