नगर और आसपास के क्षेत्रों में फैल रहा कालोनियों का जाल, कालोनाइजर कानून की उड़ा रहे धज्जियां
वारासिवनी । मध्यप्रदेश में अवैध कालोनी का धंधा इन दिनों जोरों से चल रहा हैं। ऐसे में वारासिवनी कैसे अछूता रह सकता हैं अवैध कालोनी काटने वालों को राजस्व, बिजली और नपा में पदस्थ अधिकारियों का भरपूर सहयोग मिल रहा हैं। जिसके चलते बिना नपा की अनुमति के भवन निर्माण हो रहे है।
दरअसल, शहर तो शहर, शहर से लगी ग्राम पंचायतों में भी कालोनाइजरों ने अपने पैर पसारना चालू कर दिया हैं। जहां पर ग्रामीणों की जमीन सस्ते रेट पर खरीदकर प्लाटिंग काटकर अच्छा पैसा कमाया जा रहा हैं। शहर में प्लाटिंग का कारोबार करने वाले किसी न किसी राजनीतिक दल से संबंधित है और उनको नेताओं का वरदहस्त प्राप्त है या यह कह ले कि कुछ पैसे का शेयर भी हैं तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। जहां आम आदमी को जमीन का डायवर्सन करवाने में कई माह लगते हैं वहीं इन कारोबारियों का डायवर्सन चंद दिनों में बिना आफिस के चक्कर काटे घर बैठे हो जाता हैं।
वारासिवनी शहर में कालोनी की शुरुआत 1998 से प्रारंभ हुई थी। जब नगर के व्यापारी व भाजपाई अनिल खंडेलवाल द्वारा शंकर तालाब के निचले हिस्से में गंगोत्री के नाम से कालोनी बनाने का कार्य प्रारंभ किया गया था। उसके बाद तो फिर नगर में भाजपा नेताओं ने कालोनी बनाने का जो कार्य अनवरत रुप से प्रारंभ किया है वह आज भी लगातार प्रारंभ हैं। अब उनके साथ कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता भी कालोनी निर्माण कार्य में जुड़ गए हैं। अब तक नगर में जितनी भी कालोनियों का निर्माण किया गया है उनमें सिर्फ दो कालोनी ऐसी हैं जिसमें कालोनाइजर द्वारा सिर्फ कच्ची सड़क, नाली व विद्युतीकरण करके दिया गया हैं। इन कालोनियों में बगीचा, पेयजल की टंकी सहित अन्य नियमों का पालन नहीं किया गया हैं। इनके अलावा जो भी कालोनी बनी हैं या वर्तमान समय में बन रही है। इन सभी कालोनियों में कालोनाइजर अधिनियम की जमकर धज्जियां उड़ाई गई है और अभी भी उड़ाई जा रही हैं। शासन की राशि से नेता करवा देते हैं कालोनाइजर की भूमि पर सड़क, नाली व अन्य सुविधा वास्तव में देखा जाए तो नगर में जितनी भी कालोनियां बनाई गई है उनमें उपभोक्ताओं को कालोनी एक्ट के तहत प्रदान की जाने वाली सुविधाएं से वंचित रखा गया और बाद में इन कालोनियों में सांसद, विधायक, मंत्री व नपा अध्यक्षों ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए शासकीय राशि का दुरुपयोग करते हुए विकास कार्य करवाएं गए। उसके बाद नगरपालिका परिषद ने कुछ कालोनियों को वैध भी घोषित कर दिया। लेकिन उसके बाद भी वर्तमान समय में नगर व क्षेत्र में कई कालोनियां नियम विरुद्ध बन रही है। जिनकी जानकारी नपा, राजस्व विभाग व विद्युत विभाग को भी हैं। इसके बावजूद यह तीनों विभाग इन कालोनियों में हो रहे नियम विरुद्ध निर्माण कार्यों को रोकने के स्थान पर प्रश्रय दे रह हैं।
इन स्थानों पर बनी और बन रही कालोनियों
नगर व क्षेत्र के विभिन्ना हिस्सों में अब तक जिन कालोनियों का निर्माण हुआ हैं या हो रहा है उनमें बालाघाट रोड पर महावीर नगर, विवेकानंद कालोनी, गणेश मंदिर काम्पलेक्स, अडमे प्लाजा, मलय एक, हेल्थ क्लब कालोनी से सटकर बन रहे मकान, गुरूनानक धर्मशाला के बाजू में सुमन वाटिका, लालबर्रा रोड में ही सिंधी कालोनी, रामदेव बाबा नगर, गायत्री मंदिर के आगे की गई प्लाटिंग, रामपायली रोड में हिमाचल नगर में, हिमाचल नगर के पवार मंगल भवन के सामने तथा बाजू में, आरएसएस कार्यालय के बाजू, मलय दो, दत्रातेय मंदिर के बाजू में, सोनी की प्लाटिंग, डोंगरमाली रोड में शंकर नगर, चंदन नगर, श्याम नगर एक, श्याम नगर दो, पटेल टोला निवासी द्वारा ग्राम पंचायत भवन के बाजू में की गई प्लाटिंग, लिल्हारे वेल्डिग के बाजू में बना काम्पलेक्स, तालाब से लगकर बनी कालोनी, कालेज से लगकर बनी कालोनी, नदीटोला सिकंद्रा में बनी कालोनी, मदनपुर रोड में निर्माणाधीन कालोनी, वार्ड नंबर तीन में दुर्गावती कालोनी, शिवधाम बालाजी नगर, शिवधाम में ही भुरू बढ़ई के घर के पीछे बन रही कालोनी, शिवधाम में ही दमाहे द्वारा की गई प्लाटिंग, वारा गोंडीटोला में कायदी रोड पर की गई प्लाटिंग, रामचंदानी मिल के पीछे की गई प्लाटिंग, वार्ड नंबर सात में गुरूनानक नगर कालोनी, वार्ड नंबर आठ में विजय नगर, शहर के मध्य में उत्कृष्ट सिटी, चंदोरी में ही मिश्रा द्वारा निर्मित महेश्वरम और सबसे मुख्य गंगोत्री कालोनी, मिश्रा नगर कालोनी, वार्ड नंबर नौ में पात्रे कालोनी, रामपायली रोड में मजिस्ट्रेट कालोनी के सामने निर्मित काम्पलेक्स, कालेज चौक पर निर्मित काम्पलेक्स, वार्ड नंबर तीन दुर्गावती नगर मे गणेश चौक से लगा कासल प्लाटिंग, धोबी द्वारा विक्रित भूखंड प्रमुख हैं।
मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहते हैं उपभोक्ता
स्थिति यह हैं कि उपभोक्ता एक अदद घर बनाने के लिए इन कालोनियों में प्लाट तो खरीद रहा हैं, लेकिन उसके बाद फिर वर्षों तक इन कालोनियों में पेयजल, नाली, सड़कें, बागीचा आदि मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहता हैं। आश्चर्यजनक बात यह हैं कि नगर व आसपास के क्षेत्र में इतनी अधिक कालोनियां बन रही हैं या फिर प्लाटों की बिक्री हो रही हैं, लेकिन ना तो नपा, राजस्व विभाग और ना ही विद्युत विभाग इन कालोनियों की वैधता की जांच कर रहा हैं।
जांच जारी है। 13 कालोनियों को अवैध घोषित करने के लिए एसडीएम के पास फाइल भेजी गई है।
राधेश्याम चौधरी, सीएमओ नपा वारासिवनी।