प्रधानमंत्री आवास राशि मे भेदभाव
बालाघाट। नगरपालिका परिषद बालाघट के अंतर्गत प्रधनमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे मकान एवम फ्लेट की योजना में काफी अनियमितताएं बरती गई हे। शहरी क्षेत्र में एक योजना के तहत अपात्रो को इसमें शामिल करके खूब बंदर बांट हुई है। इसी तरह पात्र हितग्राहियों में ऐसे लोग भी है जिनके मकान ही नही बने उन्हें राशि दे दी गई वही दूसरी ओर जिनके मकान निर्माणाधीन है उन्हें राशि प्राप्त करने में पसीना आ रहा है। इस तरह की जो अनियमितताएं हुई है या हो रही है उसमें संबंधित अधिकारी कर्मचारी कतिपय पार्षदों एवं अन्यो के स्वार्थ सम्मिलित है। जहां स्वार्थ आयेगा वही विवाद भी आएगा। और विवाद आया भी जिसमें आवास योजना का कार्य देख रहे कंपनी के कर्मचारी को शिकायत के बाद शहरी आवास योजना के बीएलसी स्की से हटना पड़ा।
शहर में इस योजना के संचालन का भार ईजीआईएस इंडिया कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के जिम्मे है जिसके 3 कर्मचारी बालाघाट नपा ऑफिस में ही बैठकर इस योजना में हितग्राहियो के दस्तावेज तैयार कर नपा अधिकारियो की अनुशंसा पर किश्तो के भुगतान की व्यवस्था करवाते है।
बालाघाट के सभी 33 वार्डो में इस योजना के तहत मकान हेतु पात्र हितग्राहियों को मकान पूर्ण होते तक 3 किश्तो में ढाई लाख रूपया मिलता है। इसी ढाई लाख में बंदर बांट होती है। जिसको लेकर हाल ही में नपा में बवाल मचा हुआ है। बताया जाता है कि कंपनी के अभिषेक परिहार नामक कर्मचारी की शिकायत नपा से संबंधित लोगो ने कलेक्टर को की और कलेक्टर ने कंपनी के बड़े अधिकारियो से की। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार कलेक्टर की शिकायत पर आज कंपनी के अधिकारी बालाघाट आए थे। प्रशासनिक चर्चाओ के बाद कंपनी के कर्मचारी अभिषेक परिहार को शहरी क्षेत्र की आवास योजना दायित्व से हटा दिया गया है। अब परिहार के पास फिल्टर प्लांट के समीप निर्मित हो रहे फ्लैट से संबंधित कार्य का दायित्व है। बताया जा रहा है कि अभिषेक परिहार की शिकायत के पीछे शिकायतकर्ताओं की मंशा ये थी कि अभिषेक परिहार मकान के पेटे में आ रही राशि की किस्तो का भुगतान उनकी पसंद के हितग्राहियों को पहले करे। इसमें पेंच यह भी रहता हहै कि मकान बना नही किश्तो की राशि का भुगतान कर दिया जाए, शायद अभिषेक परिहार इसमें कही आड़े आ रहे थे। इसलिए शिकायत और मुक्ति का खेला हो गया।