डीएपी खाद की बढ़ी हुई कीमतें वापस ले प्रदेश सरकार-आनंद बिसेन

 डीएपी खाद की बढ़ी हुई कीमतें वापस ले प्रदेश सरकार-आनंद बिसेन

 किसान विरोधी है प्रदेश सरकार: कोरोना काल में किसानो पर बढ़ाया आर्थिक बोझ




बालाघाट, लालबर्रा। जिला कांग्रेस कमेटी महामंत्री अधिवक्ता आनंद बिसेन ने वक्तव्य जारी कर प्रदेश सरकार से डीएपी खाद की बढ़ी हुई कीमतें वापस लेने की मांग की है। श्री बिसेन ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश सरकार किसान विरोधी सरकार है, जिसके द्वारा कोरोना काल में डीएपी खाद के दामो में बेतहाशा वृद्धि करते हुए 50 किलो की बोरी में 615 रूपये एवं एक क्विटंल डीएपी खाद में 1230 रूपये की वृद्धि की है जिसमें किसानो पर आर्थक बोझ लादा जा रहा है। श्री बिसेन ने कहा कि जून-जुलाई महीने में किसानो को सबसे अधिक डीएपी खाद की आवश्यकता होती है एवं कोरोना संकटकाल में डीएपी के दामो में वृद्धि कर पहले से ही संकट से जुझ रहे किसानो पर दोहरी मार काटते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार ने दुबले पर दो आषाढ़ कहावत चरितार्थ की है। श्री बिसेन ने कहा कि एक ओर प्रदेश सरकार किसान हितैषी होने का ढोंग कर रही है वही 50 किलो की डीएपी खाद की बोरी के दामो में 615 रूपये की वृद्धि की गई है, ना ही किसानो के बिजली बिल माफ हुए है और ना ही किसानो को गेंहु का बोनस दिया गया है बल्कि ऐसे संकटकाल में सरकार किसानो को राहत देने की जगह आर्थिक संकट से लाद रही है जबकि कमलनाथ सरकार ने लगभग 23 लाख किसानो का कर्जा माफ किया है और यदि धनबल और छल से सरकार नही गिराई जाती तो अब तक समस्त 55 लाख किसानो का कर्जा माफ हो जाता। श्री बिसेन ने बताया कि पूर्व में डीएपी खाद की 50 किलो की बोरी 1285 रूपये में मिलती थी जिसके दाम वर्तमान समय में बढ़ाकर 1900 रूपये कर दिये गये है, जिससे किसान परेशान है। श्री बिसेन ने कहा कि एक ओर डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस, बिजली के बेतहाशा बिल, शक्कर सहित अन्य जरूरत की वस्तुओ में मंहगाई आसमान छू रही है वहीं अब खेती कार्य में उपयोग होने वाली डीएपी खाद के दाम बढऩे से किसान 10 क्विंटल डीएपी लेगा तो उस पर सीधे-सीधे 12-13 हजार रूपये का आर्थिक बोझ बढ़ेगा वहीं जिस प्रकार रेमिडिशिविर जैसी दवाओ की कालाबाजारी हो रही है वैसे ही डीएपी खाद की भी कालाबाजारी होगी जिससे रेट बढ़ेगे तो मजबूरन किसानो को 2500 रूपये में खरीदना पड़ेगा। श्री बिसेन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जल्द वे कोरोना संकटकाल में परेशान किसानो को राहत प्रदान करते हुए डीएपी खाद के दामो में हुई वृद्धि को वापस ले अन्यथा मजबूरन किसानो को आंदोलनात्मक कदम उठाने होंगे।

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