इंजीनियरों की कमी से जूझ रहा नगर पालिका

 इंजीनियरों की कमी से जूझ रहा नगर पालिका

शहर के विकास कार्यो को नहीं मिल पा रही दिशा

बालाघाट। वर्तमान में नगरपालिका प्रशासन इंजीनियरों की कमी से जूझ रहा है जिसके कारण शहर के विकास कार्यो पर विराम सा लग गया है आपको बताएं कि नगरपालिका में वैसे तो 4 इंजीनियर हैं लेकिन इनमें से अधिकांश के अवकाश में रहने के कारण अधोसंरचना संबंधी कार्यो में नगरपालिका प्रशासन को काफी दिक्कतें आ रही हैं और केवल एक इंजीनियर के भरोसे ही नगर पालिका प्रशसन जैसे-तैसे काम चला रहा है जिसिको लेकर मुख्य नगरपालिका अधिकारी के द्वारा प्रशासन से ऐसे इंजीनियरो की डिमांड की गई है जो स्थानीय होकर बाहर से आए हुए हो।

एक इंजीनियर के भरोसे शहर का विकास कार्य

नगर पालिका में 4 इंजीनियर होने के बावजूद शहर के तमाम विकास कार्यो पर केवल एक इंजीनियर है नजर रख पा रहा है वही इंजीनियर की कमी के कारण कहीं भ्ीा अगर टेक्रिकल समस्या होती है तो इसके समाधान को लेकर नगरपालिका को एड़ी जोटी का जोर लगाना पड़ता है चाहे नल जल योजना की बात करें या फिर किसी अधोसंरचना को दिशा देने कि इन सभी चीजों में इंजीनियर की कमी के कारण नगर पालिका फेल होती नजर आ रही है जिसको लेकर मुख्य नगरपालिका अधिकारी के द्वारा अपने स्तर पर प्रयास किए जा रहे है। इनमें से कुछ महिला इंजीनियर होने के कारण अधिकांश का अवकाश पर ही रहती है जिसके कारण सिविल इंजीनियर के माध्यम से ही नगर पालिका को अधोसंरचना सहित अन्य कार्यो के लिए निर्भर रहना पड़ता है जिसके कारण शहर के विकास कार्यो को वह गति नहीं मिल पा रही है जिसकी आवश्यकता है।

इंजीनियर की कमी से जूझ रहा नपा-मुख्य नगरपालिका अधिकारी

मुख्य नगरपालिका अधिकारी सतीश मटसेनिया ने बताया कि वर्तमान में नगर पालिका में सबसे बड़ी समस्या इंजीनियर की कमी है और इसकी कमी काफी खल रही है उन्होने कहा कि इंजीनियर कहने को तो नगरपालिका में चार है, लेकिन यह सिर्पु रिकार्ड में दिखाने के लिए लेकिन जमीनी स्तर पर देखे तो केवल सिविल का एक ही इंजीनियर है और एक ही इंजीनियर के भरोसे तमाम विकास कार्यो को पूरा नहीं किया जा सकता। इसलिए विकास कार्यो में विलंब हो रहा है इंजीनियर की समस्या को लेकर शासन स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है उन्होनें कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान प्रमुख सचिव को भी उन्होंने इस समस्या से अवगत कराया था और उनसे मांग की थी कि वह उन्हें दो इंजीनियर उपलब्ध कराएं जो बालाघाट के नही बल्कि अन्य जिले के हो क्योंक अक्सर देखा गया है कि बालाघाट जिले के इंजीनियर विकास कार्यो में रूचि नहीं लेते उसकी वजह से कार्य लंबित होता है।

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