वेलेंटाइन डे स्पेशल भारतीय नारी और पतिव्रत धर्म-अशोक सिहांसने असीम
बालाघाट। भारतीय संस्कृति विभिन्न संस्कारों, रिवाजों और परंपराओं की संस्कृति है। यहाँ मातृशक्ति की विभिन्न रूपों में पूजा की जाती है। महिलाओं के पतिव्रत धर्म की दुहाई दी तब जाती है यहाँ प्राचीन काल में पति के निधन होने पर पत्नी उसके साथ सती हो जाती थी। और उन्हें सती के रुप में पूजा जाता था। आज भी कुछ जगह ये परंपरा बरकरार है। इन परंपराओं को देश का बच्चा- बच्चा जनता है। हर ऋषि- मुनि, एवम धार्मिक- अधार्मिक व्यक्ति सभी जानते हैं।
वाकिया तब का है जब भारत के एक महात्मा विदेश में शिक्षा लेने गए। एक दिन रास्ते में जाते हुए उन्होंने देखा एक युवा महिला एक कब्र पर पंखा झल रही है, महात्मा को बहुत अचंभा हुआ कि भारतीय संस्कृति एवम सभ्यता में तो पत्नी पति के साथ चिता में सती हो जाती है पतिव्रत धर्म के लिए सब कुछ करती है पर पाश्चात्य सभ्यता में ऐसा न आज तक देखा और न ही सुना। उनके मन में असीम श्रद्धा का भाव जागृत हुआ। आँखों में आँसू आ गए मन द्रवित हो गया।
वे उस पतिव्रत महिला के पास पहुँचे बड़ी श्रद्धा के भाव से प्रणाम कर उससे कहा बहन जी आपकी इस सेवा भाव एवम आपके इस पति व्रत धर्म को देखकर मुझसे रहा नहीं गया सो आपके पास आ गया आपके पति का निधन कैसे और कब हो गया? महिला ने उन्हें बताया और कहा अभी दो दिन पूर्व ही हुआ।
महात्मा बोले हमारे हिंदुस्तान में पति के निधन होने पर पत्नी उनके साथ चिता में जलकर अपने प्राण दे देतीं हैं , जो कि उनके पतिव्रत धर्म की पराकाष्ठा होती है,और उन्हे बड़ी श्रद्धा से हम लोग सती कहते हैं। आप तो उनसे भी महान हैं जो पति के स्वर्गवास होने पर उनके विरह के दु:खों को सहते हुए उनकी कब्र पर पँखा झल रहीं हैं। मैं आपको प्रणाम करता हूँ आपको क्या कहूँ कुछ समझ नहीं आ रहा।
यह सुनते ही उधर से युवती ने तपाक से कहा- ये आप क्या कह रहे हैं। शायद आपको पता नहीं असल में हमारे यहाँ एक प्रथा है कि जब तक पति की कब्र सूखती नहीं तब तक पत्नी दूसरा विवाह नहीं कर सकती। इसी लिए मैं पंखे से अपने पति की कब्र सुखा रही हूँ ताकि वह जल्द सूख जाए।
यह सुन महात्मा ने अपना सिर पीट लिया। और उन्होंने महसूस किया की सारे संसार में भारत की नारियां ही हैं जो पतिव्रत धर्म का पालन करते हुए यमराज से अपने पति को वापस ला सकतीं हैं।
अशोक सिहांसने असीम
बालाघाट