जिले की घोषणाएं कागजों पर
बालाघाट। शहर में विकास की बात को लेकर 5 वर्षो तक राजनीतिक हवा का झोंका झंझोरते हुए नजर आते है। लेकिन इस पर यदि नजर दौड़ाई जाए तो विकास शून्य है। क्योंकि जो घोषणाएं 5 वर्ष में मंच के माध्यम से की गई वह एक कोरे कागज मे समाप्त होते हुए नजर आ रही है। यहां यह बता देना लाजमी होगा कि बालाघाट शहर के लिए अत्यंत आवश्यक 4 मुद्दों की आज हवा निकली दिखती है। यह मुद्दा अब ठण्डे बस्ते में चला गया है। किसी भी राजनीतिक दल को इसकी चिंता नही है। ये मुद्दे वर्षो से चल रहे है और कई अवसर ऐसा भी आया जब कार्यक्रमों में कहा गया कि यह कार्यक्रम अब होने ही वाला है। उस समय तो ऐसा लगा जैसे ने येता मंच से उतरे और काम शुरू हो जायेगा। बालाघाट नगर के लिये स्वीमिंगपुल, स्ट्रोटर्फमैदान, बॉयपास रोड या रिंग रोड सहित चार स्थानों में रेल्वे ब्रिज का निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है। पर लगता है सारे जनप्रतिनिधियों ने इन विषयों से अपने आपको तटस्थ कर लिया है और अब तो जनता भी भूलने लगी।
स्वीमिंग पुल का रह गया सपना बनकर
बालाघाट नगर के सैकड़ों प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं में स्वीमिंग की अदभुत कला है। जबकि बालाघाट शहर के खिलाड़ी आज भी बिना स्वीमिंग पुल के अपना करतब दिखाते आ रहे है। लेकिन शहर के मुलना स्टेडियम में स्वीमिंग पुल का निमा्रण करने की घोषणा गत वर्ष कर भूमिपूजन प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा किए जाने के बाद भी आज तक यह स्वीमिंग पुल बनाने की घोषणा अधूरी रह गई। जबकि कइ्र सालों से स्वीमिंग पुल बनाने की मांग की जा रही है और यहां के जनप्रतिनिधि आश्वासन भी देते रहे है। प्रति वर्ष जिला तैराकी संघ का कार्यक्रम होता है ओर वहां जो भी नेता अतिथि बनकर जाता है वह स्वीमिंग पुल निर्माण का आश्वासन देकर चला जाता है। वादे कभी पूरे हुये नही है और नेताओं ने अपनी बातों पर अमल किया ही नही। स्वीमिंग पुल के लिये जगह राशि सहित अन्य बातें बताई जाती है पर धरातल में कुछ भी नही है। इस लिहाज से जनप्रतिनिधियों का प्रदर्शन जीरो ही माना जावेगा।
एस्ट्रोटर्फ मैदान कागजो पर
जिले में हॉकी खिलाडिय़ों की कमी नही है कमी है बनाने की घोषणा और यहां तक की राशि की भी घोषणा की जाती रही है पर आज तक मैदान नही बना। हर साल यहां हॉकी मैच होता है और देश भर के हॉकी खिलाड़ी यहां आकर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जाते है। यहां भी ऐसा ही होता है जो सत्ता में होता है। पिछले वर्ष के कार्यक्रम में तो मैदान के लिये राशि स्वीकृत होने तक की जानकारी दे दी गई थी ओर लोगों ने खूब तालियां बजाई थी। पर हुआ क्या नही ढाक के तीन पात्य वाली कहावत चरितार्थ हो गई। आज नेताओं को पता भी नही होगा कि उन्होंने कोई घोषणा की थी।
बायपास रोड़ का मामला ठण्डे बस्ते में
स्वीमिंग पुल और एस्ट्रोटर्फ मैदान की तरह बॉयपास रोड रिंग रोड का मामला भी अब ठण्डे बस्ते में चला गया है। बॉयपास रोड का निर्माण पूर्व में किया गया है जो डेंजर रोड के नाम से जाना जाता है। परंतु इस मार्ग से ना तो ट्रक गुजरते है और ना ही इसका उपयोग हो पा रहा हे। संकरी और संकुचित मार्गत होने के कारण इस मार्ग का उपयोग ना के बराबर होता है। शहर में जब भी कोई दुर्घटना में किसी की जान जाती हे तब बड़े और चौडे बॉयपास का मुद्दा कुछ दिनों के लिये उठ खड़ा होता है। उसके बाद सब भूल जाते है। बॉयपास निर्माण के लिये लगभग 5 सैकड़ा पेड़ काटे जाने की अनुमति वन विभाग ने दी थी तब लोग बांसूरी लेकर पेड़ो ससे चिपककर गाना गाते थे। उस समय विवाद की स्थिति नही बनी तब एक नेता ने रिंग रोड बनाने की बात कही। कहा गया कि रिंग रोड बनाकर दुर्घटनाओं को टालने का प्रयास होगा पर पेड़ नही काटे जायेंगे। यह भी बताया गया कि नेता ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिेय है कि पर्यावरण की दृष्टि से पेड़ काटने की अनुमति को निरस्त किया जावे। ये बात अलग है कि बाद में भी पेड़ काटने की अनुमति मिली। पर जमीनी स्तर पर उक्त कार्य को अंजाम नही दिया गया। आज भी वही स्थिति है ना कोई बॉयपास है ना ही रिंग रोड़। नेताओं ने जनता का ध्यान भटकाने के लिये उस समय रिंग रोड़ की बात कर ली और अब भूल गये।
चार स्थानों पर रेल्वे ब्रिज का भी अता-पता नही
शहर में बढ़ते आवागमन और लंबे जाम को रोकने की दृष्टि से रेल्वे ब्रिज का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। कोरोनाकाल में रेल्वे नही चलने के कारण भटेरा और सिविल लाईन रेल्वे टे्रक पर भले ही जाम ना लगता हो परंतु सरेखा और बैहर चौकी मार्ग पर आज भी मालगाड़ी के आते या जाते समय घंटो जाम लगा रहता है। लोग परेशान होते है। नेताओं को कोते है पर काम नही होता। कई सालों से रेल्वे ब्रीज बनाने की मांग हो रही है और चुनावों में भी यह एक प्रमुख मुद्दा होता है पर चुनाव समाप्ति के बाद सब ठण्डे हो जाते है। इससे यह माना जा रहा है कि इतनी घोषण अधूरी होने से जिले के जनप्रतिनिधियों को इन समस्याओ से कोई लेना देना नही है।