विधि संकाय के 15 छात्रों ने प्राचार्य से मांगी एनओसी

 विधि संकाय के 15 छात्रों ने प्राचार्य से मांगी एनओसी



वारासिवनी। जिले के सबसे पुराने विधि महाविद्यालय एसएसपी महाविद्यालय के जिम्मेदारों की लालफीताशाही से विधि संकाय के 15 छात्रों ने कॉलेज से पलायन करने का मन बना लिया है। बुधवार को छात्रों ने नियमित रूप से प?ाई ना होने एवं महाविद्यालय से पडऩे के लिए बुकें उपलब्ध ना होने सहित अन्य नौ बिंदुओं पर कॉलेज प्रबंधन से परेशानी जताते हुए लिखित में पत्र सौंपकर उन्हें कॉलेज स्थानांतरण के लिए एनओसी देने की मांग की है।

विधि संकाय द्वितीय वर्ष के छात्र केसरी नंदन नगपुरे ने बताया कि उनलोगों ने जब से इस महाविद्यालय में विधि संकाय में जबसे एडमिशन लिया हैं तबसे कभी भी स्थाई तौर पर पूरे समय कक्षाएं नहीं लगी हैं। जिनसें छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही हैं। किसी समस्या को लेकर जब छात्र संस्था प्रमुख से शिकायत करते हैं उसके बावजूद भी संस्था प्रमुख द्वारा शिकायत का निराकरण नहीं किया जाता हैं। इन छात्रों ने बताया कि विद्यायल प्रबंधन द्वारा कक्षाएं ना लगाए जाने की जानकारी पूर्व में नहीं दी जाती। जिससे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विधि के छात्र बेवजह आकर परेशान होना पड़ता हैं। इन छात्रों ने विधि विषय पडऩे वाले शिक्षकों पर विद्यार्थियों के बीच भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि नियमित रूप से उनलोगों द्वारा कक्षाएं अटेंड करने के बावजूद भी शिक्षकों द्वारा सीसी के नंबर उन्हें काफी कम दिए जाते हैं। जबकि कक्षा अटेंड नही करने वालों को उनसे भी अधिक नंबर दिए जाते हैं। इन छात्रों ने आरोप लगाया कि लाइब्रेरी से उन्हें किताबे पडऩे के लिए नहीं दी जाती हैं जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही हैं।

इन विद्यार्थियों ने मांगी हैं एनओसी

महाविद्यालय की लचर पढ़ाई व्यवस्था से क्षुब्ध विद्यार्थियों केशरी नंदन नगपुरे, पवनकांत मेश्राम, विष्णुप्रसाद बहेटवार, सुशील गनवीर, निलेश परते, रमेश मरावी, शुभम सिहोरे, अंकुश शुक्ला, शुभम चैतगुरु, नेहा रावड़े, रजनी नारनोले, दीक्षा चौधरी, अंकिता शेंडे, बबिता यादव, पल्लवी मनघटे ने प्राचार्य एसडी तिरपुड़े को पत्र सौंप कर एनओसी देने की मांग की हैं।

लोकतंत्र में सभी को है अधिकार

महाविद्यालय के प्राचार्य एसडी तिरपुड़े ने कहा कि कॉलेज छो?कर दूसरी जगह पर जाना है तो जाए। बात रही आरोप की तो लोकतंत्र हैं। लोकतंत्र में सभी को अधिकार हैं। आरोप-प्रत्यारोप का हालांकि छात्रों ने जिन बिंदुओं पर शिकायत की हैं उनमें से जितनी शिकायतें हमारे स्तर की हैं हम उसकी जांच कर उसके निराकरण की कोशिश करेंगे। कॉलेज में चार हजार विद्यार्थी हैं सभी को किताबें पडऩे दी जा रही हैं। किसी विद्यार्थी को किताबें मिलने में देरी जरूर हो सकती हैं। कॉलेज में एडमिशन कार्य पूर्ण होते ही विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए और भी किताबें बुलवाई जाएगी। जिसके बाद किताबें नहीं मिलने की शिकायत विद्यार्थियों की दूर हो जाएगी।

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