ग्राम प्रधान, प्रभारी सचिव व रोजगार सहायक मामला दर्ज करो नहीं तो करेंगे आंदोलन
उकवा । जनपद पंचायत परसवाड़ा की ग्राम पंचायत मोहगांव माल में ग्राम प्रधान और प्रभारी सचिव एवं रोजगार सहायक द्वारा मिलकर अनेक निर्माण कार्यों की राशि में अनियमितता करने का मामला सामने आया है। इस मामले की शिकायत अनेक बार किए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।जिसके चलते फिर से ग्रामीणों ने इसकी शिकायत कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा व जिला पंचायत सीईओ विवेक कुमार से करते हुए पुलिस थाना में अपराध दर्ज किए जाने की मांग की है। मामले में शिकायतकर्ताओं ने थाने में अपराध दर्ज नहीं होने पर धरना आंदोलन करने की चेतावनी दी हैं।
एक वर्ष में ही सड़कें हो गईं जर्जर:
ग्राम पंचायत मोहगांव माल के उप ग्राम प्रधान रोशनलाल, कृष्णा वरकड़े, पंच सतीश उइके, पंच तिरथलाल उइके ने बताया कि पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम केशा में चार रोड सीसी स्वीकृत की गई थी। लेकिन तीनों सड़क ग्राम प्रधान अर्चना कुर्राम और प्रभारी सचिव एवं रोजगार सहायक किशोर मरकाम द्वारा बनवाई गई है। यह सड़क ग्राम के गुलाबचंद के घर से बालचंद के घर तक सीसी सड़क 78 मीटर स्वीकृत की गई थी। जिसकी राशि दो लाख रुपये थी। इसके अलावा 350 मीटर सड़क ढाई से तीन लाख के बीच में स्वीकृत हुई थी। इतना ही नहीं गुलाबचंद के घर तक 78 मीटर सड़क आज तक नहीं बन पाई है। जबकि उक्त राशि का आहरण ग्राम प्रधान व सचिव द्वारा कर लिया गया है।इसके अलावा जो सड़कें निर्माण करवाई गई वह स?कें एक साल के भीतर जर्जर हो गई है।
जिम्मेदारों ने नहीं की मॉनीटरिंग:
ग्रामीण श्यामकुमार उइके, संतोष भलावी, मोहपत भलावी, प्रदीप भलावी ने बताया कि सभी सीसी सड़कों का निर्माण कार्यों के दौरान जनपद पंचायत स्तर से कोई भी अधिकारी मॉनीटरिंग करने के लिए मौके पर नहीं आए। जिससे ग्राम प्रधान और सचिव ने मिलकर गुणवत्ताहीन सड़क बनवाकर राशि का आरण कर लिया गया।वहीं ग्राम पंचायत द्वारा सार्वजनिक चबूतरा निर्माण स्वीकृत राशि एक लाख रुपये ग्राम केशा में बनना था जो अभी तक नहीं बन पाया है और इसकी राशि का आहरण हो चुका है। साथ ही वर्ष 2018 में लघु तालाब फकीरचंद दामाजी ग्राम केशा के नाम से स्वीकृत किया गया।जिसका भुगतान अब तक नहीं हो सका है। इतना ही नहीं मजदूरों का रोजगार गारंटी मद भुगतान नहीं हो पाया है।मामले की शिकायत जनपद पंचायत परसवाड़ा, जिला पंचायत से लेकर कलेक्टर को किए जाने के बाद भी संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों से भरोसा उठते हुए दिखाई दे रहा है।