बीच रोड पर खड़ी शहरी गाडिय़ों पर करम यातायात विभाग का बाहरी गाडिय़ों पर सितम

 बीच रोड पर खड़ी शहरी गाडिय़ों पर करम यातायात विभाग का बाहरी गाडिय़ों पर सितम



बालाघाट। बालाघाट शहर में यातायात विभाग जो व्यवस्था बनाता है वह तारीफे काबिल है। जहां मेन रेाड पर प्रात:8 बजे से शाम 8 बजे तक भारी वाहनों के प्रतिबंधित होने के बावजूद 10 चका और 12 चका ट्रक प्रतिदिन आसानी से शहर के भीतर आते जाते नजर आते है वही यह भारी वाहन को रोकने या तो हनुमान चौ पर यातायात विभाग का कर्मी मौजूद नही रहता या फिर कहीं न कही यातायात विभाग की सहमति से ही हो सकता है यह शहर के भीतर प्रवेश कर जाते हों, जो भी हो मेन रोड की बिगड़ती यातायात  व्यवस्था से हर कोई परेशान है और हर थोड़ी-थोड़ी दूर पर कुछ-कुछ देर में जाम लग जाता है और दोपहर को एक-दो बार यातायात विभाग का एक वाहन शहर में जरूर गश्ती करता है जिसमें लगे माईक से सिर्फ दुपहिया वाहन चालकों को कड़ी फटकार लगाई जाती है कि वह अअपना वाहन हटा ले अन्यथा चालानी कार्यवाही कर दी जायेगी वही गरीब ठेले वाले जो सड़कों पर फल-फू्रट बेचने निकलते हैं उन्हें भी फटकार का सामना करना पड़ता है जहां तक यह कार्यवाही रास्ते को व्यवस्थित बनाने की ठी भी हो लेकिन शहर के मेन रोड, गोंदिया रोड, सर्किट हाऊस रोड पर खड़े चौपहिया वाहनों पर कर्यावाही होती नही दिखती जो घंटो आधी सड़क पर अपने वाहन खड़े कर रेस्टॉरेंट या बड़े शॉपिंग मॉल में घंटो बिताते है बल्कि उन कार पर अवश्य कार्यवाही हो रही है जो बालाघाट पासिंग की नही है। गौर करें तो नम्बर प्लेट देखकर व्हील लॉक लगायें जाते है, ऐसा नजारा शहर में कभी भी देखने मिल सकता है। बुधवार की शाम की ही बात करे तो सर्किट हाऊस पर खड़े अधिकांश वाहन जिसमें छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र एवं बालाघाट जिले के बाहर के वाहनों को ही व्हील लॉक किया गया वही शहरी वाहन भले ही वह सड़क पर खड़े हो उन पर यातायात विभाग की रहमी दिखाई दी जो शायद अपनों पर रहम और गैरों पर सितम जैसी कार्यवाही नजर आती है जबकि यह कार्यवाही बिना भेदभाव की होनी चाहिए।

एमपी 50 पर नहीं लगे व्हील लॉक

शहर के अंबेडकर चौक से हनुमान चौक ततक सर्किट हाऊस से गोंदिया रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर पिछले कुछ महीनों से दोनो छोर चौपाटियों से पट गये है और तरह-तरह के वेस्टर्न फूड्स की दुकाने यहां सज गई हैं जहां शाम से ही जायकेदार फूड का आनंद लेने सैकड़ों की तादाद में लोग जमा हो जाते हैं और दुपहिया एवं चौपहिया वाहनों की कतारें सड़कों तक लग जाती है क्योंकि इन फूड विक्रेताओं ने अपने फूड सेंटरों को जमाने सड़कों के करीब तक तो कुर्सिया लगा दी है और आखिरकार वाहन खड़े सड़कों पर ही होते हैं लेकिन शाम के बाद इत्तेफाक ही यातायात विभाग की कार्यवाही होती है और होती भी है तो चुन-चुन कर बाहरी वाहनों को ही व्ही लॉक लगाया जाता है जो शायद शहर के यातायात नियमों से अनभिज्ञ है, वह तो शहर के खड़ी गाडिय़ों को देखकर उनके जैसे ही अपनी गाडिय़ों को भी पार्क कर देते है और जब वह दुकानों से बाहर आते है तो उनके वाहन में लॉक टंगा दिखाई देता है। ऐसे ही बालाघाट के समीपस्थ जिले से आये एक वाहन मालिक का कहना आया कि हमें तो ज्ञात ही नही था कि बालाघाट में वाहन खड़े करने की क्या व्यवस्था है बल्कि हमने शहर के अन्य वाहनों को जैसे खड़े देखा वैसे ही खड़ेकर दिया और हमारी गाड़ी को व्हील लॉक लगाकर चालान किया गया। देखा जाए तो यातायात विभाग की कार्यवाही बीच सड़क पर खड़े वाहनों पर सही हैं लेकिन एमपी 50 वाहनों पर भी यह कार्यवाही होनी चाहिए ऐसा नही कि बाहर से आये वाहनों पर ही यह कार्यवाही हो। ऐसी ही कुछ घटनाओं के संबंध में जब मीडियाकर्मी यातायात के जिम्मेदार अधिकारियों से इस संबंध में कुछ पूछना चाहते है तो वह तैश में आकर कह देते है जो छापना है छाप लो....।


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