यूपी चुनाव में हार के डर से मजबूरी में मोदी सरकार ने लिया कृषि कानून वापस:मुंजारे
बालाघाट। मोदी सरकार द्वारा लाये गये तीन $कृषि कानून बिलों को काला कानून बताते हुए देश का सबसे बड़ा और लंबा किसान आंदोलन के बाद अंतत: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 19 नवंबर को तीनो ही कृषि बिलों को वापस लेने का ऐलान कर दिया है। जिससे देश के किसाना में खुशी का माहौल है, हालांकि दिल्ली और गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानो का कहना है कि जब तक इसे संसद में रद्ध नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लाये गये कृषि कानूनों को वापस लिये जाने के ऐलान को पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने देश के किसानो की जीत बताया है, वहीं इस आंदोलन के दौरान मृत किसानो को शहीद बताते हुए उनके परिवार को 50-50 लाख रूपये, 5 एकड़ जमीन और परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी देने की मांग की है।
निज निवास पर आयोजित पे्रसवार्ता में पूर्व सासंद कं कर मुंजारे ने कहा कि हाल में विधानसभा और लोकसभा उपचुनावो में भाजपा की हार और आगामी समय में होने उत्तरप्रदेश चुनाव में दिख रही हार के डर से मोदी सरकार ने तीनो काले कृषि बिल वापस लिये है। उन्हाने कहा कि काले कृषि बिल को लेकर एक साल तक मोदी सरकार अहंकार में डूबी रही, जबकि देश का किसान बिल का विरोध करता रहा। जब उन्हें अपनी हार नजर आने लगी तो वह अब हार के डर से बिल वापस ले रही है, वह भी तब, जब अपने हक और अधिकार के लिए संघर्षरत युवा, बुजुर्ग और महिला किसानो ने अपनी शहादत दे दी। यह किसानों के संघर्ष की जीत है।
उन्होनें कहा कि अब मोदी सरकार तत्काल समर्थन मूल्य को लेकर कानून बनाये। तेलंगाना के किसान मुख्यमंत्री चंद्रशेखर स्वयं हैदराबाद में एमएसपी पर किसानो की समर्थन मूल्य में खरीदी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे है और देश का किसान भी यही चाहता है।