दो जांच कमेटी की जांच में राशि अदेय नही मिली, फिर क्येां लगाया गया आरोप

 जटाशंकर महाविद्यालय प्राचार्य और क्रीड़ा अधिकारी पर प्रोफेसर ने लगाये अमानत में खयानत के आरोप

बालाघाट। जिले के अग्रणी महाविद्यालय जटाशंकर त्रिवेदी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में तथाकथित 4 लाख 31 हजार 862 रूपये का मामला महाविद्यालय से निकालकर अब थाने की दहलीज पर पहुंच गया है। अब तक कथित गबन के आरोपो से घिरे प्रो. अरिवंदचंद्र तिवारी ने चार पत्रो की लिखित शिकायत कर अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य गोंविंद सिरसाठे, क्रीड़ा अधिकारी जसबीरसिंध सौधी पर अमानत में खयनत, षडयंत्र रचकर मानिकस एंव आर्थिक रूप से प्रताडि़त करने शासकीय क्रीड़ा सामग्री में हेरफेर कर मूझे अदेय प्रमाण पत्र एवं अंतिम वेतन पत्र जानबूझकर कर रोककर उच्च अधिकारियों को गुमराह करने, मीडिया में झूठे बयान देकर मेरी प्रतिष्ठा एवं सामाजिक छवि को धूमिल करने का संगीन आरोप लगाया है।

लिखित शिकायत में प्रो.अरविंदचंद्र तिवारी ने सिलसिले तथा कथित गबन के आरोपों को जिक्र करते हुए अपनी सफाई में बताया कि 6 अगस्त 2021 को बालाघाट महाविद्यालय से वारासिवनी स्थानांतरण होने के बाद 3 सितंबर 2021 को मैने वारासिवनी में पदभार ग्रहण कर लिया था। स्थानांतरण के कारण अंतिम वेतन प्रमाण पत्र जारी करने के लिय क्रीड़ा विभाग के अदेय प्रमाण पत्र मुझे क्रीड़ा अधिकारी जसबीरसिंह सौंधी ने नही दिया तथा 4 लाख 31 हजार 862 रूपये की राशि देय होने का पत्र प्राचार्य गोंविद सिरसाठे को 27 सितंबर 2021 को लिखा।

दो जांच कमेटी की जांच में राशि अदेय नही मिली, फिर क्येां लगाया गया आरोप

प्रो. अरविंदचंद्र तिवारी ने बताया कि क्रीड़ा अधिकारी द्वारा जिस राशि देय के लिए प्राचार्य को पत्र लिखा गया था। उसकी जांच के लिए प्राचार्य द्वारा पहले एक और बाद में दूसरी जाचं कमेटी बनाई गई। जिसकी जांच में मेरे पर कोई देय राशि नहीं पाई गई। प्रो. तिवारी की माने तो प्राचार्य गोंविद सिरसाठे द्वारा पहली जांच कमेटी डॉ.सीमा श्रीवास्तव, डॉ.नवाब कुरैशी तथा डॉ योगेश विजयवार की एक समिति बनाई गई जिसकी जांच में पाया कि उल्लेखित देय राशि की सामग्री वर्ष 2010 में जसबीरसिंह सौंधी द्वारा प्रभार लेने से इंकार करने के कारण 19 जुलाई 2010 को तत्कालीन प्राचार्य डॉ जी.पी.स्वर्णकार को सौंप दी गई थी लेकिन जसबीरसिंघ सौंधी द्वारा नही ली गई। इस रिपोर्ट के आधार पर प्रभारी प्रचार्य गोविंद सिरसाठे द्वारा अनावश्यक दबाव डालकर मुझसे राशि वसूल करने की रिपोर्ट बनाने का दबाव डाला गया लेकिन समिति सदस्यों द्वारा झूठी रिपोर्ट बनाने से इंकार कर दिया। जिसके बाद प्रभारी प्राचार्य द्वारा एक और जांच कमेटी बनाई गई। जिसमें डॉ पी.एस.कातुलकर, डॉ सीमा श्रीवास्तव डॉ उषासिंह तथा शासकीय महाविद्यालय खैरलांजी के क्रीडा अधिकारी नवीन कोस्ट को रखा गया जिनकी भी जांच रिपोर्ट में मेरे पर कोई राशि अदेय नही है और मुझे अंतिम वेतन प त्र जारी किया जाना चाहिये। 13 नवंबर 2021 को जांच समितियो ने वर्ष 2010 में जमा सामग्री का अवलोकन किया तथा पाया कि सभी क्रीड़ा सामग्री महाविद्यालय में मौजूद है और क्रीड़ा अधिकारी जसबीरसिंघ सौंधी जानबूझकर झूठे आरोप लगा रहे है।

परेशान करते रहे प्राचार्य और क्रीड़ा अधिकारी

प्रो. तिवारी ने लिखित शिकायत में बताया कि जांच समिति द्वारा सामग्री पाये जाने के बाद भी मुझे राशि जमा कराने के लिये प्राचार्य और क्रीड़ा अधिकारी मेरे विरूद्ध षडयंत्र रचकर मुझे आर्थिक और मानसिंक रूप से परेशान करते रहे। यही नही बल्कि मीडिया में मेरे खिलाफ दुष्प्रचार किया गया कि मैने सामग्री की चोरी की है और लाखों रूपये का गबन किया है।

पुरानी रंजिश निभा रहे क्रीड़ा अधिकारी

प्रो. तिवारी ने बताया कि 2004 में क्रीड़ा अधिकारी जसबीरसिंघ सौंधी के स्थानांतरण बैहर महाविद्यालय हो जाने पर तत्कालीन प्रचार्य डॉ ए.के.जैन द्वारा मुझे जबरन क्रीड़ा विभाग का प्रभार दिया गया था जिसमें 2 सितंबर 2004 को क्रीड़ा अधिकारी ने प्रभार सौंपा था। जिसके बाद स्टॉक रजिस्टर के मिलने के बाद 35 हजार रूपये की सामग्री कम पाये जाने पर मैने प्राचार्य को इसकी शिकायत की थी जिससे क्रीड़ा अधिकारी सौंधी ने मुझे कई बार प्रताडि़त किया और धमकिया भी दी थी जिसकी शिकायत प्रशासन से मैने की थी जिसका रंजिशवश आज वह मुझे बेवजह प्राचार्य के साथ मिलकर बदनाम कर रहे है।

कानूनी एवं दंडात्मक कार्यवाही की जाये: प्रो.तिवारी

प्रो. अरविंद चंद्र तिवारी ने पुलिस को दी गई लिखित शिकायत में मांग कि है कि प्राचार्य गोविंद सिरसाठे और क्रीड़ा अधिकाीर पर अमानत में खयानत, अपराधिक एवं आर्थिक षडयंत्र रचने, शासकीय दस्तावेज एवं शासकीय सामग्री को हेराफेरी करके उच्च अधिकारियो को झूठी जानकारी देकर गुमराह करने, महाविद्यालय की आंतरिक जानकारी अखबार, टीव्ही एवं सोशल मीडिया पर जारी करने, मेरी एलपीसी रोककर मुझे आर्थिक एवं मानसिक रूप से प्रताडि़त करने, मेरे खिलाफ दुष्प्रचार करने, अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन नहीं करने, अपने पद का दुरूपयोग करने के आरोप पर मामला पंजीबद्ध कर कानूनी एवं दंडात्मक कार्यवाही की जाये।

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