वन विभाग आदिवासियों कर रहा प्रताडि़त पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने लगाया आरोप
बालाघाट। 15 फरवरी को ग्राम खुर्सीटोला के जंगल में बिजली का करंट लगाकर तेंदुए का शिकार करने का मामला अब आदिवासियों को प्रताडि़त करने व उन्हें जबरन फंसाये जाने के आरोप में घिरता जा रहा है। दरअसल, ग्राम खुर्सीटोला के कुछ आदिवासी ग्रामीण व वन विभाग की प्रताडना का शिकार हुए पीडि़त परिवार न्याय दिलवाने की दरकार लिये पूर्व सांसद कंकर मुंजारे के पास पहुंचे थे। जहां पीडि़त परिवार ने पूर्व सांसद कंकर मुंजारे से मुलाकात कर पूरा घटनाक्रम रखा। उसके बाद मुंजारे ने पे्रसवार्ता का आयोजन कर मीडिया के समक्ष अपनी बात रखी। जहां मुंजारे ने बताया कि 15 फरवरी को वन विभाग की टीम ने एक तेंदूए का शव बरामद किया था और उस मामले में संदेही के तौर पर ग्राम खुर्सीटोला के आदिवासी ग्रामीणों को पूछताछ के लिये हिरासत में लेकर उसके साथ जबरन मारपीट की और उन्हें मानसिक यप से खूब प्रताडि़त किया गया। इसके साथ ही वन विभाग के कर्मचारियों में रेंजर शशांक वमा्र, परिक्षेत्र सहायक बघोली, कमल वायाम एवं प्रमोद बंजारी, नदीम हुसैन, ओमकार चौधरी, राजिक खान, संतोष मेरावी, अक्षय यादव, सुरेश मरकाम, दीपक सिंह, महिपाल बैस, रवि वरकड़े, इमरत मरकाम, अजय चंद्रवंशी आदि अन्य 20-22 बीटगार्डो समेत वन अमला देवेन्द्र कुमार रामानंदी के घर पहुंचा और उसे जबरन उठाकर क्रूरतापूर्वक लाठी व डंडो से मारपीट करते हुए अपने साथ ले गये। जहां वन विभाग के इन कर्मचारियों ने पूर्व में हिरासत में लिये लोगों से जबरन देवेंद्र रामानंदी का नाम उगलवाकर खूब प्रताडि़त किया। श्री मुंजारे ने बताया कि वन विभाग के तानाशाह रवैये के कारण एक निर्दोश व्यक्ति देवेंद्र रामानंदी जेल में है और अन्य ग्रामीण भी प्रताडि़त किये गये। इस पूरे प्रकरण की जांच कराकर वन विभाग के दोषी अधिकारी-कर्मचारियों के विरूद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज कराकर उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिये। वही वन विभाग द्वारा आरोपी बनाये गये देवेंद्र रामानंदी की पत्नि अनीताबाई ने भी इस मामले का पूरा ब्यौरा मीडिया के समक्ष रखाा और न्याय की गुहार लगाई है। अनीताबाई का कहना है कि वन विभाग ने उसके पति को जबरन तेंदुए के शिकार प्रकरण में फंसाया है और आरोपी बनाकर जेल भेज दिया है। वे लोग कृषि कार्य करते है उनका इस शिकार प्रकरण से कोई लेना देना नही है। बाकि लोग भी ईट भट्टे में काम करते है उन्हे ंभी जिन्हें विभाग वालो ने मारपीट कर प्रताडि़त किया है।