कोरोना के संकटकाल में मरीजों को जीवनदान दे रही हैं नर्सें

 कोरोना के संकटकाल में मरीजों को जीवनदान दे रही हैं नर्सें


बालाघाट। कोरोना की विभीषिका में मरीजों की सेहत का हाल जानकर उन्हें परामर्श के साथ दवा और इलाज देने के साथ ही उनकी देखभाल करने में नर्स (महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता) की भूमिका अहम है। जो अपनी जान का जोखिम उठाकर न केवल विषम परिस्थितियों से लड़कर काम कर रही हैं, बल्कि दुर्गम इलाकों में जान का जोखिम उठाकर सेवाएं दे रही हैं। विश्व नर्स दिवस पर हम ऐसी ही कुछ नर्सों की कहानी सामने ला रहे हैं। नर्से संकटकाल में दुर्गमता के बीच अपनी जान की परवाह किए बिना वनांचलों में गरीब आदिवासियों को कोरोना की महामारी से बचाकर उन्हें जीवनदान दे रही हैं। कहीं नर्स कोसों दूर पैदल चलकर कर्तव्य पथ पर, तो कहीं मासूम बच्चे को तपती धूप में लेकर जाने की मजबूरी का सामना कर रही है। नर्से दूरगम इलाकों में जज्बे के साथ अनवरत सेवा देने में लगी हुई है।

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से लगे उप स्वास्थ्य केंद्र पटवा में पदस्थ नर्स प्रीति (26) पिता रामकृष्ण जंघेला कोरोना संकटकाल में लोगों की सेवाओं में समर्पित होकर काम कर रही है। कोरोना काल में साल में एक भी अवकाश नहीं लिया और कर्तव्य निष्ठा से निरंतर लोगों की सेवा में लगी हुई है। नर्स प्रीति जंघेला बताती है कि वह उप स्वास्थ्य केंद्र पटवा में पदस्थ है, लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य गढ़ी में नर्सो की कमी है इसीलिए यहां सेवा दे रही है। कोरोना संकटकाल में छह गांवों में निरंतर सेवाएं देना पड़ रहा है। इसमें गढ़ी पंचायत के अलावा आरडी चौक, जामटोला, पटेलटोला, परसाटोला, ठाकुरटोला, घुन्नाुरटोला शामिल है। इन गांवों में रोजाना तीन से चार किमी पैदल चलकर लोगों के घर-घर जाकर पॉजिटिव मरीज की जानकारी लेना होता है कि उनके संपर्क में कोई तो नहीं आया। किल कोरोना अभियान में लोगों से सर्दी, खांसी, बुखार की जानकारी लेती है, इसके लिए रोजाना सुबह नौ बजे से घर से निकलना पड़ता है। कोरोना काल में कई बार तो रात के सात से आठ बज जाते है। मूलत: मंडला जिले के तिमरवारा गांव की रहने वाली है। ड्यूटी में इतना समय व्यतीत हो जाता है कि परिवार से दो से चार दिन में एक बार बात हो पाती है।

कर्तव्य के राह में मां के साथ 18 माह का बेटा भी ड्यूटी में साथ निभा रहा है। हम बात कर रहे है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गढ़ी के सब सेंटर जैतपुरी की नर्स उर्मिला उइके (36) की। जो कोरोना संकटकाल में किसी से पीछे नहीं है। जब पूरा देश कोरोना महामारी की चपेट में हो तो उर्मिला ने लोगों की सेवा करने से अपने आपको रोक नहीं सकी। उसने अपने 18 माह का बेटा राजीव को साथ में लेकर ड्यूटी कर रही है। नर्स उर्मिला ने बताया कि खैरलांजी तहसील के पुलपुट्टा गांव की रहने वाली है। वर्तमान में सब सेंटर जैतपुरी में पदस्थ है उसके सब सेंटर में पांच गांव आते है। जैतपुरी, जुआड़ीटोला, मोहरई, आर्मी व धीरी इन गांवों में रोजाना सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक ड्यूटी करना होता है। फील्ड में जाकर वैक्सीनेशन कार्यक्रम के तहत शिविर में लोगों को कोरोना का टीका लगाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा बहुत छोटा है और यह समय अवकाश लेकर घर में रहने का होता है, परंतु देश इतनी बड़ी महामारी की चपेट में है। इसीलिए वह वैक्सीनेशन कार्यक्रम में निरंतर ड्यूटी कर रही है देश ठीक रहेगा तो हम सब ठीक रहेंगे। नर्स की ड्यूटी हमेशा संघर्ष कर दूसरों को सेवा देना है।

कोरोना संकटकाल में उप स्वास्थ्य केंद्र मुरेंडा गढ़ी में पदस्थ एएनएम जितेश्वरी (23) पिता हिंम्मतसिंह पारधी लगातार सेवाएं दे रही है। जितेश्वरी के रोजाना सुबह नौ से पांच बजे तक चार गांवों में सेवा देती है। जितेश्वरी पारधी ने बताया कि वह मूलत: सिवनी जिला की रहने वाली है। परिवार से ढाई सौ किमी दूर रहकर महामारी के बीच सेवारत है। उनका एरिया बैहर तहसील के अंतिम छोर पर मंडला जिले की बॉर्डर पर है और यह इलाका कान्हा नेशनल पार्क से लगा होने से घने जंगलों में गांव बसे हुए है। इन गांवों में रोजाना जाकर शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को टीकाकरण करना, गर्भवती माताओं का चेकअप, किल कोरोना अभियान में चेकअप करना व वैक्सीनेशन कार्यक्रम में 18 से 44 वर्ष के लोगों को टीका लगाने का कार्य पूरी तरह कर्तव्य निष्ठा से कर रही है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र मोहनपुर के उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ ताजवी खान (47) कोरोना संकटकाल में नियमित रूप से सेवा में जुटी है। मोहनपुर के अंतर्गत आठ गांव आते है। इन गांवों में ताजवी रोजाना सुबह नौ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक लोगों की सेवाओं में लगी रहती है। चिखलाझोड़ी उकवा निवासी एएनएम ताजवी खान बताती है कि रोजाना स्कूटी से 25 किमी उप स्वास्थ्य केंद्र मोहनपुर जाना पड़ता है। जहां पर उप स्वास्थ्य अंतर्गत आने वाले पूरे गांवों में कोरोना किल अभियान में सर्दी, खांसी, बुखार व गर्भवती माताओं का चेकअप के साथ वैक्सीनेशन कार्यक्रम में लोगों को टीका लगाना पड़ता है। इसके अलावा समय-समय पर चिखलाझोड़ी में सेवाएं देनी पड़ती है। 12 मई को यानी आज अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस है। इस अवसर पर सभी से अपील करना चाहूंगी कि लाकडाउन का पालन करें। मास्क लगाए, वैक्सीन लगाने लोगों को प्रेरित करें। घर पर रहे और सुरक्षित रहे। तभी हम सब मिलकर कोरोना को हराने में कामयाब हो सकेंगे।

इनका कहना

गढ़ी सेक्टर में स्वास्थ्य अमला कर्तव्य निष्ठा से काम कर रहा है। सेक्टर में कार्यरत सभी नर्से भी पूरी लगन से काम कर रही है।

विनोद बंधाईया, सेक्टर सुपरवाइजर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गढ़ी।

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