मेसर्स डीपी राय खदान मिरगपुर में स्थानीय युवकों को नही दिया जा रहा रोजगार

 मेसर्स डीपी राय खदान मिरगपुर में स्थानीय युवकों को नही दिया जा रहा रोजगार




ग्रामीण लगातार करते है विरोध।

प्रशासनिक अधिकारी भी नही ले रहे सुध।

बालाघाट। जिले के विकासखंड खैरलांजी अंतर्गत मिरगपुर पांढरवानी में स्तिथ मेसर्स डीपी राय माइन में स्थानीय बेरोजगार युवको को नौकरी दिए जाने की मांग जोरो से उठी है, स्थानीय बेरोजगारों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मिरगपुर सहित आसपास के ग्रामीणों के द्वारा इस मामले को लेकर कुछ दिनों पहले कलेक्ट्रेट में भी ज्ञापन दिया गया था परंतु इस मामले की अभी तक किसी प्रकार से जांच नही की गई है।

स्थानीय युवाओं को रोजगार न देकर दूसरे राज्य महाराष्ट्र के मजदूरों को दिया जा रहा रोजगार

खैरलांजी जनपद की ग्राम पंचायत मिरगपुर के स्थानीय पांढरवानी गांव में मेसर्स डीपी राय मैंगनीज खदान संचालित हो रही है, लेकिन इस खदान के संचालक के द्वारा स्थानीय लोगो को रोजगार न देकर पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से आये लोगों को पहले प्राथमिकता दिए जाने पर ग्रामीणों ने गहरी नाराजगी जताई है।

नियमानुसार जहां पर माइंस संचालित होती है वहां के 60 से 70 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाता है, परंतु अभी 10 प्रतिशत लोग भी जो यहां के निवासी है उन्हें रोजगार नहीं दिया जा रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए कलेक्ट्रेट में भी बड़ी संख्या में पहुंचे मिरगपुर, पांढरवानी समेत आसपास के ग्रामीणों ने मामले की जांच कर स्थानीय लोगों को रोजगार दिलाए जाने की मांग की थी परंतु अभी तक इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया है।

प्रशासनिक अधिकारी नही दे रहे ध्यान

       ग्रामीणों से मिली जानकारी अनुसार गांव के और आसपास के कुछ लोग कलेक्ट्रेट के अलावा जनपद पंचायत वारासिवनी में भी उक्त मामले में कार्यवाही के लिए ज्ञापन सौंपने गए थे जहां पर उन्हें वारासिवनी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व संदीप सिंह के द्वारा आश्वासन दिया गया था की उक्त मामले की जांच कर कार्यवाही की जाएगी। साथ ही अनुविभागीय अधिकारी के द्वारा आश्वासित भी किया गया था कि वे जब भी निरीक्षण के लिए आयेगे ग्रामवासियों को जरूर बुलायेगे और उन्ही के सामने सारी कार्यवाही करेंगे परंतु अभी तक किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने उक्त मामले को संज्ञान में नहीं लिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि हमने इस मामले में खदान संचालक राहुल सिंह से बहुत बार बात की है परंतु वो ये  बोलता है कि प्रशासन उसका खरीदा हुआ है और गांव के लोग उसका कुछ भी नही कर सकते।

आवश्यकता नहीं कहकर टाल रहे खदान संचालक 

      मिरगपुर के ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय बेरोजगारों द्वारा करीब एक साल से खदान संचालक से भूमिगत खदान मे कार्य पर लगाने के लिए निवेदन किया जा रहा है, लेकिन खदान संचालक द्वारा हर बार अभी मजदूरों की आवश्यकता नहीं है कहकर टाल देता है। वहीं एक साल में 50 से अधिक बाहर के मजदूरों को खदान में कार्य पर लगाया गया है।

मजदूरों से रुपये लेकर लेते हैं काम पर

        लोगों ने बताया कि जनचर्चा का विषय की खदान संचालक बाहर के मजदूरों से 20 से 25 हजार रुपये लेकर उन्हें काम पर रख रहे है और स्थानीय बेरोजगारों को भगा रहे है। जिसके चलते ही स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार की तलाश में बाहर जाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि खदान संचालक नियम विरुद्ध तरीके से मजदूरों की भर्ती कर रहे है जिससे बेरोजगार मजदूर काम न मिलने से हताश होकर जुआ, सट्टा, नशा के तरफ आर्कषित हो रहे है। जिसके चलते ही स्थानीय लोगों ने खदान मामले में हस्तक्षेप कर स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने की मांग की है। स्थानीय लोगो को रोजगार न देकर बाहरी राज्य (महाराष्ट्र) से आये लोगों को पहले प्राथमिकता दिए जाने पर ग्रामीणों ने गहरी नाराजगी जताई है। पहले कंपनी स्थानीय 60 से 70 प्रतिशत लोगों को नौकरी देने की बात करती थी, परंतु अभी 10 प्रतिशत लोग भी जो यहां के निवासी है, उन्हें रोजगार नहीं दिया जा रहा है।

खनिज मजदूर एकता यूनियन के सचिव ने 7 लोगो को माइंस से निकालने के लिए खदान संचालक से लिए थे रुपए

मिरगपुर के स्थानीय लोगो ने खनिज मजदूर एकता यूनियन बालाघाट के प्रमुख सचिव संतोष मंडलवार जो मिरगपुर माइन में अपना यूनियन चलाते थे। सोमवार को मिरगपुर में उनका घेराव कर संतोष मंडलवार से पूछताछ की गई, तब उसने यह स्वीकार किया है की वह डीपी राय माइन में अपना यूनियन चलाता था और उसने खदान संचालक के कहने पर माइन में काम कर रहे 7 लोगो को अनफिट बताकर काम से निकाल दिया था। इस काम के बदले उसे डीपी राय माइन के संचालक राहुल सिंह के द्वारा मोटी रकम भी मिली थी इस बात की पुष्टि स्वयं खनिज मजदूर एकता यूनियन के सचिव संतोष मंडलवार ने की है।

ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

जानकारी अनुसार मिरगपुर के स्थानीय युवकों को इसीलिए काम पर नही रखा जाता है ताकि खदान में जो असुविधाएं चलती है इसके बारे में कोई संगठन बनाकर आवाज ना उठाए। मिरगपुर के युवकों ने कहा है कि जल्द ही इस मामले की जांच करवाकर कोई उचित कार्यवाही नही हुई तो गांव के बेरोजगार युवा इसको लेकर उग्र आंदोलन करेंगे।

ग्रामीणों ने जानकारी देते हुए बताया कि खदान में 250 से 300 मजदूर कार्य करते है खदान में खनिज मजदूर एकता यूनियन के द्वारा अवैध रूप से वसूली की जाती है जो मजदूर खदान में कार्यरत नही है उसके नाम से भी रसीद काटी जाती है।

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