450 बसों का होता है संचालन, जिले के बस ऑपरेटरों ने महंगाई के कारण करीब 200 बसों को किया सरेंडर, यात्री परेशान
बालाघाट। रेल सेवा पूर्ण रुप से सुचारु न होने की स्थिति राहगीर राहगीरों के लिए एकमात्र आवागमन का साधन यात्री बसें ही बचे थी, लेकिन बढ़ते डीजल के दाम और परिवहन विभाग के नियमों के चलते यात्री बसों का संचालन का कार्य भी मुश्किल हो चला है। जिसके चलते ही बालाघाट जिले के बस ऑपरेटरों ने करीब 200 बसों को सरेंडर कर दिया है। जिसके चलते ही आवागमन की समस्या भी निर्मित हो गई है।
बालाघाट जिले में करीब 450 बसों का संचालन होता है जिसमें से करीब 60 बसें अतिरिक्त कार्य के लिए खड़ी रहती है और बाकि बसें सवारियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने का नियमित रुप से कार्य करती है, लेकिन करीब 200 बसों के सरेंडर के बाद जहां गोंदिया-नागपुर की बसों का पूर्ण रुप से संचालन बंद हो चुका है वहीं बैहर, लांजी, जबलपुर, भोपाल, लालबर्रा, कटंगी, खैरलांजी, लामता समेत अन्य स्थानों पर भी बसों की संख्या न के बराबर बची है। जिससे यात्री परेशान हो रहे है।
टैक्स माफ नहीं किया: कोविड सक्रमंण में खडी बसो का टैक्स माफ ना होना व डीजल में बेतहाशा बढौतरी समेत अन्य मांगों को शासन द्वारा पूरी नहीं किए जाने के चलते आक्रोशित बस ऑपरेटरों ने अधिकांश बसों का संचालन ही बंद कर दिया है। यहां बस ऑपरेटरों ने बताया कि कोविड संक्रमण काल के दौरान हुए लॉकडाउन में शासन व जिला प्रशासन के निर्देश पर बस आपॅरेटरो द्वारा बसो का संचालन बंद कर दिया गया था। बावजूद इसके अप्रैल व मई माह का परिवहन टैक्स शासन द्वारा माफ नही किया गया। जबकि परिवहन विभाग और जिला प्रशासन के द्वारा ऑपरेटरो को आश्वास्त किया गया था कि बसों का टैक्स माफ कर दिया जाएगा।
इनका कहना
डीजल की मूल्य में भी हुई बढौतरी की वजह से बस परिवहन का खर्च नही निकल पा रहा है। ऐसी परिस्थिति में चालक व परिचालक का मानदेय भी नही दे पा रहे है। कोविड सक्रमंण का खौफ होने से यात्रीयों की आवाजाही भी कम है। जिस कारण बसो के संचालन का खर्चा ना निकलने से बंद पडी जिन बसो पर सरकार के द्वारा टैक्स लगाया गया था उन बसो को संरेंडर किया जा रहा है। ताकि खडी हुई बसो पर लगने वाले टैक्स से निजात मिल सकें।
श्याम कौशल, सचिव बस एसोसिएशन