लॉकडाउन से बस मालिक है परेशान
बालाघाट। विगत एक वर्ष से अधिक समय से कोरोनाकाल का दंश भोग रहे बस संचालकों के सामने फिर से संकट की स्थितिनिर्मित हो रही है। सरकार ना तो उन्हें किसी प्रकार से राहत दे रही है, और ना ही सुविधा, ऐसे में उनके लिये यह व्यवसाय करना कठिन हो रहा है। किसी तरह एक वर्ष बाद विषम परिस्थिति के बावजूद भी बसें प्रारंभ हुई थी। लेकिन पुन: 25 मार्च से 15 अपै्रल तक अंतर्राज्जीय बसें बंद कर दी गई। यहां पर सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि बंद के दौरान क्या बस का लिया जाने वाला टैक्स सरकार माफ करेगी। यह बात लोगों की समझ से परे है। कहने को तो सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर बसों में सवारी बैठाने पर अंकुश लगाया जा रहा है। जबकि अनेक प्रांतों में चल रहे चुनाव के दौरान लगातार बढ़ती भीड़ और चुनाव प्रचार जैसे अभियानों पर अंकुश नही लगा रही है। इससे ऐसा प्रतीत होता है मानो चुनाव प्रचार से कोरोना डरता है, और जिन राज्यों में चुनाव चल रहे है, उन राज्यो में कोरोना प्रवेश भी नही करना चाहता। प्रायवेट बस संचालक ने कहा कि शासन को तत्काल ही लॉकडाउन के दौरान जिन क्षेत्रो मे बसों पर प्रतिबंध लगाया गया है उन बसों का लगने वाला परिवहन टैक्स माफ किया जाना चाहिए।
एक बस से 50 परिवारों का होता है भरण-पोषण
श्याम कौशल ने आगे कहा कि परिवहन के माध्यम से एक बस से लगभग 50 परिवारो का पालन पोषण होता है, इनमें ड्र्राईवर, कंडक्टर, हेल्पर एवं एजेंट तथा जिन मार्गो से गुजरती है उन मार्गो पर रहने वाले एजेंट एवं हेल्पर भी शामिल है। और बस बंद किये जाने से इन परिवारो का चूल्हा भी नही जलता है। प्रशासन ने कभी भी परिवहन संचालको की समस्या को गंभीरता से नही लिया। और हमेशा उन्हें अपने नियमो के अनुसार ही बस संचालन का दायित्व सौंपा है।
संचालको के लिये कठिन परीक्षा की घड़ी
आपने आगे कहहा कि बसों के संचालन के दौरान बसों की टूट-फूट डीजल, टोल टैक्स सहित इससे जुड़े हुए हर वर्ग के लिए उन्हें भुगतान करना पड़ता है। और लॉकडाउन के दौरान यात्री भी न्यूनतम ही यात्रा कर रहे है। जिसके चलते उनके लिये यह समय एक कठिन परीक्षा की घड़ी है। आपको इसको लेकर सभी बस संचालको के सामने समस्या है। लेकिन ना तो जिला प्रशासन ही उचित निर्णय ले रहा है, और ना ही राज्य स्तर पर ही पहल की जा रही ।
जनप्रतिनिधि सुनेंगे बस संचालकों की दरकार
राज्य स्तर पर पूर्व के लॉकडाउन के दौरान परेशान बस संचालकों ने अपनी समस्याओ को लेकर चर्चा की थी, जिनमें से अधिकांश मांगो को नजरदांज कर दिया गया था। और जो मांगे मांगी गई थी, वह मांगे पूर्ण होने से पूर्व ही पुन: लॉकडाउन की स्थिति निर्मित हो गई है। जिसके चलते सबके सामने रोजी-रोटी का संकट है। जिसको लेकर विधायक, सांसद एवं जिला कलेक्टर को इन बस संचालको की बैठक बुलाकर उचित निर्णय लेना ही उचित होगा।