रानी अवंतीबाई लोधी की वीरगाथा पाठयुपस्तक में शामिल करने आवाज उठाई- पूर्व सांसद कंकर मुंजारे
बालाघाट। पत्रकारों द्वारा सवाल पूछे जाने पर रानी अवंतीबाई लोधी की वीरगाथा पाठ्य पुस्तक में शामिल करने आपने आवाज उठाई गई थी रानी अवंतीबाई लोधी की वीरगाथा मध्यप्रदेश के स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए विधानसभा में कंकर मुंजारे द्वारा आवाज बुलंद की गई तत्कालीन शिक्षा मंत्री महेंद्र सिंह कालूखेड़ा जी द्वारा तुरंत इस सुझाव को पाठ्य पुस्तक में शामिल करने के निर्देश मै दे दूंगा कहाँ एवं शिक्षा मंत्री महेंद्र सिंह कालूखेड़ा द्वारा रानी अवंतीबाई लोधी को पाठ्यक्रम में शामिल कर मुझे पत्र द्वारा सूचित किया गया।गांव की चौपाल पर किसानों के कानों में अभी तक भुवन के द्वारा ई आल्हा की धुन गूंज रही थी, तभी किसी ने कहा धन्य है इस धरती को। कैसे-कैसे सूरमा हुए हैं, अब ऐसे जोधा कहां है? नहीं नहीं ऐसा नहीं है। गांव के वयोवृद्ध बाबा नाथ सिंह बोल पड़े। भारत भूमि कभी वीरों से खाली नहीं रही।
सुपरथ बोला बाबा हमें भी सुनाइए ना रामगढ़ की रानी रामगढ़ की रानी अवंती बाई की कथा तुमको सबको सुनाता हूं सब लोग कान लगाकर सुनने लगे। बाबा ने कथा शुरू की। सन् 1831, अगस्त माह की 16 तारीख थी। सिवनी जिले के मनकहडी गांव में जमीदार राव जुझार सिंह लोधी के घर में एक बालिका ने जन्म लिया। बालिका का नाम अवंती बाई रखा गया। होनहार बिरवान के होते चिकने पात। अवंती बाई ने हठ करके तलवार और बंदूक चलाने के साथ-साथ घुड़सवारी भी सीखी। उनकी सूची पढ़ने लिखने में भी थी अतः वह घर में रखे हस्तलिखित ग्रंथ विशेषकर आल्हा और रामचरितमानस का नित्य पाठ करती। अवंतीबाई सयानी हो चली। सन् 1849 में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर रामगढ़ के राजकुमार विक्रमाजीत सिंह के साथ उनका विवाह कर दिया गया।यह उन दिनों की बात है जब भारत पूरी तरह अंग्रेजों के पंजे में जकड़ा जा चुका था। सन 1850 मैं रामगढ़ के राजा लक्ष्मण सिंह का स्वर्गवास होनी के पश्चात राजकुमार विक्रमाजीत सिंह का राजतिलक हुआ। अवंती बाई अब रामगढ़ की रानी बन गई।
रानी अवंती बाई ने अपने मधुर स्वभाव और व्यवहार से हठीले स्वभाव के विक्रमादित्य का ही नहीं वरन प्रजा का भी हृदय जीत लिया। वे बड़े कौशल के साथ राजकाज चलाने में भी सहयोग करती। रानी अवंती बाई के 2 पुत्र थे, अरमान सिंह और शेर सिंह। उनके सुख की सीमा न थी। पर विपत्ति कह कर नहीं आती। अंग्रेजों ने राजा विक्रमाजीत सिंह को अल्प वयस्क बताकर उन्हें गद्दी से उतार दिया। इसी दुख के कारण वह बीमार पड़ गए और उनका निधन हो गया। रानी अवंती बाई के मन में अंग्रेजों से बदला लेने की ज्वाला धधक उठी। उधर गढ़ मंडला के राजा शंकर शाह भी अंग्रेजों के विरुद्ध थे। सन 1857 मेंपूरे उत्तर भारत में अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति की लहर दौड़ गई। रानी अवंती बाई और राजा शंकर शाह ने इस क्षेत्र के राव राजाओं को अंग्रेजों के विरुद्ध संगठित करना आरंभ कर दिया। प्रजा भी उनका साथ दे रही थी। यह काम बड़े गुपचुप ढंग से हो रहा था पर अंग्रेजों को इसकी भनक मिल गई। उन्होंने राजा शंकर शाह और उनके पुत्र रघुनाथ शाह को बंदी बनाकर तोप के गोलों से उड़वा दिया। अब तो रानी अवंती बाई ने अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर रामगढ़ के अंग्रेजों के पिट्ठू अधिकारियों को बाहर निकाल दिया और स्वयं शासन करने लगी। शीघ्र ही उन्होंने सुहागपुर, बिछिया तथा नारायणगंज को भी अपने अधिकार में ले लिया। उन्होंने गढ़ मंडला पर भी आक्रमण किया। अंग्रेज सेनापति कैप्टन वाडिंगटन को मंडला से भागना पड़ा पर रानी अवंती बाई ने उसे रास्ते में ही घेर लिया। रानी ने तलवार का एक करारा वार किया लेकिन भाग्य से वाडिंगटन बच गया पर उसका घोड़ा मारा गया। उसने रानी से प्राणों की भीख मांगी।