देश को चाहिए अब राष्टीय सहकारी बैंक
बालाघाट। देश के प्रथम केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा है कि सरकार सभी सहकारिताओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। केन्द्र की इस प्रतिबद्धता को जमीन पर उतारने में राष्ट्रीय सहकारी बैंक के लिये लायसेंस का प्रावधान महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है। इसके लिए बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 में संशोधन कर राष्ट्रीय सहकारी बैंक का प्रावधान जोडऩे की जरूरत है। राष्ट्रीय सहकारी बैंक को लायसेंस मिलने से सहकारी संरचना की राशि सहकारी परिवार में ही रहेगी। अभी सहकारी बैंकिंग संस्थानों को प्राविधिक तरलता अनुपात(एसएलआर) तथा नकदी तरलता अनुपात(सीआरआर) की राशि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में जमा कराना होती है। देश की कई सहकारिताओ के पास तरलता आधिकय की स्थिति है तो अनेक नकदी संकट से जूझती है। राष्ट्रीय सहकारी बैंक सहकारी क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय समाशोधन गृह(क्लियरिंग हाउस) का काम भी करेगा। अभी सहकारी क्षेत्र की अखिल भारतीय संगठनात्मक शक्ति भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ(एनसीयूआई) है। राष्ट्रीय सहकारी बैंक को लायसेंस मिलने से व्यावसायिक (प्रोफेशनल) मंच उपलब्ध होगा। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार राज्यो में राज्य।
नाबार्ड तो सहकारी साहूकार
वर्तमान में राष्ट्रीय कृषि तथा ग्रामीण विकास बैंक(नाबार्ड) भारतीय रिजर्व बैंक से धन प्राप्त कर, सहकारी, सार्वजनिक तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको को कृषि तथा ग्रामीण विकास के लिए पुनर्वित्त सुविधाए देता है। देश का सहकारी क्षेत्र नाबार्ड को तो सहकारी साहूकार मानता है। नाबार्ड के पास क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको और सहकारी बैंको की पुनर्वित व्यवस्था प्रबंधन का भारी दबाव है। सहकारी क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए नाबार्ड के पास अपेक्षित समय और संसाधन की व्यवस्था बड़ा प्रश्रचिन्ह है।
महाकाय आएंगे झंडे तले: यदि राष्ट्रीय सहकारी बैंक को लायसेंस मिलता है तो इफको, कृभको, नैफेड, जीसीएमएमएफ(अमृल ब्रांड) जैसे 50 से अधिक महाकाय सहकारी संस्थान अमानते इसमें जमा कराएंगे।
राष्ट्रीय सहकारी बैंक: पृष्ठभूमि
-तत्कालीन वरिष्ठ सहकारी नेता रामनिवास मिर्धा की अध्यक्षता में वर्ष 1965 में गठित समिति ने राष्ट्रीय सहकारी बैंक के गठन की अनुशंसा की।
- जिला सहकारी केंद्रीय बैंको के वर्ष 1978 में संपन्न अखिल भारतीय सम्मेलन में राष्ट्रीय बैंक गठन की अनुशंसा
- वर्ष 1986 में प्रो. अमीर मोहम्मद खुसरो की अध्यक्षता में गठित समिति ने वर्ष 1989 में राष्ट्रीय सहकारी बैंक के गठन की जोरदार अनुशंसा की।
- अगस्त 1993 में केंद्रीय सहकारी पंजीयक द्वारा राष्ट्रीय सहकारी बैंक का पंजीयन तब से अब तक समय-समय पर इसके चुनाव होते है। पदाधिकारी लायसेंस के लिए प्रयास किया करते है। देश के प्रथम सहकारिता मंत्री अमित शाह यदि सहकारिता की राष्ट्रीय व्यावसायिक जाजम के लिए बैंकिंग विनियमन अधिनियम में संशोधन के प्रयास करे, उसमें राष्ट्रीय सहकारी बैंक का प्रावधान प्रस्तावित हो तो बात बन सकती है। छोटी से लगाकर शीर्षस्थ सहकारी संस्थाएं सशक्त हो सकती है।