नक्सल प्रभावित क्षेत्र लांजी में स्वस्थ्य सुविधाओं के प्रति सजग नहीं है क्षेत्र के जनप्रतिनिधि

 नक्सल प्रभावित क्षेत्र लांजी में स्वस्थ्य सुविधाओं के प्रति  सजग नहीं है क्षेत्र के जनप्रतिनिधि 

बालाघाट ।   नक्सल प्रभावित क्षेत्र लांजी में यौं तो देखने के लिए,जिला चिकित्सालय लेबल का 100बेड का अस्पताल   है,जीस में दस डाक्टर होना चाहिए, लेकिन कुल दो डाक्टर ही है।जबकी वारासिवनी में पचास बेड का अस्पताल है। और पांच डाक्टर है।लांजी में एनआरसी की सुविधा है। लेकिन बच्चों के डाक्टर नहीं है। लांजी के दो डाक्टर वर्षा रंगारे और डाक्टर गीता बोकड़े का इनका दोनों का पेमेंट लांजी से निकल रहा है। और ये दोनों डाक्टर जिला चिकित्सालय बालाघाट में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। तथा बालाघाट में डाक्टर गीता बोकड़े के पति का केंसर अस्पताल है। जीस में गीता बोकड़े अपनी सेवाएं देती है। यही कारण है कि डाक्टर गीता बोकड़े ने अपना अटैचमेंट बालाघाट करवा लिऐ है। मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ मनोज पाण्डेय वर्षों से बालाघाट में जमें हूए है। नेताओं की चापलूसी करना इनका काम है।, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने में इनकी कोई रुचि नहीं है। वहीं नक्सल प्रभावित क्षेत्र लांजी में तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है।कारंजा,बहेला,रिसेवाड़ा जीस में एक डॉक्टर है।अब आप आंकलन करिए किस लेबल की स्वास्थ्य सुविधाएं लांजी क्षेत्र में है।  और प्रदेश सरकार ने लांजी क्षेत्र में कई उपस्वास्थ्य केंद्र भी खोल रखें है लेकिन ये सिर्फ देखने के लिए है इन उपस्वास्थ्य केंद्र में किसी में भी  डॉक्टर नहीं है।जब डाक्टर नही तो अस्पताल किस काम का, गीता बोकड़े, तथा वर्षा रंगारे,का वेतन लांजी से निकाला जाता  हैं। सेवाएं जिला चिकित्सालय बालाघाट में देते हैं।सरकारी अस्पताल के साथ साथ बालाघाट में प्राइवेट अस्पताल में भी सेवाएं देते हैं। क्या लांजी के लोगो के स्वास्थ्य के साथ  छेड़छाड नहीं है।कोरोना काल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होने से लांजी में 100से अधिक मरीजों की मौत हो गई, लांजी के लोग मरीजों को साथ लेकर इलाज के लिए तरसते रहे हैं, उन्हें इलाज नहीं मिला एनआरसी सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद बच्चों के डाक्टर नहीं, जीसके कारण बच्चों को गोदीयां बालाघाट लें जाना पड़ता है।अधिक समय लग जाने के कारण समय पर इलाज नहीं मिलने से कई बच्चों की मौत हो जाती है। लांजी से बालाघाट की दुरी 70किलो मिटर है,इस प्रकार से लांजी के लोगो के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी मनोज पाण्डेय पर अपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए, वहीं डाक्टर गीता बोकड़े और वर्षा रंगारे के विरुद्ध भी कार्यवाही की जानी चाहिए, डाक्टरो को आखिर किस आधार पर जिला अस्पताल बालाघाट में अटैच किया गया है। जबकि लांजी में इनकी न्युक्ति की गई थी, लांजी में अभी भी पद रिक्त हैं।सरकार जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए लाखों रुपए खर्च करती है। लेकिन इसका लाभ लांजी क्षेत्र की गऱीब जनता नहीं ले सकती, भ्रष्ट अधिकारी किस प्रकार से शासन के मनसुबे पर पानी फेरते है। क्षेत्र के जन प्रतिनिधि मौन रहते हैं।

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