ताम्र परियोजना मलाजखंड खान में मजदूरों का शोषण
बालाघाट। ऐशिया के सबसे बड़े तांबा खदान मलाजखंड में स्थानीय बेरोजगारो के साथ अन्याय जिले के बेरोजगार भूमि पुत्रों की उपेक्षा तथा बाहरी प्रान्तों से कर्मचारी व अधिकारियों की भर्ती ली जा रही है। भारतीय खनिज मजदूर संघ के संस्थाापक व महामंत्री मलाजखंड के पूर्व महामंत्री तथा ऐशिया के सबसे बड़े मैगनीज खदान के पूर्व अध्यक्ष तथा अखिल भारतीय खनिज धातु महासंघ के संस्थापक सदस्य व कोषाध्यक्ष एन के शर्मा ने मलाजखण्ड ताम्र परियोजना के प्रबंधको व कुछ स्वार्थी जनप्रतिनिधियों पर मिलीभगत का आरोप गया है। वहीं आगे शिकायतकर्ता श्री शर्मा ने यह भी बताया कि एक तरफ जिले के हजारो माइनिंग, इंजिनियर, सिविल इंजिनियर, इलेक्ट्रीकल इंजिनियर पांच-पांच हजार की नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे है।
अनुभवी इंजीनियर के नाम पर ली जा रही राशि
इसी तरह शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि अन्य प्रान्तो में छोटी-छोटी नौकरी के लिए लोगों को बाध्य होना पड़ रहा है और अपमानित भी हो रहे है। लेकिन मलाजखंड ताम्र परियोजना में पिछले माहों में अन्डर ग्राउण्ड माइन्स में अनुभवी इंजिनियर की आवश्यकता के नाम पर जंगल, उड़ीसा, झारखण्ड जैसे अन्य राज्यों से दनादन भर्तिया सिफारिश व पैसा का लेन-देन से किया जा रहा है। और ऐसे लोगों को संपूर्ण सुविधा जैसे क्वाटर, मेडिकल, केन्टिन की सारी सुविधाएं दी जा रही है। और दूसरी तरफ 20-20, 25-25 सालो से काम करने वाले आसपास के ग्राम चारटोला, भीम जोरी, बिरसा, मोहगांव पौनी व नेवरगांव में निवासरत सैकड़ों कर्मचारी दैनिक वेतन भोगी के रूप में न्यूनतम दैनिक वेतन ये कई वर्षो से काम करने वाले और डम्पर, बुल्डोजर और मैकेनिक प्लांट ऑपरेटर, टैक्रीशियन पद पर काम करके कंपनी को करोड़ो रूपये उत्पादन करके देने वाले कर्मचारियों के लिए पर्याप्त वेतन भी नहीं दिया जा रहा है।
तात्कालीन सांसद ने उठाया था मुद्दा
पूर्व सांसद के.डी. देश्मुख ने इस मुद्दे को अपने कार्यकाल में उठाया था। और उस समय ताम्र परियोजना के अधिकारियों में यह आश्वासन दिया था कि जब भी भर्ती होगी इन परिवारो के सदस्यो को नौकरी में लिया जाएगा परन्तु वर्तमान प्रबंधन व स्थानीय नेता इस सच्चाई को नहीं जानते है या जानबुझकर पैसो की लालच में स्थानीय लोगों की उपेक्षा कर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे है। केन्द्रिय विद्यालय यहां मलाजखंड में सन 1978 में प्रारंभ हुआ उसके लिए पूरी योजना व बजट के साथ में बना आठ एकड़ का खेल मैदान बना।
कैसे कर दिया डायरेक्टर ने लाखों का भुगतान
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार दीवान छ.ग.राज्य शासन में सेवारत है और इस विद्यालय के इंस्पेक्टर होने के नाते लाखो रूपया भुगतान किया जाता है। जो अनुचित है भ्रष्टाचार का आलम यह है कि मलाजखंड ताम्र परियोजना प्रबंधन द्वारा प्रतिवर्ष उस विद्यालय को करोड़ों रूपये अनुदान दिया जाता है। दिए गए बिल्डिंग का कोई शुल्क नही लिया जाता और विद्यालय का फर्नीचर आदि का रख-रखाव का खर्च कंपनी द्वारा वाहन किया जाता है। जिसमें करोड़ों रूपया वार्षिक खर्च होता है। यह सीधा-सीधा केन्द्रिय शासन के संस्थान में भ्रष्टाचार का नमूना है।
शिकायतकर्ता ने रखी थी प्राथमिकता
इस संबंध में शिकायतकर्ता ने अनुसार प्रबंधन के समक्ष स्थानीय भूमि पुत्रों को नौकरी में प्राथमिकता देने की बात रखी लेकिन दुर्भाग्य है कि 40-45 प्रतिशत विकलांग एक लड़की जो कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद के लिए आवेदन दिया और एन.के.शर्मा ने सांसद ढालसिंह बिसेन से व्यक्तिगत अनुशंसा कर उस पत्र को परियोजना प्रबंधन को सौपा और निवेदन किया कि इस स्थानीय बालिका को नौकरी में रखा जाए परन्तु वर्तमान प्रबंधन के अधिकारियो के कान में जू तक नही रेंगती और सांसद जैसे महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधि अनुशंसा के पत्र को कूड़ेदान में फेक दिया जाता है और उस बालिका को जो 40 प्रतिशत विकलांग है होने का आवेदन के सासथ मं संलग्र है उसे नौकरी आज तक नही दिया गया जबकि केंद्र सरकार ने केन्द्रिय संस्थानों में तीन प्रतिशत विकलांग व्यक्तियो को नौकरी में लेने का संसद में बिल पास किया व देश के कई सरकारी व औद्योगिक कंपनी में यह नीति मान्य है। यदि एक माह के भीतर उपरोक्त मांगों के निराकरण के लिए ध्यान नही दिया तो जिले के माटी पुत्रो व बेरोजगार नवयुवकों के सहयोग से आंदोलन खड़ा किया जाएगा यह जिले - उकवा, भरवंली, तिरोड़ी, मनसर, कांद्री, रमरमा व अनय मैगनीज खदाने जिले में लगभग 100 वर्षो से कार्यरत है। और अण्डर ग्राउण्ड माइन्स के लाखो अनुभवी लोग जिले में ही उपलब्ध है।