सर्किट हाऊस रोड पर सुबह से ही सड़क किनारे तक वाहनों की जाल

 सर्किट हाऊस रोड पर सुबह से ही सड़क किनारे तक वाहनों की जाल



बालाघाट। बालाघाट शहर का सर्किट हाऊउस से लेकर गोंदिया रोड की ओर जाने वाला मार्ग उस दिन खास चर्चा मे में रहता है जिस दिन अचानक कोई बड़़ी दुर्घटना हो जाती है और किसी की जान बेतरतीब भागते ट्रक, डम्पर या बसों की चपेट में आ जाने से हो जाती है। समय-समय पर इस मार्ग पर दर्दनाक दुर्घटनाएं होती रहती है जिसमें इन वाहनों में फंसकर दुर्घटनाएं होती रहती है जिसमें इन वाहनों में फंसकर जान गंवा बैठने वालों का चेहरा तक घरवालों को नसीब नही होता और कुछ ही देर में जनता आक्रोशित हो जाती है, सोशल मीडिया पर फोटो और मैसेज वायरल होने लग जाते हैं, प्रशासन भी मुस्तैद हो जाता है, नियम-कानूनों की बातें होने लगती है लेकिन अगले ही दिन स्थिति फिर जस की तस हो जाती है। व्यवस्था का सुधार नहीं होने का कारण यह भी है कि जनमानस जितनी जल्दी जागरूक होता है उतनी ही तेजी से दूसरे दिन ठंडा पड़ जाता है और मामला शांत हो जाता है फिर अगली बार जिस दिन दुर्घटना होती है फिर सोशल मीडिया पर हैशटैग लगाकर जागरूकत लोग बायपास बनाने, यातायात व्यवस्था सुधारने की बात करते है लेकिन दूसरे ही दिन स्थिति सामान्य हो जाती है।

