प्रदेश में झींगा मछली का अस्तित्व बचाने नवाचार, अब तालाबों में भी पाली जाएगी झींगा मछली

 प्रदेश में झींगा मछली का अस्तित्व बचाने नवाचार, अब तालाबों में भी पाली जाएगी झींगा मछली



बालाघाट। मध्यप्रदेश में झींगा मछली का अस्तित्व बचाने सरकार नवाचार करने की तैयारी कर रही है। इसके पालन को बढ़ावा देने प्रयास किए जा रहे हैं। भारत सरकार भी इस दिशा में खास योजना बना चुकी है। इसके अस्तित्व को बचाने मध्यप्रदेश में आठ सौ हैक्टेयर में झींगा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें अकेले बालाघाट में 100 हैक्टेयर में झींगा मछली का पालन किया जाएगा।

बालाघाट पूरे प्रदेश में इसका केंद्र इसलिए भी है, क्योंकि यह जिले की प्रसिद्ध मछली है। जो वैनगंगा नदी की देन मानी जाती है। पिछले कुछ सालों में इसके उत्पादन में कमी आई है। हालात यह हैं कि झींगा अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। अब तक यह नदी और बांध में ही पाई जाती थी,अब इसे तालाब में भी पाला जाएगा। इसका बीज भुवनेश्वर से बुलाया जाएगा। झींगा का उत्पादन गांव-गांव करने के लिए इसे बढ़ावा देने तालाबों में पालने की तैयारी की जा रही है। इससे मछुआरों के जीवन में बदलाव आएगा।

झींगा मछली को ऐसे जाने: झींगा एक मांसाहारी खाद्य है। जो मानसिक व शारीरिक विकास में मदद करता है। इसका शरीर तीन हिस्सों में विभाजित होता है और इसके छोटे-छोटे पैर होते हैं। इसकी ढाई हजार से अधिक प्रजातियां हैं। चिकित्सा विशेषज्ञ के डॉ.बीएम शरणागत मुताबिक पोषक तत्व - झींगा में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसमें मैग्नीशियम, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, आयरन, सोडियम, जिंक तांबा होता है। इसके अलावा प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा व कैलोरी अच्छी मात्रा में होती है। जो शरीर को स्वस्थ्य बनाए रखने में मदद करती है। इसमें बिटामिन-डी, बी-3, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लामेंटी गुण पाए जाते हैं।

स्वास्थ्य के लिए फायदा: झींगा मछली में हृदय, मस्तिष्क को स्वस्थ्य रखती है। इसके साथ ही कैंसर से सुरक्षा, हड्डी मजबूत करने के अलावा आंख की रोशनी बढ़ाने, बाल झडऩे से रोकने और थॉयराइड की समस्या से निजात दिलाने व वजन घटाने में मददगार है।

ऐसे बड़ा अस्तित्व पर संकट: झींगा मछली मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले की खास पहचान है। राजीव सागर बांध बनने के बाद महाराष्ट्र की बावनथड़ी नदी से वैनगंगा में मूव करने वाला झींगा यहां कम हुआ। इसका उत्पादन कम होने से मछुआरों की रुचि कम हुई। जिसके चलते इसके अस्तित्व पर संकट बड़ा है। वैनगंगा नदी में पलने वाली यह मछली खारे व मीठे पानी दोनों में रह सकती है।

झींगा मछली का उत्पादन कम होने से इसके अस्तित्व पर संकट बड़ा है। इसे बचाने और मछुआरों के जीवन में बदलाव लाने के लिए केंद्र सरकार ने खास योजना बनाकर इसके पालन को ब?ावा देने प्रयास किए हैं। मध्य प्रदेश को इस साल आठ सौ हैक्टेयर में इसके पालन का लक्ष्य मिला है। जिसमें बालाघाट में सौ हैक्टेयर में इसक उत्पादन किया जाएगा। अब इसे गांवों में मौजूद तालाबों में भी पाला जाएगा।

- शशि प्रभा धुर्वे,उपसंचालक मत्स्य उद्योग

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