वन कर्मियों के संरक्षण में हो रहा है शासन के वन संपदा का दोहन
परसवाड़ा। बढ़ते प्रदूषण के रोकथाम के लिए प्रदेश व केंद्र सरकार वृक्ष लगाओ जीवन बचाओ के मुहिम के तहत वृक्षारोपण कर लाखों रुपये खर्च कर रही है। साथ ही जंगल को बचाने हर संभव प्रयास कर रही है और जिसके रेखदेख की जिम्मेदारी वन विभाग को दी गई है, लेकिन जवाबदारों की उदासीनता के चलते रेत माफिया एवं वन माफियाओं द्वारा वनरक्षकों से साथ सांठगांठ कर नदी नालों के सीना छलनी कर रेत का अवैध उत्खनन एवं जंगल की बेशकीमती लकड़ी की तस्करी बैखौफ होकर किया जा रहा है। जिसकी बानगी वन परीक्षेत्र पश्चिम बैहर के वृत्त परसवाड़ा के अंतर्गत बीट चनई, खलौंडी, सिलगी, बोदालझोला, तीरगांव, खुदूरगांव, चंदिया, खरपडिय़ा के बीटों व जंगलों में देखने को मिल रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि इन बीटों के जंगलों रेखदेख की जवाबदारी वनपाल देवेंद्र प्रसाद तिवारी चौकी प्रभारी के साथ वनरक्षक एवं एक सुरक्षाकर्मी को दी गई है जिनके द्वारा अपनी जवाबदारी का निर्वहन ना करते हुए रेत माफिया एवं वन माफियाओं के साथ सांठगांठ कर अवैध वसूली कर नदी नालों एवं जंगल के इमारती लकडिय़ों की तस्करी के साथ-साथ जंगल की लक?ी को जंगल किनारे लगे ईंट भ_ों में सुलगाया जा रहा है। इनके क्षेत्रों में लकड़ी की अवैध कटाई रेत की अवैध उत्खनन अवैध ईंट भ_ों का संचालन इनके संरक्षण में धड़ल्ले से जारी है।क्षेत्रों की जांच किए जाए तो जंगलों में लकड़ी के ठूंठ, जंगल किनारे लगे ईंट भ_ों में मोटी मोटी लकड़ी एवं जंगल के नदी नालों में अवैध रेत उत्खनन अधिक मात्रा में देखने को मिल जाएगा।
वनकर्मियों से मिलीभगत : ईंट भ_ों के संचालकों को कहना है कि जंगल की लकड़ी का उपयोग करने के लिए वन कर्मियों को पैसे दिए है। जंगल से लकड़ी लाने के लिए वनकर्मियों से मिलीभगत है। इस संबंध में वनपाल देवेंद्र प्रसाद तिवारी चौकी प्रभारी से जानकारी चाही गई है तो अभद्र व्यवहार किया गया। इससे यह प्रतीत होता है कि ऐसे अधिकारी को किसी नेता या बड़े अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। जिससे वनपाल देवेंद्र प्रसाद वृत परसवाड़ा में विगत कई दिनों से एक ही जगह पर कार्यरत है जिससे तिवारी के हौसले बुलंद है।
आप लोगों के द्वारा यह मामला संज्ञान में लाया गया है जिसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
विकास सुलिया, वन परीक्षेत्र अधिकारी पश्चिम बैहर।