शहर में यातायात की अव्यवस्था: बेतरतीब सुखल रही चौपाटियां और बड़े शोरूमों के सामने सड़क तक बना दी पार्किग देखा जाए तो एक ओर सर्किट हाऊस से गोंदिया रोड की ओर दिनभर दौड़ते ट्रक, बस, डम्पर और अन्य वाहन हैं वही दूसरी ओर इस सड़क के मुहाने तक जिसे सामान्य तौर पर कहें तो सड़क के अंतिम छोर तक वाहनों का ऐसा जाल बिछा हुआ है जो सुबह से लेकर देर रात तक खत्म ही नही होता जिसका कारण यह कि मेन रोड के बाद यह मार्ग जिसे पहले बाहर रोड कहा जाता था अब वह सेकेण्ड मेन रोड की गिनती में आ गई है और सारे बड़े शोरूम, बैंक, बड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठान एवं आधा सैकड़ा से अधिक चौपाटिटयां सड़कों तक लग गई है और यहां सुबह से शाम तक वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है जिसके चलते अब इस मार्ग पर एक भारी वाहन भी आ जाये तो दुपहिया वाहन चालक के लिए जरा भी जगह नही बचती है जो दुर्घटनाओं की मुख्य वजह है वही दूसरी ओर बढ़ते व्यापार के चलते बड़े डम्पर और ट्रक इस मार्ग से हर 5 मिनट में एक के बाद एक गुजर रहे हैं वही परिवहन विभाग द्वारा खंडी-कुटार की तरह बसों के परमिट बांट यिे गये हैं जो हर 2-4 मिनट के अंतराल में है और जगह-जगह खड़े यात्रियों को बैठाने की होड़ में फर्राटे के साथ यह बसों की टाईमिंग मिलाने दौड़ा रहे है और यह बसों को दौड़ाते समय यह तक नहीं देखते कि आजू-बाजू, आगे-पीछे कौन दुपहिया वाहन चालक आ-जा रहा है। वहीं बालाघाट शहर मं बड़े-बड़े डम्पर तो इस मार्ग पर हर थोड़ी देर में नजर आ रहे हैं और जब विशालकाय डम्पर सड़क पर होते हैं तो डम्पर तो इस मार्ग पर हर थोड़ी देर में नजर आ जाते हैं और जब विशालकाय डम्पर सड़क पर होते है तो डम्पर के अलावा कुछ सड़क पर दिखाई ही नहीं देता वही दुपहिया वाहन चालकों के सामने समस्या यह है कि वह अपने वाहन सड़क से नीचे उतारे भी तो कैंसे क्योंकि सड़क तक तो वाहनों की कतारें चाहे व हचौपाटियों की हो, रेस्टॉरेंटो की हो, ब्रांडेंड चाय दुकानों की हो या फिर चयनीज आयटमों की दुकानों की हो कतारे लगी रहती हैं, वही इस मार्ग पर अब बड़े-बड़े मॉल तो खुल गये है लेकिन पार्किंग सड़क पर ही है। किसी भी मॉल में स्वयं की पार्किंग की जगह नही दी गई है जिसके चलते लोग घंटो मॉल मेें सड़कों तक गाडिय़ा रखकर बिताते हैं। इन सबके ऊपर एक बात तो गौर करने लायक है कि सभी बड़े हॉटल जो कि लॉन के साथ बने हुए है एवं शादीघर भी इसी मार्ग पर है और जब यहां आये दिन  शादियां होती है तो सैकड़ों की तादाद में वाहनों का जमावड़ा न जाने कहां तक लगा रहता है यहां तक कि आसपास निवास करने वाले रहवासी एवं कुछ छोटे व्यापारी भी परेशान है वही जब वाहनों का जमघट लगता है तो इस मार्ग पर जरा सी भी जगह नही बचती कि सुधारू रूप से दुपहिया या चौपहिया वाहन चलाया जा सके। जब कभी उत्कृष्ट विद्यालय मैदान में एक दिवसीय या फिर आठ दिवसीय बड़े आयोजन होते है तो आयोजक एवं घूमने वाले भले ही इन उत्सवों में भीतर आनंदित वातावरण में रहते होंगे लेकिन उनको जरा भी इस बात की सुध नही है कि बाहर उन्होंने सड़को के ऊपर तक वाहन खड़े कर दिये है। ऐसी न जाने इस रोड़ पर कितनी ही समस्याएं खड़ी हो गई है लेकिन यातायात विभाग ऑंखों में पट्टी बांधे इन बेतरतीब अव्यवस्थाओं को मौन स्वीकृति दे रहा हहै और जब कभी अचानक कोई बड़ी दर्दनाक दुर्घटना होती है तो उस दिन जनता के बीच आवेशित माहौल दिखाई देता है लेनि सही मायने में इस मार्ग पर नियमानुसार सीमांकन कर सभी दुकानों की हद तक कर दी जानी चाहिए और हद से आगे बढऩे पर तत्काल जुर्माना भी निर्धारित होना चाहिए वही डिवाईडर के बाद बनी डामर रोड के बाद भी दोनों छोरों पर वर्तमान आवागमन की स्थिति को देखते हुए कुछ नहीं तो फिलहाल डब्लूबीएम मार्ग की तरह ही 10-10 फीट व्यवस्थित कर दिया जाना चाहिए ताकि दुपहिया वाहन चालक बड़ी गाडिय़ों के चलते अपने वाहनों का आसानी से चला सके और इन सबके बीच जब तक व्यवस्थाएं इस तरह नहीं बनाई जा सकती तो कम से कम यातायात प्रभारी को व्यवस्था बनाना चाहिए न कि जब कोई मीडियाकर्मी इन प्रमुख मार्गो पर वाहनों की व्यवस्था की बात करें तो अपने बिगड़े बोल में यह न कहें कि जाओं जो छापना है, छाप लो।

जो सांसद कर लेते जाम की स्थिति का मुआयना

सोमवार से बालाघाट-सिवनी संसदीय क्षेत्र के सांसद जहां बालाघाट में दो दिवसीय प्रवास पर थे और उन्होंने नगर के साथ जिले के विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया जबकि शहर की जनता सबसे ज्यादा बायपास मार्ग और ओवरब्रिज की सुविधा नहीं मिलने से त्रस्त है इसी बीच सोमवार की रात्रि दर्दनाक दुर्घअना के बाद सर्किट हाऊस रोड की स्थिति के साथ ही हर थोड़ी-थोड़ी देर में रेल्वे क्रॉसिंग पर लगते जाम की स्थिति सांसद स्वयं जाकर देखते तो शायद इस कार्य को जल्द आगे बढ़ाने में कारगर कदम उठाते बल्कि इसके विपरीत सांसद ने मंगलवार को नगर में दौरा किया भी तो उस आवास योजना का जो नदी किनारे वर्षो से बन रही है जो मंथर गति से डूब क्षेत्र में चल रही है। शहरवासी भी चाहते हैं कि सांसद स्वयं से बायपास और ओवरब्रिज बनाने के कार्य का संज्ञान लेते तो कुछ आस जगती।

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