लाखों की स्पोर्टस सामग्री के गबन मामले का पटाक्षेप
बालाघाट। जटाशंकर शासकीय त्रिवेदी स्नातकोतर महाविद्यालय की 4 लाख 31 हजार 862 रूपये की स्पोर्टस सामग्री के गबन मामले की जांच करने छिंदवाड़ा से पहुंची टीम दूसरे दिन मीडिया से मामले की चर्चा करने का आश्वासन देकर बिना मीडिया को जवाब दिये चलते बनी। हालाकि दो दिनों में जांच टीम ने रिकॉर्ड, दस्तावेज और सामग्री की जांच, प्राचार्य डॉ.गोंविंद सिरसाठे, प्रोफे.अरविंदचंद्र तिवारी और क्रीड़ा अधिकारी जसबीरसिंह सौंधी के जवाब लेकर टीम छिंदवाड़ा रवाना होने से पूर्व मामले को लेकर आमने-सामने खड़े प्राध्यापक और क्रीड़ा अधिकारी को गले मिलाकर शिकवा, शिकायत भूलने की समझाईश देकर रवाना हो गई जिससे इसके बाद लाखें रूपये के हाईलाईट इस मामले में न तुम जीते न हम हारे की तर्ज पर मामले का पटाक्षेप होते दिखई दे रहा है वहीं इस संभावना पर महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. गोंविद सिरसाठे ने यह कहकर मोहर लगा दी कि दोनो बैठकर आपस में हल निकालें जबकि यह मामला न केवल अखबारों की सुर्खियों में रहा बल्कि इस मामले को लेकर एक छात्र संगठन ने मोर्चा तक खोल दिया था। तो फिर क्या ऐसा कोई मामला ही नहीं था या फिर प्राध्यापक और क्रीड़ा अधिकारी के बीच आमसी वैमनस्य को गबन का रंग दिया गया। फिलहाल जो भी हो लेकिन इससे ना केवल महाविद्यालय प्रबंधन बल्कि जिले के अग्रणी महाविद्यालय प्रबंधन बल्कि जिले के अग्रणी महाविद्यालय की साख पर बट्टा लगा है जिस पर मामले को बेवजह तूल देने वालों पर विभागीय कार्यवाही की बात अब जानकार कह रहे है।
हालांकि अब जांच टीम के मामले में की गई जांच के निष्कर्ष का इंतजार है जिसमेंं जांच टीम किसे क्लिनचिट देती है और किसे दोषी पाती है लेकिन इस पूरे मामले में जिस तरह से उच्च शिक्षा संस्थान के जिम्मेदार प्राचार्य से लेकर प्रोफेसर और क्रीड़ा अधिकारी के जो बयान पूर्व में अखबारों में आये वह आपस ीवैमनस्य को गबन का रंग देने जैसे थे। शिक्षाविद माने जाने वाले जिम्मेदार लोगों से ऐसे व्यवहार की अपेक्षा न तो विद्यार्थी रखते है और ना ही समाज। ऐसे में महाविद्यालय के बच्चों की शिक्षा पर भी सवाल खड़े होते है शिक्षा के इस मंदिर में आपसी लड़ाई को नया रंग देने का प्रयास किया लेकिन जांच टीम के बाद सब ठंडे पड़ते दिखाई दे रहे है। कल तक स्पोर्टस सामग्री के लिए नोटिस जारी करने वाले प्राचार्य आज मान रहे है कि स्पोर्टस सामग्री रखी है जबकि कल ही जांच के प्रमुख प्रोफे.अमिताभ पांडे ने स्वीकार किया था कि स्पोर्टस सामग्री रखी है।
एक ने पहले निकाला गबन तो दूसरे ने सामग्री हेंडओवर न लेकर दिखाया गबन
भले ही शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी स्नात्कोत्त्तर महाविद्यालय में स्पोर्टस सामग्री के लाखों रूपये के गबन का मामला एक दशक बाद सार्वजनिक होकर लोगों तक पहुंचा लेकिन इसकी पूरी कहानी वर्ष 2004 से ही शुरू हो गई थी जब महाविद्यालय में क्रीड़ा अधिकारी के पद पर पदस्थ जसबीरसिंह सौंधी का स्थानांतरण के बाद 2 सितंबर 2004 को क्रीड़ा अधिकारी ने प्रभार सौंपा था। प्रभार लेने के बाद प्राध्यापक अरविंदचंद्र तिवारी ने स्टॉक रजिस्टर के मिलान के बाद 35 हजार रूपये की सामग्री कम पाये जाने पर इसकी शिकायत प्राचार्य से की थी जिससे क्रीड़ा अधिकारी सौंधी नाराज थे और वह प्रयासरत थे कि कब उन्हें प्रोफैसर अरविंदचंद्र तिवारी को इसका सबक सिखा सके जिसका मौका उन्हें वर्ष 2010 में मिल गया जब पुन: महाविद्यालय के क्रीड़ा अधिकारी जसबीरसिंह सौंधी बने तो प्रोफे.