पंचायतों से लेकर जिला पंचायत तक के कामकाज पड़ गए ठप

 पंचायतों से लेकर जिला पंचायत तक के कामकाज पड़ गए ठप



किरनापुर।  मप्र पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रारंभ हो गई है। जिसके तहत किरनापुर में भी संयुक्त मोर्चा के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा जनपद पंचायत किरनापुर के प्रांगण में ही अनिश्चितकालीन ह?ताल पर बैठकर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। जिसके चलते जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायतों में कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ गए है और जरूरतमंद ग्रामीणों को अपने आवश्यक कार्यों के संपादन नहीं होने से बैरंग वापस लौटकर जनमानस को विभिन्ना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारी कर्मचारियों की तीसरे दिन भी हड़ताल जारी रही।

संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने बताया कि जनपद अंतर्गत विभिन्ना संगठनों को मिलाकर संयुक्त मोर्चा का गठन किया गया है। जिसके माध्यम से जनपद में कार्यरत सभी विभागों के अधिकारी कर्मचारियों की विभिन्ना लंबित मांगों को पूर्ण करवाने के लिए चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जा रहा है। पूर्व निर्धारित 22 जुलाई से अनिश्चिकालीन हड़ताल पर बैठकर धरना प्रदर्शन कर रहे है। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होगी तब तक यह ह?ताल जारी रहेगी। इसलिए शासन से मांग है कि वे जल्द से जल्द सभी अधिकारी कर्मचारियों की मांगों को पूर्ण करने का प्रयास करें। जिससे कि वह अपने कार्यों पर लौटकर लोगों के कार्यों को कर सके।

किरनापुर में जिला संगठन के पदाधिकारियों ने भी दी उपस्थिति: जनपद पंचायत किरनापुर में संयुक्त मोर्चा द्वारा की जा रही हड़ताल में शुक्रवार को जिला संगठन के पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते हुए आंदोलनरत कर्मचारियों की हौसला अफजाई करते हुए संगठन पदाधिकारियों ने अपने उद्बोधन में संयुक्त मोर्चा को मजबूती प्रदान करते हुए एकजुट होकर संघर्ष करने प्रेरित किया। संयुक्त मोर्चा ब्लॉक अध्यक्ष गौरीशंकर पाल ने बताया कि संयुक्त मोर्चा द्वारा हमारी अनिश्तिकालीन हड़ताल 22 जुलाई से की जा रही है जिसमें कुल 18 संगठन संयुक्त मोर्चा का गठन कर अपनी मांगों को लेकर ह?ताल कर रहे है और यह हड़ताल जब तक जारी रहेगी तब तक हमारी मांग मान नहीं ली जाती। संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी दुर्गेश भिमटे ने कहा कि अभी पिछले विगत वर्षों से हमारी प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन किए जा रहे है और हमें सिर्फ आश्वासन ही मिला है हमारी प्रमुख मांग नियमितिकरण की मांग है और हमें जब तक लिखित रूप आदेश से नहीं मिल जाता तब तक हमारा आंदोलन चलते रहेगा।

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