रानी उनकी बाई ने यह जानते हुए कि उसका यह निर्णय भविष्य में उनके लिए घातक सिद्ध हो सकता है ना केवल उसे प्राण दान दिया जाए बल्कि सैनिकों सहित उसे जाने की अनुमति भी दे दी।
सतपुरा पर्वत की घाटियां रानी अवंती बाई को जय जयकार से गुंजायमान हो उठी थीं। होली का त्योहार नजदीक था। बसंत ऋतु थी।
सागर का रहने वाला मदन भट्ट रानी अवंती बाई का विश्वस्त दूत था। वह एक अच्छा कवि और लोक गायक था।
रानी अवंती बाई ने अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था पर उधर कैप्टन वाडिंगटन भी अपनी पराजय भूला ना था। उसने जबलपुर से अंग्रेजी सेना मंगाई।एक बड़ी सेना लेकर उसने रानी अवंती बाई को खेलना आरंभ किया। विद्रोही सैनिक तितर-बितर हो गए थे। अंग्रेजी सेना ने क्रांति के प्रमुख केंद्रों गढ़ मंडला, विजय राघौगढ़ ,सुहागपुर बिछिया और नारायण गंज पर पुनः अधिकार कर लिया, अब केवल रामगढ़ जी उसकी आंखों में खटक रहा था। अपने आप को घिरते देख रानी अवंती बाई ने रामगढ़ का किला खाली कर दिया। उन्होंने देवहार गढ़ की पहाड़ी पर अपना मोर्चा जमाया। उसके पास बहुत थोड़े किसान सैनिक और कुछ विश्वस्त सहयोगी ही बचे थे। कैप्टन वाडिंगटन रामगढ़ पर टूट पड़ा। उसने तोपों की मार से किले को धराशायी कर दिया। गुप्त चरो से सूचना पाकर उसने देवहार गढ़ की पहाड़ी पर आक्रमण किया।रानी अवंती बाई ने डटकर सामना किया पर तू पर बंदूकों के आगे अनपढ़ किसान सैनिक भला कब तक टिकते? अचानक रानी के पैर में गोली लगी। भी अंग्रेजों की बंदी नहीं बनना चाहती थी। उन्होंने महारानी दुर्गावती की भांति स्वयं कटार घोंपकर अपनी जीवन लीला समाप्त समाप्त कर ली। देवहार गढ़ की पहाड़ी पर ही रानी अवंती बाई की चिता को अग्नि दी गई। उनके साथियों ने पत्थरों का एक स्मारक बना कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। वह स्थान रानी टीला के नाम से जाना जाता है। रानी अवंती बाई का नाम देश की महान वीरांगनाओं में सदा सदा के लिए अमर हो गया।
इतना कहकर बाबा थान सिंह मौन हो गए। चौपाल में बैठे सभी किसानों के सर रानी अवंती बाई के प्रति श्रद्धा से झुके थे।साइकिल रैली में निजी करण के विरोध करने के लिए हजारों लोग आएंगे और जनता में बहुत आक्रोश है नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा सरकारी संपत्ति एवं संस्थानों का निजी करण किया जा रहा है। रेल ,रेलवे स्टेशन, एयर इंडिया हवाई जहाज, हवाई अड्डा, बैंक, बीएसएनल, बीपीसीएल, एलआईसी सहित 28 कंपनी सरकारी संपत्ति संस्थानों को अदानी, अंबानी आदि जैसे उद्योगपतियों को कंपनी भेज दिया है।मध्यप्रदेश में भी शिवराज सिंह सरकार द्वारा महत्वपूर्ण एवं जनता के लिए उपयोगी जमीनों को बेचा जा रहा है बालाघाट में अंबेडकर चौक के पास रानी दुर्गावती हायर सेकेंडरी स्कूल के गेट के सामने महत्वपूर्ण जमीन बेच दी गई है। मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह सरकार को शासकीय जमीनों को बेचने के पहले भोपाल में स्थित सीएम बंगले की जमीन आधी बेच दे तथा बालाघाट की कलेक्टर बंगला 6 एकड़ जमीन में बना है एवं एसपी बंगला 10 एकड़ जमीन में बना है कलेक्टर बंगले की पूरी जमीन को भेज दें