अरविंदचंद्र तिवारी भारमुक्त हो गये जिसका प्रभार सहित स्टॉक जसबीरसिंह सौंधी को सौंपने का भरसक प्रयास अरविंदचंद्र तिवारी द्वारा किया गया लेकिन अपने खिलाफ निकाली गई रिकवरी से आहत सौंधी ने प्रभार नहीं लिया। उस दौरान जसबीरसिंह सौंधी ने 4 लाख 31 हजार 862 रूपये की राशि के क्रीड़ा सामग्री नहीं होना पाया जिस मामले ाके 10 साल बाद वर्ष 2021 के अंत-अंत में उठाकर इस मामले को सनसनीखेज बनाया गया और जमकर अखबारों में सुखिर्या रही। जब बालाघाट महाविद्यालय से अरविंदचंद्र तिवारी का स्थानांतरण हो गया और उन्हें क्रीड़ा विभाग के प्रभार के दौरान 4 लाख 31 हजार 862 रूपये जमा करने नोटिस जारी कर उनका अदेय प्रमाण पत्र एवं अंतिम वेतन पत्र को रोक दिया गया और मामला सुर्खियों में आया तब पता चला कि क्रीड़ा विभाग में इतने का कथित गबन हुआ है। हालांकि झूठ के पांव नही होते की तर्ज पर दोनों ही द्वारा अखबारों में मामला लाये जाने और अरविंदचंद्र तिवारी द्वारा इस मामले की शिकायत वरिष्ठ स्तर पर लिये जाने के बाद छिंदवाड़ा से जांच करने पहुंची टीम की जांच में खोदा पहाड़ निकली चुहिया के तर्ज पर यह मामला अब ठंडा पड़ता दिखाई दे रहा है वही इस मामले को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर गर्मी जाहिर कर रहे पक्षकार भी ठंडे होते नजर आ रहे है।
इनका कहना है
स्वयं अमानत में खयानत कर मेरे खिलाफ दुष्प्रचार किया गया जिसके कारण मेरे द्वारा वरिष्ठ स्तर पर शिकायत की गई थी। जांच टीम ने माना है कि जिस सामान के गबन की बात कही जा रही है वह सामान है जिसकी पूर्व में भी महाविद्यालय समिति द्वारा की गई जांच में सामान उपलब्ध था लेकिन मुझ पर गबन का आरोप लगाकर मेरे खिलाफ दुष्प्रचार किया गया था। खराब सामग्री की राशि को एड़ी और प्राचार्य राईटअप करने तैयार है साथ ही प्राचार्य ने आश्वास्त किया है कि शेष राशि वह दे देंगे। यदि वह शिकवा, शिकायत खत्म करते है तो मुझे कोई गिला-शिकवा नहीं है। मै तो गले के साथ मन और मतभेद मिटा चुका हूं।
अरविंदचंद्र तिवारी, प्राध्यापक
जांच टीम ने हमसे स्पष्टीकरण मांगा था। हमने जवाब दे दिया है जांच टीम ने सामान नहीं देखा बस लिखित बयान लिया। आज भी वह सामग्री प्राध्यापक अरविंदचंद्र तिवारी के पास है। मेरा यह व्यक्तिगत मामला नही है बल्कि स्पोर्टस सामग्री शासकीय संपत्ति होती है जो छात्रों के फीस से आती है। जांच अधिकारी नहीं चाहते कि आपसी वैमनस्य बना रहे इसलिए गले मिलाये थे। जब जांच रिपोर्ट का निष्कर्ष आयेगा तब देखेंगे कि क्या चाहा गया है और क्या कर सकते है।
जसबीरसिंघ सौंधी, क्रीडा अधिकारी
जांच टीम ने हम सबका लिखित में बयान लेकर गये है। यह 2010 का मामला है जब क्रीड़ा विभाग के प्रभारी अरविंदचंद्र तिवारी थे जो सामग्री को खराब स्ििाति में लेने से क्रीड़ा अधिकारी जसबीरसिंघ सौंधी ने इंकार कर दिया था। लगभग 4 लाख 31 हजार रूपये से ज्यादा की सामग्री थी। चूंकि मुझे जानकारी दी गई थी और मै शासन का काम करता हूं तो मै शासन को क्षति नही पहुंचा सकता। जो सामग्री है वह सामग्री जिस स्थिति में थी उसी स्थिति में सीलबंद है। यदि प्रभार हस्तांतरण हो जाये तो बात खत्म हो जायें। इससे महाविद्यालय की छवि पर असर पड़ा है। अब दोनों को बैठकर हल निकालना है।
डॉ गोंविंद सिरसाठे, प्राचार्य जटाशंकर पीजी महाविद्यालय