जंगल किनारे अब फेंसिंग के बाद बनेगी पत्थरों की दीवारें, वन्य प्राणी जंगल में रहेंगे कैद
बालाघाट। जंगल वाले मार्गों किनारे अब फेंसिंग के बाद वन्य प्राणियों को सड़क पर आने से रोकने उत्तर सामान्य वन परिक्षेत्र लामता ने सात-सात फीट ऊंचाई वाली पत्थरों की दीवारें 10 किमी के दायरे में बनाने राज्य सरकार को प्रस्ताव भिजवाया है। जिसकी स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू हो जाएगा। दरअसल, उत्तर सामान्य वन परिक्षेत्र लामता में 23 बीट आती है, यहां की पूरी बीटों के जंगल कॉरिडोर से जुड़े होने से बाघ, तेंदुए, चीतल, बायसन, बारहसिंगा, भालू, नील गाय, कोठरी, सांभर सहित अन्य वन्य प्राणियों की बहुतायात संख्या में चहल कदमी बनी रहती है। जो रोजाना 24 घंटे में किसी भी समय स?क पार करते रहते है, लेकिन जंगलों से निकलने वाले मार्ग से सैकड़ों छोटे बड़े वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। जंगल वाले मार्ग होने से वाहन चालक भी वन्य प्राणियों के भय से तेज रफ्तार में यहां से वाहन निकालते हुए जाते है, इसीलिए वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए पत्थरों की दीवारें बनाई जाएगी।
वन परिक्षेत्र अधिकारी नरेश कुमार काकोडिय़ा के मुताबिक उत्तर सामान्य वन परिक्षेत्र में 23 बीट शामिल है। अब ये पूरी रेंज कॉरिडोर से जुड़ चुकी है। इसीलिए वन्य प्राणियों की संख्या में इजाफा हुआ है। वन्यप्राणी विचरण करते हुए कई बार स?क पर आ जाते है। इनके संरक्षण के लिए पूरे कॉरिडोर से जुड़े मार्गों पर पत्थरों की दीवारें बनाई जाएगी। जिसके लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। भेजे गए प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी मिलने वाली है। जहां अधिक वन्य प्राणियों का विचरण क्षेत्र रहता है वहां दीवारों का काम तीन-तीन किमी में टुकड़ों बनाई जाएगी। सड़क किनारे दीवार बनाने के लिए जंगल की पहाड़ी से पत्थर लाए जाएंगे।
स्टेट हाइवे 11 मार्ग होने से वाहनों की आवाजाही अधिक
स?क किनारे वन्य जीवों के संरक्षण के लिए दीवार तैयार करने आसपास एरिया से पत्थरों को जमा करवाकर यह कार्य पूरा किया जाएगा। दीवारों के निर्माण होने के पूर्व विचरण करने वाले वन्य प्राणियों की प्यास बुझाने तीन तालाब बनाए जा चुके है। जिससे गर्मी के दिनों में भी जंगल में वन्य प्राणियों के लिए पेयजल की आफत नहीं होगी। लामता से बालाघाट से नैनपुर-जबलपुर स्टेट हाइवे मार्ग 11 होने से दिन रात सैकड़ों वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। बालाघाट के मगरदर्रा से जिले की अंतिम सीमा पांदरीगज तक 35 किमी यह मार्ग लंबा है। जिसमें लामता रेंज के अंतर्गत आने वाले जंगल से मार्ग होकर निकला है। जहां सड़क किनारे पत्थरों की दीवार तैयार की जाएगी। क्योंकि वाहनों की रफ्तार जंगलों से कम नहीं हो पा रही और जंगल वाले मार्ग पर स्पीड ब्रेकर भी नहीं बनाए गए है।
इनका कहना
वन परिक्षेत्र के पूरे जंगल कॉरिडोर से जुड़े है। इससे वन्य प्राणियों की संख्या बढ़ गई है जो विचरण करते समय सड़क पर आ जाते है। इसीलिए पत्थरों की दीवार बनाने राज्य सरकार को प्रस्ताव भिजवाया गया है।
नरेश कुमार काकोडिय़ा, वन परिक्षेत्र अधिकारी उत्तर लामता सामान्य।