बार्डर के 70 गांवों में 400 से अधिक मिले मलेरिया के मरीज
बालाघाट। जिले में इन दिनों वायरल और मलेरिया के मरीजों के साथ डेंगू के मरीज भी सामने आ रहे है। इधर विभाग मरीजों में डेंगू के लक्षण होने की बात तो मान रहा है, लेकिन मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आने से अनदेखी करता नजर आ रहा है। बता दें कि रैपिड टेस्ट में मरीजों की डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है, लेकिन विभाग इसे मानने तैयार नहीं है। लिहाजा डेंगू के मरीज निजी अस्पताल व प?ोसी राज्य गोंदिया में अपना इलाज करा रहे है। मलेरिया वायरल के बीच डेंगू के मरीजों की बढ़ती संख्या चिंताजनक होती जा रही है बालाघाट के एक मरीज की गोंदिया में मौत हो जाने के बाद भी विभाग इसे लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है। जबकि बीते माह बालाघाट के जिला अस्पताल में भी दो मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है तो वहीं निजी अस्पताल व पड़ोसी राज्य गोंदिया में लगातार डेंगू के मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है।
टेस्ट कीट के फेर में फंसे डेंगू के मरीज:
मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर मनोज पांडेय के अनुसार डेंगू की जांच के लिए उपयोग में लाई जा रही रैपीड टेस्ट कीट को शासन द्वारा मान्य नहीं किया जा रहा है और डेंगू की जांच के लिए एलिजा टेस्ट सिर्फ जिला अस्पताल में होता है ऐसे में कई मरीज जानकारी के अभाव में डेंगू से पी?ित होकर परेशान हो रहे है तो वहीं रैपीड टेस्ट की जांच रिपोर्ट को विभाग मान नहीं रहा है। यहां उन्होंने प्रायवेट अस्पताल के चिकित्सकों से भी कहा है कि वे रैपीड टेस्ट कीट के आधार पर डेंगू के मरीजों की पुष्टि न करें और लक्षण समझ आने पर अधिकृत एलिजा टेस्ट की करवाएं।
वायरल, मलेरिया से बचाने बार्डर एरिया में जांच:
लोगों को वायरल, मलेरिया से ग्रसित होने पर उनकी जांच कर इलाज करने के लिए अस्पताल प्रबंधन बार्डर एरिया में अभियान चलाकर ग्रामीणों की जांच कर रहा है। यहां महाराष्ट्र के गोंदिया, भंडारा व छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से लगे गांव कटंगी, खैरलांजी, किरनापुर, लांजी व बिरसा समेत अन्य बार्डर से लगे करीब 70 गांवों में जांच की जा रही है। अब तक करीब छह हजार लोगों की जांच में चार सौ से अधिक मलेरिया के पॉजिटिव मरीज मिल चुके है जिनका इलाज किया गया है।
कोरोना वायरस संक्रमण के बीच वायरल व मलेरिया की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे जांच अभियान में दिक्कते भी उत्पन्ना हो रही है। यहां ग्रामीण कोरोना वायरस संक्रमण के डर से टेस्ट कराने से हिचक रहे है जिससे जांच टीम को कई मर्तबा मुसीबतों का भी सामना करना पड़ रहा है।
डेंगू की जांच के लिए रैपीड टेस्ट को शासन द्वारा मान्य नहीं किया गया है। डेंगू की जांच जिला अस्पताल में एलिजा टेस्ट से की जाती है। प्रायवेट चिकित्सकों से भी कहा गया है कि वे रैपीड टेस्ट के आधार पर डेंगू की पुष्टि न करें वहीं गोंदिया से भी जानकारी ली जा रही है। वायरल मलेरिया की रोकथाम के लिए बार्डर से लगे गांवों में जांच अभियान भी चलाया जा रहा है।
डॉक्टर मनोज पांडेय, मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी।