आरटीओ विभाग का उडऩदस्ता ही लगा रहा शासन को चूना
लांजी। लांजी क्षेत्र में इन दिनो आरटीओ विभाग के उडऩदस्ता टीम की अवैध वसुली की लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही है, विभाग के द्वारा एन्ट्री, बिनोरा बेरीयर से वाहन पास, सहित लांजी क्षेत्र में विभिन्न प्रमुख मार्गो पर पहुंचकर वसूली की जा रही है, एवं अधिकांश वाहनों से सेटींग के नाम पर 1 हजार से 2 हजार रूपये तथा बड़े वाहनों से और भी अधिक रूपये लेने की शिकायत प्राप्त हुई है।
13 फरवरी को भी आरटीओ का उडऩदस्ता टीम लांजी आमगांव मार्ग पर पहुंची जो कि लांजी नगर में प्रत्येक रविवार को साप्ताहिक बाजार होता है जहां पड़ोसी राज्यों के गोंदिया जिले से आमगांव से विभिन्न सब्जी एवं किराना के थोक एवं चिगर व्यापारी वाहनों के माध्यम से सब्जी एवं अन्य सामग्री लेकर आते है किसी व्यापारी का खुद का वाहन है तो कोई किराये का वाहन लेकर आता है, 13 फरवरी को हमें शिकायत प्राप्त हुई की आरटीओ के द्वारा हमें बगैर रसीद दिये किसी से 1 हजार तो किसी से 2 हजार रूपये लिये गये यह सभी छोटा हाथी या पिकअप वाहन है, किसी से पिछले हफ्ते रूपये लिये तो उससे इस रविवार को नही लिया गया वही किसी से महीन में दो बार पैसे लिये गये है जो कि बगैर रसीद दिये ही छोड़ दिया जाता है।
सीधे तौर पर शासन को चूना
आरटीओ उडऩदस्ता के द्वारा वर्तमान में जिन छोटा हाथी, पिकअप वाहनों पर कार्यवाही की जा रही है वह सब्जी भाजी, फुटकर किराना सहित अन्य छोटा व्यापार लेकर आने की है, विदित हो कि छोटा हाथी एवं पिकअप इन सभी वाहनों में वन टाईम टैक्स रहता है इनमें परमीट एवं टैक्स का कोई दायित्व नही रहता फिर भी अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। अब यदि हर रविवार को आरटीओ उडऩदस्ता इन छोटा हाथी पिकअप वाहनों से 1 हजार 2 हजार रूपये वसुली करेंगा तो यह सभी क्या कमायेंगे और खायेंगे, ये लोग क्षेत्र के प्रत्येक साप्ताहिक, बाजार, हाट बाजारों मे ंपहुंचकर अपना व्यापार करते है और इन्हें इस कदर आरटीओ विभाग का उडऩदस्ता कार्यवाही करेगा तो यह छोटे व्यापारी बाजार आना बंद कर देंगे।
व्यापारी हो रहे परेशान
साफ तौर से उक्त वाहनों के मालिको एवं व्यापारियो ने हमसे कहा कि हम प्रत्येक रविवार लांजी आना होता है, हम व्यापार करने आते है, लेकिन यदि इस तरह अवैध वसुली चलती रहेगी तो हम लोग आना बंद कर देंगे क्योकि कहा से हम पैसा लायेंगे, बाजार बाजार जाकर तो कमाते है दो चार हजार रूपये बचता है तो उसमें गाड़ी का डीजल, हमाली, टीकट सहित दीन भर की मजदूरी जाती है तो 1 या दो हजार रूपये बचता है उसमें से भी हम पैसा देंगे तो क्या होगा उसके बाद भी हम रसीद नही मिलती है जो कि जांच का विषय है।
ऑनलाईन क्यो नही कट रही रसीद
वर्तमान में आरटीओ विभाग ऑनलाईन भुगतान लेता है, सब कुछ ऑनलाईन हो चुका है तो यह कागजों पर रसीद क्यों काटी जा रही है, विभाग के द्वारा जो कि रसीद एवं चेक स्लीप दी जा रही है यह संदेह के दायरे में है इसकी भी जांच होनी चाहिये, क्या शासन तक पहुंच रहा है कि नही।