खाली पड़े तालाब, मछुआरों की जीविका पर गहराएगा संकट
बालाघाट। मत्स्य बीज उत्पादन के लिए प्रदेश में अव्वल रहने वाले बालाघाट जिले में इस साल मत्स्य बीज का संकट बढ़ गया है। मानसून की लेटलतीफी से पर्याप्त मात्रा में मत्स्य बीज का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। जिससे मछुआरे तालाब में मछली का बीज नहीं डाल पाएंगे। इधर बारिश नहीं होने से न केवल तालाब खाली पड़े हैं,बल्कि बीज उत्पादन में दिक्कत आ रही है। जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है। बिना पानी के तालाब सूने हैं,समय रहते बारिश नहीं हुई तो मछुआरों की जीविका पर संकट गहरा जाएगा।
हर साल विभाग बीज तैयार करके मछुआरों को मुहैया कराता है। जिसके चलते मछुआरे निजी तौर पर बीज तैयार नहीं करते हैं। खास बात यह है कि बालाघाट से प्रदेश के लगभग 12 जिलों में मत्स्य बीज उत्पादन करके आपूर्ति की जाती है। लेकिन इस साल बालाघाट के लिए ही बीज का उत्पादन मुश्किल हो गया है। इधर मत्स्य विभाग के तालाब सूखे पड़े हैं। वहीं गांवों में मौजूद मछुआरों के तालाब भी खाली हैं। मछली पालन के कार्य से जड़े लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कई यदि समय रहते बारिश नहीं हुई और उन्हें बीज नहीं मिला तो कैसे साल कटेगा। लिहाजा मानसून की लेट लतीफी से जिले के किसान ही नहीं ,मछुआरों की जीविका पर संकट गहराता जा रहा है।
बीज उत्पादन को लेकर असमंजस: इस साल जिले में 68 करोड़ मत्स्य बीज उत्पादन का लक्ष्य है। लेकिन बारिश की लेट-लतीफी से अभी मत्स्य बीज उत्पादन की स्थिति बेहद खराब है। विशेषज्ञों के मुताबिक तापमान अधकि होने की बीज से मत्स्य बीज उत्पादन का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। सूखे फार्म के तालाबों को भरने के लिए विभाग के वैकल्पिक स्त्रोत भी जबाब दे चुके हैं।
बढ़ेगी बीज की कमी: इस साल मानसून में हुई देरी ने बीज उत्पादन की गतिविधियों को सक्रिय नहीं होने दिया । जानकारों के अनुसार यदि समय रहते बारिश नहीं हुई बीज उत्पादन करना मुश्किल हो जाएगा। जिससे जिले के मछुआरों को बीज नहीं मिल पाएगा। बालाघाट ही नहीं प्रदेश के सभी जिलों में बीज की कमी के चलते मछुआरों की जीविका पर संकट गहरा जाएगा।
विभागीय अफसर भी जता रहे चिंता: मछली पालन के लिए स्पॉन तैयार नहीं हुआ है। तो उनका संवर्धन और संचयन कब और कैसे होगा विभागीय अधिकारी भी पसोपेश में है। लिहाजा विभाग मत्सयबीज उत्पादन के लक्ष्य की पूर्ति नहीं कर पाएगा। वहीं किसान और मछुआरों की जीविका प्रभावित होगी। बीज उत्पादन के लिए नाला भी सूखा यहां भी स्थिति खराब: मत्स्य उद्योग विभाग द्वारा सर्वाधकि बीज उत्पादन मुरझड़ फार्म में किया जाता है। जिसके लिए समीप स्थति नाले के पानी का उपयोग किया जाता है। इस साल वह नाला भी कम चल रहा है। जिसके चलते फार्म के तालाब खाली हैं। नाले में बोरी बंधान कर पानी को रोका गया है।
मौसम प्रतिकूल: मत्स्य बीज उत्पादन के लिए मौसम प्रतिकूल है। इसके लिए 26 से 28 के बीच होना चाहिए। तभी मत्स्य बीज का उत्पादन संभव होता है। लेकिन वर्तमान में तापमान 35 -38 के पार है।
वर्तमान में सेवा प्रभावित
- जिले में मुरझड़ व तिरोड़ी फार्म में स्पॉन तैयार किया जाता है। जिनका संवर्धन 6 फार्मो में किया जाता है। मुरझड़ ,तिरोड़ी , लांजी बम्हनवाड़ा , बैहर ,गर्रा ,बालाघाट में यहां करीब 5 करोड़ बीज का संवर्धन किया जाता है। जिले के 2 हजार तालाब में जिसका संचयन किया जाता है।
- प्रदेश के लगभग 16 जिलों में बालाघाट से मत्स्य बीज भेजा जाता है। जिसमें इंदौर , शााजापुर उज्जैन,रतलाम,भोपाल,छिंदवाड़ा,मंडला नरसिंहपुर ,ग्वालियर ,जबलपुर ,हरदा ,डिंडौरी शामिल हैं। गत वर्ष इन जिलों में 6 करो? बीज भेजा गया था।
- जिले की 11 तहसीलों में छोटे बड़े मत्स्य पालन के काम लगे 5000 हजार मछुआरे हैं। जो 90 समितियों में रहकर अपना जीविकोपार्जन मछली पालकर कर रहे हैं।
जिले में स्थिति
-68 करोड़ मत्स्य बीज का लक्ष्य
-शासकीय प्रक्षेत्र 23 करोड़
-06 फार्म में संवर्धन।
-जिले में 5885 तालाब।
- 107 मछुआ समिति।
- अब तक 11 करोड़ बीज का उत्पादन।
-16 जिलों में आपूर्ति।
क्या कहतें हैं मछुआरे
इस साल अभी तक बीज तैयार नहीं हो पाया जिससे तालाबों में डालने के लिए बीज की कमी होगी। हर साल जून माह में स्पॉन तैयार हो जाता था। अभी तक फार्म में भी काम शुरू नहीं हो पाया है। तालाब पूरी तरह सूख गए हैं। उनमे गर्मी में तेज धूप के चलते इतना पानी भी नहीं बचा कि बीज तैयार हो सके । इस साल बड़ा संकट बढ़ेगा।
- रमेश कुमार, निषाद
जिले के बाहर बीज भेजना तो दूर बालाघाट में पूर्ति भी नहीं हो पाएगी। 68 लाख मत्स्य बीज उत्पादन करना मजाक नहीं है। आधा सीजन बीत गया है। कब स्पॉन तैयार करेंगे। कब फ्राई और कब फिंगर फ्राई बीज तैयार होगा । तालाब के भरने तक मछलियों का प्रजनन काल पूर्ण हो जाएगा। ऐसे में रोजी रोजगार की परेशानी होगी।
- मदन लाल केवट बालाघाट
15 अगस्त तक अगर बारिश नहीं हुई तो बीज उत्पादन प्रभावित हो जाएगा। मछली के अंडे अवशोषित हो जाएंगे। जिससे बीज उत्पादन नहीं हो सकेगा। वैसे वर्तमान में करीब 11 करोड़ बीज वितरित किया जा चुका। किसानों के तालाब भी सूखे पड़े हैं। जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है। मानसून की लेट-लतीफी से मत्स्य बीज उत्पादन ही नहीं मछली पालन पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
- शशिप्रभा धुर्वे ,उपसंचाल मत्स्य उद्योग विभाग बालाघाट