जंगल में चारों तरफ लगी आग को बुझाने के लिए आज भी परंपरागत उपाय
बालाघाट। गर्मी के मौसम में जंगल में आग लगना आम बात है। लेकिन जब जंगल सुलगता है, तो आग का रास्ता रोकना मुश्किल हो जाता है। मंगलवार को जंगल की आग इतनी तेजी गति से फैली कि धुआं रिहायशी क्षेत्रों तक पहुंच गया। चारों तरफ जंगल में लगी आग ने बैचेनी बड़ा दी है। जंगल में लगी आग वन विभाग का अमला बुझा नहीं पा रहा है और आग तेजी से फैल रही है कि इसे रोकने के परंपरागत उपाय भी बौने साबित हो रहे हैं।
आग रोकने यह किए जा रहे उपाय
-जंगल में आग से बचाव के लिए तीन मीटर तक लाइन कटाई की जाती है।
-झाडिय़ों और सूखी घास से आग ने फैले इसके लिए उनका संपर्क तोड़ा जाता है।
-कंपार्टमेंट, बीट लाइन, रेंज लाइन, वन मंडल व जिला लाइन को काटकर अलग-अलग किया जाता है।
-झाड़ी और पौधों को जनवरी माह में काट दिया जाता है।
-15 फरवरी तक इन्हें जला दिया जाता है, ताकि इनसे जंगल में आग न लगे।
-सड़क किनारे और प्लांटेशन एरिया से तीन मीटर तक लाइन कटाई की जाती है।
-जन-जागृति लाकर और वन समितियों के माध्यम से प्रचार-प्रसार करके।
-ग्लोबर के माध्यम से आग बुझाने के प्रयास।
निगरानी के उपाय
- आग पर निगरानी पेट्रोलिंग, कैंप लगाने के साथ ही फायर वाच टावर भी बनाए जाते हैं।
हर आग पर दर्ज होता है वन अपराध
-जंगल में लगने वाली हर आग पर वन अपराध दर्ज होता है।
-कितना क्षेत्र जला और कितना वन संपदा को नुकसान पहुंचा इसका आकलन किया जाता है।
अग्निसूचना के लिए आधुनिक उपाय
- जंगल में लगने वाली आग के लिए मैदानी अमले के साथ सिंपली फायर के जरिए आग की सूचना मिल जाती है। लेकिन आग बुझाने के लिए वही पारंपरिक उपाय ही अपनाए जाते हैं।
विज्ञानी ने यह बताई धुंध की वजह
कृषि विज्ञान केंद्र बडग़ांव के मौसम विज्ञानी धर्मेंद अगासे बताते हैं कि साफ आसमान के साथ शांत परिस्थितियों में अवरक्त सौर विकिरण द्वारा सूर्यास्त के बाद भूमि के ठंडा होने से विकिरण कोहरा बनता है। कूलिंग ग्राउंड फिर चालन द्वारा आसन्ना हवा को ठंडा करता है। जिससे हवा का तापमान गिर जाता है और ओस बिंदु तक पहुंच जाता है जिससे कोहरा बनता है। कोहरे की परत एक मीटर से भी कम मोटी हो सकती है। विकिरण कोहरा रात में होता है और आमतौर पर सूर्योदय के बाद लंबे समय तक नहीं रहता है। आमतौर पर विकिरण कोहरा गर्मी के दिनों में होता है या एक शांत रात में आसमान साफ होने की अधिक संभावना होती है। क्योंकि उस समय जमीन की सतह पर ऊष्मा को कम करने के लिए हवा मौजूद नहीं रहती है। जैसे-जैसे जमीन ठंडी होती है, ऊपर की हवा अपने ओस बिंदु से नीचे ठंडी हो सकती है। विकिरण कोहरा आमतौर पर धूसर होता है। एक स्थान पर रहने की प्रवृत्ति होती है और अगले दिन सूर्य की किरणों के तहत चली जाती है। विकिरण कोहरे के घने उदाहरण घाटियों या पानी के शांत पिंडों में बनते हैं। शाम को विकिरण कोहरा बनता है जब दिन के दौरान पृथ्वी की सतह द्वारा अवशोषित गर्मी हवा में विकीर्ण होती है। जैसे ही गर्मी को जमीन से हवा में स्थानांतरित किया जाता है, पानी की बूंदें बनती हैं। कभी-कभी लोग विकिरण कोहरे के संदर्भ में ग्राउंड फाग शब्द का उपयोग करते हैं।