अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ छात्रा का पुन: एडमिशन
बालाघाट। गोंगलई स्थित कन्या शिक्षा परिसर में वहा अध्ययनरत छात्रा के साथ टीसी विवाद मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए छात्रा अलेग्रा सैयाम का एडमिशन पुन: कन्या शिक्षा परिसर गोंगलई में करा दिया गया है। आपको बताये कि गत दिवस कन्या शिक्षा परिसर गोंगलई में करा दिया गया है7 आपको बताये कि गत दिवस कन्या शिक्षा परिसर गोंगलई में कक्षा 9 वी में पढऩे वाली छात्रा के पालक द्वारा भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाये जाने पर कन्या शिक्षा परिसर के प्राचार्य वाय के डोंगरे द्वारा परीक्षा के दौरान ही छात्रा को टीसी दी गई थी। छात्रा के पिता द्वारा इसकी शिकायत कलेक्टर कार्यालय में किए ाजने पर इस मामले को मीडिया द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, जिस पर जिला पंचायत सीईओ सहिहत अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की टीम द्वारा कन्या परिसर में जाकर मामले की जांच की गई और जांच में छात्रा की कोई गलती नही पाई गई, वही प्राचार्य को दोषी पाया गया। जिसकी जांच कर अधिकारियों द्वारा जांच प्रतिवेदन उच्च स्तर पर आगे की कार्यवाही के लिए भेज दिया गया है। वहीं दूसरी ओर इस मामले में कन्या शिक्षा परिसर प्रबंधन की गलती पाए जोन पर प्रशासन द्वारा ही अपना वाहन भेजकर छात्रा और उसके पिता को कलेक्टर कार्यालय बुलाया गया जहां आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त सुधांशु वर्मा और तहसीलदार रामबाबू देवांगन के मौजूदगी में प्राचार्य द्वारा छात्रा की टीसी को निरस्त कर पुन: कन्या शिक्षा परिसर में एडमिशन दिलाया गया।
प्राचार्य पर कर्यवाही की मांग पर अड़ा आदिवासी समाज संगठन
मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषश्द के पदाधिकारियों का कहना है कि परीक्षा के दौरान छात्रा को टीसी थमा दिया जाना छात्रा के भविष्य के साथ खिलवाड़ है जब तक प्राचार्य के खिलाफ कार्यवाही नहीं की जाती आदिवासी समाज शांत नहीं रहेगा। शुक्रवार को छात्रा का एडमिशन पुन: कराए जाने के दौरान मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के जिला अध्यक्ष दिनेश धुर्वे सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
शासकीय कर्मचारियो के साथ वाहन भेजकर कलेक्टर कार्यालय बुलाया गया - राजेंद्र सिंह सैयाम
कलेक्टर कार्यालय पहुचें छात्रा के पिता राजेंद्र सिंह सैयाम ने बताया कि उनकी बेटी को टीसी कन्या शिक्षा परिसर में खाने की गुणवत्ता को लेकर सवाल किए जाने के कारण थमाई गई थी और टीसी में लिख दिया गया था आपके पालक द्वारा कन्या शिक्षा परिसर प्रबंधन के साथ अभद्रता की गई। यह टीसी में लिखना और परीक्षा के दौरान टीसी दिया जाना नियम विरूद्ध है। हम चाहते है प्राचार्य पर कार्यवाही होना चाहिए ताकि पालकों को इस प्रकार परेशान ना होना पड़े।
जांच प्रतिवेदन उच्च स्तर पर भेज दिया गया है - सुधांशु वर्मा
आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त सुधांशु वर्मा ने बताया कि प्राचार्य द्वारा छात्रा की टीसी निरस्त कर दी गई है जिससे कि छात्रा का भविष्य खराब ना हो, और बच्ची का एडमिशन वापस उसी विद्यालय में पालक की सहमति पर करा लिया गया है। शासन बालिका शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है ताकि कोई भी बालिका शिश्क्षा से वंचित न रहे, इसी कारण छात्रा के पालक से संपर्क कर समझाइश दी गई और वापस बचची का एडमिशन कराया गया। जहां तक प्राचार्य पर कार्यवाही की बात है तो इसके लिए जांच प्रतिवेदन उच्च स्तर पर भेज दिया गया है, आगे जो भी कार्यवाही है उच्च स्तर से की जाएगी।