और कलेक्टर के लिए नए मैं कलेक्ट्रेट ऑफिस के पीछे घर बना दे उसी तरह एसपी बंगले की पूरी जमीन बेच दे और पुलिस लाइन में एसपी का घर बना दे तो वहां पर सुरक्षित भी रहेगा और कलेक्टर एसपी के बंगले बेचने से करीब 100 करोड़ रुपए सरकार को मिल जाएंगे इसी तरह पूरे मध्यप्रदेश के कलेक्टर एसपी कमिश्नर आदि शासकीय अधिकारियों के बंगले की जमीनी बेच दी जाए तो हजारों करोड़ रुपए सरकार को मिल जाएंगे वैसे भी सरकारी महत्वपूर्ण उपयोगी संपत्ति बेच रहे हैं और लूट रहे हैं।
सुपरथ बोला बाबा हमें भी सुनाइए ना रामगढ़ की रानी रामगढ़ की रानी अवंती बाई की कथा तुमको सबको सुनाता हूं सब लोग कान लगाकर सुनने लगे। बाबा ने कथा शुरू की। सन् 1831, अगस्त माह की 16 तारीख थी। सिवनी जिले के मनकहडी गांव में जमीदार राव जुझार सिंह लोधी के घर में एक बालिका ने जन्म लिया। बालिका का नाम अवंती बाई रखा गया। होनहार बिरवान के होते चिकने पात। अवंती बाई ने हठ करके तलवार और बंदूक चलाने के साथ-साथ घुड़सवारी भी सीखी। उनकी सूची पढ़ने लिखने में भी थी अतः वह घर में रखे हस्तलिखित ग्रंथ विशेषकर आल्हा और रामचरितमानस का नित्य पाठ करती। अवंतीबाई सयानी हो चली। सन् 1849 में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर रामगढ़ के राजकुमार विक्रमाजीत सिंह के साथ उनका विवाह कर दिया गया।यह उन दिनों की बात है जब भारत पूरी तरह अंग्रेजों के पंजे में जकड़ा जा चुका था। सन 1850 मैं रामगढ़ के राजा लक्ष्मण सिंह का स्वर्गवास होनी के पश्चात राजकुमार विक्रमाजीत सिंह का राजतिलक हुआ। अवंती बाई अब रामगढ़ की रानी बन गई।
रानी अवंती बाई ने अपने मधुर स्वभाव और व्यवहार से हठीले स्वभाव के विक्रमादित्य का ही नहीं वरन प्रजा का भी हृदय जीत लिया। वे बड़े कौशल के साथ राजकाज चलाने में भी सहयोग करती। रानी अवंती बाई के 2 पुत्र थे, अरमान सिंह और शेर सिंह। उनके सुख की सीमा न थी। पर विपत्ति कह कर नहीं आती। अंग्रेजों ने राजा विक्रमाजीत सिंह को अल्प वयस्क बताकर उन्हें गद्दी से उतार दिया। इसी दुख के कारण वह बीमार पड़ गए और उनका निधन हो गया। रानी अवंती बाई के मन में अंग्रेजों से बदला लेने की ज्वाला धधक उठी। उधर गढ़ मंडला के राजा शंकर शाह भी अंग्रेजों के विरुद्ध थे। सन 1857 मेंपूरे उत्तर भारत में अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति की लहर दौड़ गई। रानी अवंती बाई और राजा शंकर शाह ने इस क्षेत्र के राव राजाओं को अंग्रेजों के विरुद्ध संगठित करना आरंभ कर दिया। प्रजा भी उनका साथ दे रही थी। यह काम बड़े गुपचुप ढंग से हो रहा था पर अंग्रेजों को इसकी भनक मिल गई। उन्होंने राजा शंकर शाह और उनके पुत्र रघुनाथ शाह को बंदी बनाकर तोप के गोलों से उड़वा दिया। अब तो रानी अवंती बाई ने अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर रामगढ़ के अंग्रेजों के पिट्ठू अधिकारियों को बाहर निकाल दिया और स्वयं शासन करने लगी। शीघ्र ही उन्होंने सुहागपुर, बिछिया तथा नारायणगंज को भी अपने अधिकार में ले लिया। उन्होंने गढ़ मंडला पर भी आक्रमण किया। अंग्रेज सेनापति कैप्टन वाडिंगटन को मंडला से भागना पड़ा पर रानी अवंती बाई ने उसे रास्ते में ही घेर लिया। रानी ने तलवार का एक करारा वार किया लेकिन भाग्य से वाडिंगटन बच गया पर उसका घोड़ा मारा गया। उसने रानी से प्राणों की भीख मांगी।रानी उनकी बाई ने यह जानते हुए कि उसका यह निर्णय भविष्य में उनके लिए घातक सिद्ध हो सकता है ना केवल उसे प्राण दान दिया जाए बल्कि सैनिकों सहित उसे जाने की अनुमति भी दे दी।
