मेहरा तालाब में सीमांकन करने गये दल को खदेड़ा

 मेहरा तालाब में सीमांकन करने गये दल को खदेड़ा



बालाघाट। तालाबों के शहर बालाघाट में जलस्त्रोत की कमी नही थी लेकिन कालांतर में भू-माफियाओं की नजरो ने शनै: शनै: तालाबों को लील लिया ओर आज शहर में महज कुछ गिनती के तालाब बचे है जो शेष, उस पर भी अतिक्रमण की काला साया होने से उनका भी क्षेत्रफल में सिकुड गया और महज कुछ भाग बचा रह गया है जिसको बचाने की कावायद समय-समय पर होते रही है लेकिन दृढ़इच्छाशक्ति के अभाव में वह कार्यवाही भी लेटलतीफी का शिकार हो गई है, ताजा मामला बूढ़ी के मेहरा तालाब का है जहां चिन्हित 16 अतिक्रमणकारियो को हटाने की कार्यवाही को लेकर प्रशासन ने एनजीटी के आदेश का हवाला दिया था जिसको लेकर महिला नेत्री मनोरमा नागेश्वर के एक सप्ताह से ज्यादा समय तक आमरण अनशन किये जाने के बाद प्रशासन ने उनके तालाब के सीमांकन की मांग को स्वीकार किया था जिसके तहत कार्यालय कलेक्टर नजूल बालाघाट के 11 फरवरी को निकले आदेश में राजस्व निरीक्षक अशोक अडमे के नेतृत्व में 6 सदस्यीय टीम का गठन किया गया था जो मंगलवार 22 फरवरी को सीमांकन करने पहुंची थी लेकिन सीमांकन करने जब दल पहुंचा तो उसे खदेड़ दिया गया है जिसके बाद दल वापस आ गया।

मंगलवार को सीमांकन दल को भगाने वाली महिलाओं का कहना है कि पहले चिन्हित अतिक्रमण हटाया जाये उसके बाद सीमांकन किया जाये जबकि नियमानुसार सीमांकन के बाद तालाब की सीमा में आने वाले सभी अतिक्रमणों को हटाया जाना है जिसमें शासकीय, अद्र्धशासकीय, निजी पट्टाधारी भवन और दुकाने भी शामिल है जिसके लेकर नजूल का दल मंगलवार को सीमांकन करने पहुंचा था।

अब सीमांकन करने जाने वाले दल को घुसने नहीं देने की बात....

एक जानकारी के अनुसार लगभग दो से ढाई एकड़ में फैले इस तालाब पर शनै: शनै: अतिक्रमणकारियों का कब्जा होने लगा और समय के साथ यह तालाब सिकुड़ता चला गया। जागरूक नागरिक द्वारा शहर के जलस्त्रोत को बचाने जब एनजीटी में इस मामले को ले जाया गया तो एनजीटी ने प्रशासन को तालाब से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिये जिसके बाद प्रशासन ने 16 अतिक्रमणकारियों को चिन्हित कर उनके अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की तो मामला बढ़ता चला गया। हटाये जाने वाले अतिक्रमणकारियो का नेतृत्व कर रही महिला नेत्री श्रीमती मनारेमा नागेश्वर ने इसके खिलाफ आंदोलन कर तालाब का सीमांकन कर सभी अतिक्रमण हटाने की मांग की। एक सप्ताह तक किये गये आमरण अनशन आंदोलन के बाद प्रशासन ने उनकी मांग स्वीकार की और तालाब का सीमांकन के दल भिजवाया लेकिन उसे भगा दिया गया जिसके बाद अब सीमांकन करने जाने वाले दल को घुसने नहीं देने की बात कही जा रही है जिससे सीमांकन होगा या नहीं, यह सवाल खड़े हो रहे है। अभी इस संबंध में कोई अधिकारिक जानकारी भी सामने नही आई है।

इनका कहना है

हम सीमांकन का विरोध करते है। तालाब में जहां अतिक्रमण चिन्हित किया गया है वहंा से पहले अतिक्रमण तोड़ा जाये। 20-25 परिवार यहां सालों से निवासरत है, हमारे पास पट्टा है। हम याहं सीमांकन नही करने देंगे।

सुनीता कौशल, रहवासी

हम सीमांकन नही करने देंगे और सीमांकन करने वालों को घुसने भी नही देंगे। हम चाहते है कि पहले अतिक्रमण हटाया जाये जिसके बाद सीमांकन किया जाये और हम तो इसे बूढ़ी तालाब के नाम से जानते थे किसी जाति विशेष के नाम पर इस तालाब का नाम बदला जाये।

जमीला बी, रहवासी

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