महंगाई कर रही उज्जवला योजना से मोहभंग

 महंगाई कर रही उज्जवला योजना से मोहभंग


बालाघाट। महिलाओं को धुंए और प्रदुषण से बचाने के लिए केंद्र शासन द्वारा शुरू की गई उज्जवला योजना की गैस महंगाई की वजह से जिले के अधिकांश गरीब परिवारो में कबाड़ में रख दी गई है। ऐसे सैकड़ो परिवार है जिन्होंने कोरोना संक्रमण काल के बाद से महंगाई को देखते हुए गैस की रिफिलिंग ही नही करवाई। और अब वे फिर से लकड़ी के माध्यम से चूल्हे पर खाना बनाने के पुरानी पद्धति पर लौट आए है। महिलाओं का कहना है कि वह गैस के माध्यम से ही खाना बनाना चाहते है लेकिन गैस सिलेंडर के दाम इतने महंगे हो गए हैं कि उन्हें गैस भराना बहुत भारी पड़ रहा है।
फिर हो गए कोयला केरोसीन पर आश्रित
आपको बताए कि 1 मई 2016 से शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के अंतर्गत गरीब परिवार की महिलाओं को गैस कनेकशन प्रदान किया गया। लेकिन महंगाई की वजह से जिले के भीतर फिर से करीब 3 लाख परिवार खाना पकाने के लिए कोयला, केरोसीन पर आश्रित हो गया है। शहरी क्षेत्रो में निवासरत महिलाएं अगर गैस भरवाने में अपने आप को असक्षम महसूस कर रही है तो ग्रामीण क्षेत्रो में और आदिवासी क्षेत्रो में निवासरत लोगो की क्या स्थिति होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। पूर्व में आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के परिवारो में भी गैस सिलेंडर कबाड़ में रखे हुए और चूल्हे पर खाना बनाने वाली स्थिति काफी जगह में सामने आ चुकी है।
जिले में है उज्जवला योजना के पौने दो लाख कनेकशन
देखा जाए तो इस समय जिले की आबादी 17 लाख के पार हो चुकी है जिसमें करीब कुल 4 लाख 60 हजार परिवार के पास वर्तमान के पास वर्तमान समय में रसोई गैस का कनेकशन उपलब्ध है। इसमें से 1 लाख 79 हजार 4 सौ 26  के आस पास उज्जवला योजना वाला कनेकशन है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.