सतपुरा पर्वत की घाटियां रानी अवंती बाई को जय जयकार से गुंजायमान हो उठी थीं। होली का त्योहार नजदीक था। बसंत ऋतु थी।
सागर का रहने वाला मदन भट्ट रानी अवंती बाई का विश्वस्त दूत था। वह एक अच्छा कवि और लोक गायक था।
रानी अवंती बाई ने अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था पर उधर कैप्टन वाडिंगटन भी अपनी पराजय भूला ना था। उसने जबलपुर से अंग्रेजी सेना मंगाई।एक बड़ी सेना लेकर उसने रानी अवंती बाई को खेलना आरंभ किया। विद्रोही सैनिक तितर-बितर हो गए थे। अंग्रेजी सेना ने क्रांति के प्रमुख केंद्रों गढ़ मंडला, विजय राघौगढ़ ,सुहागपुर बिछिया और नारायण गंज पर पुनः अधिकार कर लिया, अब केवल रामगढ़ जी उसकी आंखों में खटक रहा था। अपने आप को घिरते देख रानी अवंती बाई ने रामगढ़ का किला खाली कर दिया। उन्होंने देवहार गढ़ की पहाड़ी पर अपना मोर्चा जमाया। उसके पास बहुत थोड़े किसान सैनिक और कुछ विश्वस्त सहयोगी ही बचे थे। कैप्टन वाडिंगटन रामगढ़ पर टूट पड़ा। उसने तोपों की मार से किले को धराशायी कर दिया। गुप्त चरो से सूचना पाकर उसने देवहार गढ़ की पहाड़ी पर आक्रमण किया।रानी अवंती बाई ने डटकर सामना किया पर तू पर बंदूकों के आगे अनपढ़ किसान सैनिक भला कब तक टिकते? अचानक रानी के पैर में गोली लगी। भी अंग्रेजों की बंदी नहीं बनना चाहती थी। उन्होंने महारानी दुर्गावती की भांति स्वयं कटार घोंपकर अपनी जीवन लीला समाप्त समाप्त कर ली। देवहार गढ़ की पहाड़ी पर ही रानी अवंती बाई की चिता को अग्नि दी गई। उनके साथियों ने पत्थरों का एक स्मारक बना कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। वह स्थान रानी टीला के नाम से जाना जाता है। रानी अवंती बाई का नाम देश की महान वीरांगनाओं में सदा सदा के लिए अमर हो गया।
इतना कहकर बाबा थान सिंह मौन हो गए। चौपाल में बैठे सभी किसानों के सर रानी अवंती बाई के प्रति श्रद्धा से झुके थे।साइकिल रैली में निजी करण के विरोध करने के लिए हजारों लोग आएंगे और जनता में बहुत आक्रोश है नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा सरकारी संपत्ति एवं संस्थानों का निजी करण किया जा रहा है। रेल ,रेलवे स्टेशन, एयर इंडिया हवाई जहाज, हवाई अड्डा, बैंक, बीएसएनल, बीपीसीएल, एलआईसी सहित 28 कंपनी सरकारी संपत्ति संस्थानों को अदानी, अंबानी आदि जैसे उद्योगपतियों को कंपनी भेज दिया है।मध्यप्रदेश में भी शिवराज सिंह सरकार द्वारा महत्वपूर्ण एवं जनता के लिए उपयोगी जमीनों को बेचा जा रहा है बालाघाट में अंबेडकर चौक के पास रानी दुर्गावती हायर सेकेंडरी स्कूल के गेट के सामने महत्वपूर्ण जमीन बेच दी गई है। मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह सरकार को शासकीय जमीनों को बेचने के पहले भोपाल में स्थित सीएम बंगले की जमीन आधी बेच दे तथा बालाघाट की कलेक्टर बंगला 6 एकड़ जमीन में बना है एवं एसपी बंगला 10 एकड़ जमीन में बना है कलेक्टर बंगले की पूरी जमीन को भेज दें और कलेक्टर के लिए नए मैं कलेक्ट्रेट ऑफिस के पीछे घर बना दे उसी तरह एसपी बंगले की पूरी जमीन बेच दे और पुलिस लाइन में एसपी का घर बना दे तो वहां पर सुरक्षित भी रहेगा और कलेक्टर एसपी के बंगले बेचने से करीब 100 करोड़ रुपए सरकार को मिल जाएंगे इसी तरह पूरे मध्यप्रदेश के कलेक्टर एसपी कमिश्नर आदि शासकीय अधिकारियों के बंगले की जमीनी बेच दी जाए तो हजारों करोड़ रुपए सरकार को मिल जाएंगे वैसे भी सरकारी महत्वपूर्ण उपयोगी संपत्ति बेच रहे हैं और लूट रहे हैं।