सालों से रह रहे जमीन पर मकान बनाकर, अब मकान छोडऩे दी जा रही चेतावनी

 सालों से रह रहे जमीन पर मकान बनाकर, अब मकान छोडऩे दी जा रही चेतावनी


बालाघाट। मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के आसपास बड़ी संख्या में स्वास्थ्य विभाग के शासकीय कार्यालय संचालित हो रहे है। यहां पर एएनएम का छात्रावास बनाया जाना प्रस्तावित है। जिसे लेकर जिला प्रशासन, नगरीय प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयारियां की जा रही है। इन सब के बीच उक्त स्थान के समीप ही दो स्पीर परिवार सालों से मकान बनाकर निवास कर रहे है। जिन्हें मकान छोडऩे की चेतावनी दी जा रही है। जिससे ये परिवार परेशान हो रहा हैं।
बिना नोटिस के कहा जा रहा खाली करने
पीडि़त अनिल हटेल व बाबुलाल बिरिया ने बताया कि अस्पताल परिसर के आसपास की जमीन जिस पर वे लोग मकान बनाकर रह रहे है। उक्त जमीन दान कि है और वे करीब 50 वर्षो से उक्त जमीन पर मकान बनाकर निवास कर रहे है। उन्होंने बताया कि दो परिवार में कुल 11 लोग है जिन्हें अब मकान खाली करने कहा जा रहा है और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी इतनी मजबूत नहीं है कि वे लोग तत्काल ही दूसरे अन्य स्थान पर अपने रहने की व्यवस्था कर सके ऐसे में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं।
किराए से मकान देने से कर रहे मना
पीडि़त परिवार की महिला देवीनंदा ने बताया कि अस्पताल परिसर द्वारा मकान खाली करने की चेतावनी मिलने के बाद से ही वे लोग लगातार किराए का मकान तलाश रहे है, लेकिन जहां भी मकान के लिए जाते है तो स्पीर समाज का होने के चलते चेहरा देखकर ही मना कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि कई जगह पर तो कमरा खाली होने के बाद भी मना कर दिया गया है। जिसकी वजह वह स्पीर समाज को होना बता रही हैं।
कलेक्टर से लगाई गुहार, किया जाए स्थापित
पीडि़त परिवार ने कलेक्टर दीपक आर्य से मुलाकात कर अपनी पीड़ा उन्हें बताई है और उनसे कहा है कि उन्हें किराए का कमरा मिल नहीं रहा है। ऐसी स्थिति में उन्हें किसी ओर स्थान पर स्थापित किया जाए जिससे कि वे मकान में रहकर अपना व अपने परिवार को जीवन-यापन कर सके। वहीं कलेक्टर ने भी उन्हें आश्वस्त किया है कि उनके लिए व्यवस्था की जाएगी।
नहीं मिला न्याय तो करेंगे आंदोलन
पीडि़त परिवार को बिना नोटिस के मकान खाली करने की चेतावनी दिए जाने के मामले में कांग्रेस झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ की जुबेदा अंसारी, शानू राय ने भी तत्काल की पीडि़त परिवार को न्याय दिलाए जाने की मांग कि उन्होंने बताया कि पीडि़त परिवार सालों से अपना आशियाना बनाकर रह रहा है ऐसे में अचानक ही उन्हें बेघर कर देना उचित नहीं है। उनकी पहले व्यवस्था की जाए अन्यथा उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।


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