लाकडाउन से लोगों की टूटी कमर, 80 फीसदी उपभोक्ताओं ने जमा नहीं किए बिजली बिल

 लाकडाउन से लोगों की टूटी कमर, 80 फीसदी उपभोक्ताओं ने जमा नहीं किए बिजली बिल



कटंगी। कोरोना संक्रमण काल की दूसरी लहर में लगे लाकडाउन में लोगों की कमर टूट गइ है। ऐसे में 80 फीसदी उपभोक्ताओं ने अब तक बिजली बिल अदा नहीं कर पाए है। दरअसल, ललिता कृष्णा श्रीवास यह बिजली उपभोक्ता सैल्यून की दुकान चलाकर अपनी आजीविका चलाते हैं। माह जून 2021 का बिजली बिल 95 रुपये आया था इसके पहले बिल 100 रुपये तक आता था, लेकिन माह जुलाई 2021 एक माह बाद का बिजली बिल 2505 रुपये आया है। सरकार ने बिल बनाते समय उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति का भी जायजा नहीं लिया और बेतहाशा वृद्धि कर बिजली बिल थमा दी है। उपभोक्ताओं के लाकडाउन के बाद खाने के लाले पड़ रहे है।

इंजीनियर व समाजसेवी प्रशांत मेश्राम ने कहा कि चुनावों से पूर्व राज्य के खजाने को लुटा चुकी मध्य प्रदेश व केंद्र सरकार अब गरीब व मध्यम वर्ग का खून चूस कर खजाने को भरने में लगी हुई है। सरकार ने अगर इस नीति को नहीं बदला तो आने वाले दिनों में सरकार को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि आज केंद्र व राज्य सरकार ने हर चीज पर इतना अधिक टैक्स बड़ा दिया है कि लोगों को कोई भी काम करवाने से पूर्व लाख बार सोचना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जायदाद पर भारी टैक्स के अलावा पिता की जायदाद पर हक रखते बच्चों को पिता की मौत के बाद अपने नाम इंतकाल करवाने के लिए भी अब भारी टैक्स देना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वाहन ट्रांसफर फीस वाहन की कीमत से भी अधिक कर दी गई है। जबकि बिजली बिलों का सिस्टम तो पूरी तरह से बिगड़ चुका है। सरकार ने पहले तो बिजली की दरें बढ़ाकर लोगों की कमर तोड़ी। जबकि अब लोगों को बिजली के बिलों के बारे में कुछ पता ही नहीं है कि कब बिल आएगा अथवा कहां कैसे बिल का पता कर जमा करवाना होगा। मैरिज पैलेसों के बाद अब सरकार ढाबों सहित रेहड़ी व फड़ी वालों पर भी टैक्स लगाने जा रही है। उन्होंने इसे अंधेर नगरी चौपट राजा की संज्ञा दी। अगर ऐसी ही हालात रही तो गरीब व मध्यम वर्ग सरकार के इस बोझ तले दबकर मर जाएगा। पूर्व कमलनाथ सरकार ने गरीबों एवं मध्यवर्गीय लोगो के राहत के पैकेज जिसमे न्यूनतम 100 रुपये बिजली बिल था उसे खारिज कर मनमानी तरीके से जितनी लोगों की आय नही उतना बिजली बिल थमा रहे हैं। श्री मेश्राम ने कहा कि दिशाहिन मध्य प्रदेश सरकार की उक्त धक्केशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जरूरत पड़ी तो सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा।

इनका कहना

हमारी सैल्यून दुकान से 2000 रुपये है। लाकडाउन में भूखे मरने की स्थिति से परेशान जुलाई माह के बिजली बिल ने मानसिक तनाव में डाल दिया है। बिना रीडिंग 306 खपत दिखाकर बिजली काटने की धमकी देते है। चुनाव के दौरान हम गरीबों से महंगाई कम करने का वादा करने वाले नेताओं के पास जाने पर ये चुप्पी साधी रखे है।

ललित कृष्णा श्रीवास, सैल्यून दुकान संचालक।

अनाफ शनाफ बिजली बिल व टैक्स लगाकर वर्तमान सरकार गरीबों के खून को चूस कर अपना खजाना भरने में लगी है। यह स्थिति अगर आम लोगों की रही तो आम आदमी जिसकी इतनी आवक नहीं उतना बिजली बिल देगा तो अगली बार फिर एमपी सरकार को अपनी विजय के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।

प्रशांत मेश्राम, इंजीनियर व समाजसेवी।

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